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'सपा से तोप मांग रही कांग्रेस, पर तमंचा भी नहीं मिल रहा'... रामपुर में मुख्तार अब्बास नकवी का करारा तंज

Published: Sun, 01 Nov 2026 06:33 PM (IST)

रामपुर में मुख्तार अब्बास नकवी ने सपा नेता आजम खां की ईडी गिरफ्तारी पर कहा कि वक्त बदलता रहता है ...और पढ़ें

प्रेसवार्ता करते पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी। जागरण

प्रेसवार्ता करते पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी। जागरण

HighLights

  1. सपा-कांग्रेस गठबंधन पर किए कटाक्ष, कहा-सीटों पर चल रही बंदरबांट

जागरण संवाददाता, रामपुर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सपा नेता आजम खां की रिहाई के बाद ईडी द्वारा गिरफ्तारी पर कहा कि वक्त एक सा नहीं रहता।वह बदलता रहता है। जब किसी का वक्त मजबूत होता है तो उसे वक्त का सम्मान करना चाहिए और अहंकार से बाज रहना चाहिए।

नकवी रविवार को संत शिरोमणि रविदास सर्किट हाउस में मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने कांग्रेस की रैली और कांग्रेस-सपा गठबंधन पर भी कटाक्ष किए। कहा कि कांग्रेस पहले माक पार्लियामेंट करती थी और अब रैली कर रही है।

सपा-कांग्रेस में चल रही सीटों के बंदरबांट पर कहा कि शार्ट सर्किट झेल रही झांसे की झालर एक दूसरे को झटके पर झटका दे रही है। कांग्रेस, सपा से उत्तर प्रदेश में तोप मांग रही है, जबकि सपा तमंचा भी देने को तैयार नहीं है।

थोक में सीटें मांगने वालों को फुटकर में भी सीट नहीं मिल रही है, जबकि उन्हें भी मालूम है कि 27 के चुनावी संग्राम में फुंकी तोप और छुटा तमंचा दोनों टांय- टांय फिश होंगे। बीजेपी की जीत की हैट्रिक सपा गठबंधन को एक बार फिर हार का हमसफर बनाएगी।

कांग्रेस की बर्बादी की बैसाखी बने दलों को समझना होगा कि सावधानी हटी दुर्घटना घटी। कांग्रेस की ज़मीन बंजर है, लेकिन आज भी उसके हाथ बेवफाई का खंजर है।

नकवी ने कहा कि भारत में आजादी के बाद अब तक हुए 18 आम चुनाव और सैकड़ों राज्यों के निर्वाचन में जनता ने बैटल को जनादेश का हथियार बनाया, बुलेट-बवाल को नहीं। आज भी यही जनतंत्र का जुनून, जज्बा जिंदाबाद है।

लोकतंत्र की ताकत को परिवारतंत्र की प्रायोजित आफ़त से पलीता लगाने का प्रयास परास्त होगा। विधान परिषद चुनाव परिणाम पर नक़वी ने कहा कि भाजपा ने देशभर में हुए इन चुनावों में भी अच्छा प्रदर्शन किया है।

मगर, इन चुनावों को किसी और आगामी चुनाव से जोड़ना ठीक नहीं है। हर चुनाव का मूड़, माहौल, मुद्दा अलग होता है। कोई एक चुनाव दूसरे चुनाव का न लिटमस टेस्ट होता है न जनमतसंग्रह।

भारत में हर छह महीने में पंचायत से पार्लियामेंट, विधान सभा से विधान परिषद, स्थानीय निकाय से कोआपरेटिव आदि के चुनाव होते है। हर चुनाव अलग तेवर और फ्लेवर का प्रतीक होता है। इससे पहले नकवी का यहां पहुंचने पर भाजपाइयों ने स्वागत किया।

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