आजम खान की जमानत से बदलेगा UP का सियासी गणित! सांसद मोहिबुल्लाह से अदावत और टिकटों पर रार तय
आजम खान को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई तय है, जिससे सपा में अंदरूनी बेचैनी बढ़ गई ...और पढ़ें

आजम खान और मोहिबुल्लाह नदवी
HighLights
सपा में हावी है गुटबाजी, रामपुर में ही आजम और सांसद मोहिबुल्लाह के बीच चल रही रार
जागरण संवाददाता, रामपुर। हाईकोर्ट से राहत मिलने से लगभग एक वर्ष जेल में बिताने के बाद सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ जेल से बाहर आ जाएंगे। इस खबर से आजम खान के विपक्षी जितने बेचैन नहीं हैं, उससे अधिक उनकी पार्टी में ही बेचैनी नजर आ रही है। अब तक सपा प्रमुख अखिलेश यादव से नजदीकी बढ़ाकर विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे टिकट दावेदारों की धड़कनें भी तेज हो गई हैं।
आजम के जेल से बाहर आते ही सपा के टिकट वितरण में फेरबदल तय माना जा रहा है। वहीं, सांसद मोहिबुल्लाह नदवी से आजम की अदावत भी सपा के लिए मुश्किलें खड़ी करेगी।
लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार आजम खान को हाईकोर्ट ने राहत दे दी। दो पैन कार्ड मामले में आजम को निचली अदालत से दस वर्ष जबकि, अब्दुल्ला को सात वर्ष कारावास की सजा मिली थी।
इसके खिलाफ आजम ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब उनकी सजा निलंबित हो गई है। ऐसे में आजम और अब्दुल्ला का जेल से बाहर आना तय हो गया है।
पिछले वर्ष सीतापुर जेल से रिहाई के बाद जब आजम खान रामपुर आए थे, तब भी उनके तल्ख लहजे से कई बार पार्टी मुखिया तक असहज हो गए थे। हालांकि, अखिलेश यादव खुद उनसे मिलने लखनऊ से रामपुर आए थे।
माना जा रहा था कि आजम की सपा सांसद मोहिबुल्लाह से चल रही अदावत को वह खत्म करा देंगे। मगर आजम ने शर्त रख दी थी कि वह अखिलेश से जब मिलेंगे तो उनके बीच कोई तीसरा व्यक्ति मौजूद नहीं होगा।
इस वजह से लखनऊ से एक ही विमान में अखिलेश के साथ बरेली पहुंचे सांसद मोहिबुल्लाह को वहीं छोड़कर अखिलेश अकेले आजम के आवास पर पहुंचे थे। आजम ने कई बार अपने बयानों में सांसद पर तंज कसे थे।
हालांकि, सांसद ने भी उन पर पलटवार किया था। कुछ माह पूर्व आरडीए के जौहर विश्वविद्यालय के अवैध घोषित भवनों को ध्वस्त करने के आदेश पर जब सांसद मोहिबुल्लाह विश्वविद्यालय पहुंचे थे, तब भी उनके लिए दरवाजे नहीं खुले थे।
इससे साफ है कि सांसद के प्रति आजम का रुख नरम नहीं हुआ है। इसी तरह मुरादाबाद में पूर्व सांसद डाॅ. एसटी हसन से भी आजम की अदावत चर्चा में है।
विधानसभा चुनाव में न सिर्फ रामपुर बल्कि, मुरादाबाद, अमरोहा, संभल और बदायूं आदि की सीटों पर टिकट बंटवारे में भी आजम की दखल की पूरी संभावना है। ऐसे में इन सीटों पर दावेदारी जताने वालों के बीच भी खलबली मच गई है।
सियासी पंडितों का मानना है कि जेल से बाहर आते ही आजम का खेमा जोरशोर से सक्रिय होगा। इसके चलते आजम व पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में टकराव तक के हालात बन सकते हैं, जोकि अखिलेश यादव तक को असहज करेगा।
हालांकि, फिलहाल आजम की जमानत की खबर पर सपाईयों में उत्साह की लहर है। सपा जिलाध्यक्ष अजय सागर कहते हैं कि आजम खान पार्टी के संस्थापकों में शामिल हैं, उनका हर निर्णय पार्टी हित से ही जुड़ा होगा।
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