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'BEO नहीं जानते जांच करना', इलाहाबाद हाई कोर्ट की बेसिक शिक्षा विभाग को कड़ी नसीहत, बीईओ को प्रशिक्षण देने का आदेश

Published: Tue, 03 Nov 2026 05:02 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रामपुर के एक मामले में खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ...और पढ़ें

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HighLights

  1. रामपुर के परिषदीय विद्यालय में महिला शिक्षक पर लगे आरोपों की जांच के बाद आरोप पत्र किया निरस्त, बरकरार रखा निलंबन

  2. निलंबन के विरुद्ध महिला शिक्षक ने न्यायालय में की थी अपील, अनुशासनात्मक प्रकिया के व्यावहारिक अनुभव की सीख भी दी

अनिल अवस्थी, रामपुर। परिषदीय विद्यालय में महिला शिक्षक पर बाहरी हस्तक्षेप, शिक्षकों पर दबाव बनाने और उनसे हर महीने चार से पांच हजार रुपये वसूली के आरोपों से शुरू हुए मामले में विभागीय जांच और फिर आरोप पत्र को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कठघरे में खड़ा कर दिया। उच्च न्यायालय ने प्रकरण में जारी आरोप पत्र निरस्त करते हुए विभाग को बिलासपुर के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) अशोक कुमार को सेवा नियमों और अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिलाने पर विचार करने की नसीहत दी है।

न्यायालय ने कहा कि उन्हें ऐसे कार्यालय से संबद्ध करने पर विचार किया जाए, जहां उन्हें विभागीय जांच और अनुशासनात्मक प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव मिल सके।

मामला हाई कोर्ट में रिट-ए संख्या 16504/2026, शुभि श्रोत्रिय बनाम उत्तर प्रदेश व अन्य से जुड़ा है। विभाग ने छह जुलाई 2026 को शुभि को निलंबित किया।

नौ जुलाई को बीईओ की ओर से आरोप पत्र जारी कर विभागीय कार्रवाई शुरू की। आरोप पत्र के मुताबिक, शुभि के पति सौरभ जायसवाल विद्यालय के कामकाज में हस्तक्षेप करते थे।

कर्मचारियों के आडियो-वीडियो के आधार पर भी बाहरी हस्तक्षेप, शिक्षकों पर दबाव बनाने, मानसिक उत्पीड़न करने और उगाही का उल्लेख था। 23 जून को शिक्षक अनुष्का त्यागी के साथ अभद्रता और थप्पड़ मारने का प्रयास करने का आरोप भी था।

विभागीय आदेश में तीन जुलाई को उस समय खंड शिक्षा अधिकारी रहे सुनील कुमार सक्सेना के निरीक्षण का भी उल्लेख किया गया था। शुभि ने इसके विरुद्ध प्रस्तुत आरोप पत्र की वैधानिकता व निलंबन को चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने सुनवाई में पाया कि आरोप पत्र में आरोपों के समर्थन में किसी विशिष्ट घटना, तारीख और आवश्यक तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख नहीं था।

न्यायालय ने विभागीय कार्रवाई में उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

साथ ही विभाग को स्पष्ट आरोपों, घटना की तारीख और आवश्यक तथ्यों के साथ नियमानुसार नया आरोपपत्र जारी करने को कहा। आदेश में छह जुलाई का निलंबन निरस्त नहीं किया गया है।

 

हाई कोर्ट का आदेश प्राप्त हुआ है। अभी उसका अवलोकन किया जा रहा है। उसी क्रम में आरोपित शिक्षक को दूसरा आरोपपत्र जारी किया जाएगा। बीईओ के प्रशिक्षण को मिले सुझाव पर भी उचित निर्णय लिया जाएगा।

- कल्पना देवी, बेसिक शिक्षा अधिकारी


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