यहां गांव-गांव सजती हैं फाग की टोलियां, वसंत से शुरू होने लगती हैं होली की तैयारियां, अब विरासत को आगे बढ़ा रहे युवा
रायबरेली के बेहटा कला में होली का त्योहार अनूठे ढंग से मनाया जाता है। यहां युवा पीढ़ी फाग की बैसवारी ...और पढ़ें


समय कम है?
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संवादसूत्र, लालगंज (रायबरेली)। वैसे छोटी काशी के नाम से मशहूर बेहटा कला में होली का त्योहार एक अलग अंदाज में मनाया जाता है। यहां युवाओं ने फाग की विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी अपनाकर बैसवारी लोक संस्कृति को संजोने व बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रखी है। सिर्फ बेहटा ही नहीं, बैसवारे के कई गांव ऐसे हैं जहां फाग की टोलियां सजती हैं और वसंत पंचमी से ही इसकी तैयारी शुरू हो जाती है। गांवों में युवा फाग गायन का अभ्यास शुरू कर देते हैं तो बुजुर्ग भी उन्हें दिशा दिखाते हैं।
बताते चलें कि बेहटा कला में दो दिन होली मनाई जाती है। पहले दिन रंगों के बजाय धूल व कीचड़ से होली खेली जाती है। रंगों की होली दूसरे दिन खेली जाती है। बेहटा में पहले दिन रंग के बजाय धूल, मिट्टी, गोबर, कीचड़ से होली खेलते हैं। पहले दिन होली खेलने बेहटा समेत अन्य गांवों के लोग वाजपेयी खेड़ा जाते थे। दूसरे दिन वाजपेयीखेड़ा के लोग बेहटा आते थे। यहां बुजुर्गों से कंधे से कंधा मिलाकर युवा वर्ग फाग की विरासत को संभालने में जुटे हैं।
मंजीरा पकड़ना भई दूभर
शहर हो या कस्बे के युवा उन्हें फाग में गाये जाने वाले गीतों की पंक्तियां याद होना तो दूर ढोल पर थाप मारना और मंजीरा पकड़ना तक दूभर है। आज भी ग्रामीण देवलोक वासी हो चुके भगौती प्रसाद दीक्षित, छंगा सिंह, मोहम्मद आशिफ, शिव कुमार पांडेय, प्रताप बहादुर सिंह द्वारा फाग की छोड़ी गई अमिट छाप का अनुसरण कर इस धरोहर को संजोने में जुटे हैं। लोकोक्ति है कि का बलई न होईहैं तो फागै न होई। गांव के राजकिशोर मिश्र उर्फ बलई के फाग गाने की कला के कारण ही कहावत बन गई।
गांव में बसंत पंचमी को शुरू होने वाली फाग चैत्र माह की नवरात्र में अष्टमी को मंदिर से समाप्त होती है। फाग में हिंदू मुस्लिम एकता के दर्शन भी होते हैं। कुछ साल पहले तक गहिरी गांव के मो. हक्का ढोल मढ़ने आया करते थे। इनके निधन के बाद इस बार हसनापुर गांव के लाल मोहम्मद ढोलके मढ़ रहे हैं।
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वह बंडई, पहुरी, हसनापुर, मदईखेड़़ा, बाबा का पुरवा में भी ढोलकें मढ़ने के बाद तैयारियां जोरों पर हैं। सुरेश बहादुर सिंह, दीपक सिंह, धीरेंद्र बहादुर, कुलदीप दीक्षित, प्रदीप दीक्षित, अरिमर्दन, श्याम बहादुर, बिंदा समेत अन्य लोग फाग के अभ्यास में जुटे हैं।
