गंगा में गिर रहा पांच नालों का गंदा पानी, कार्तिक पूर्णिमा स्नान में होगी परेशानी
रायबरेली में कार्तिक पूर्णिमा से पहले पांच नालों का दूषित पानी सीधे गंगा में गिर रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान में परेशानी हो सकती है।

HighLights
कार्तिक पूर्णिमा से पहले गंगा में दूषित पानी का प्रवाह।
रायबरेली के पांच नालों से गंगा हो रही प्रदूषित।
बायो रेमेडिएशन के दावों पर स्थानीय लोगों का सवाल।
जागरण संवाददाता, रायबरेली। कार्तिक पूर्णिमा पर मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाने की तैयारी कर रहे श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कारण यह है कि यहां के नालों का दूषित पानी गंगा में गिर रहा है। इसे रोकने के लिए जिम्मेदारों की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।
नगर पंचायत प्रशासन नालों के पानी को बायो रेमेडिएशन विधि से शोधित कर गंगा में गिराए जाने का दावा कर रहा है, जबकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि धरातल पर शोधन के नाम पर महज खानापूर्ति हो रही है। नतीजतन सीवरेज और घरों से निकलने वाला दूषित पानी नालों के रास्ते सीधे मां गंगा की पवित्र धारा को प्रदूषित कर रहा है।
कस्बे से निकलने वाला गंदा पानी पांच नालों के माध्यम से गंगा में पहुंच रहा है। कार्तिक पूर्णिमा के पहले भी इन नालों के दूषित पानी को रोकने अथवा उसका प्रभावी शोधन सुनिश्चित करने की दिशा में कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।
ऐसे में हजारों श्रद्धालुओं की आस्था और स्वास्थ्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बायो रेमेडिएशन के नाम पर सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी की जा रही है। यदि वास्तव में नालों के पानी का शोधन हो रहा है तो फिर गंगा में गंदा पानी कैसे पहुंच रहा है।
लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों से मौके पर जांच कराने और नालों के पानी का नमूना लेकर उसकी गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। अधिशासी अधिकारी सिकंदरादित्य का कहना है कि बायो रेमेडिएशन विधि से नालों को शोधित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर नालों का पानी गड्ढा खोदकर रोकने की योजना है।
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