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सई में बाढ़ से बरचंदा गांव बना टापू, नाव से स्कूल जा रहे बच्चे; अस्पताल और बाजार पहुंचने में भी भारी जोखिम

Published: Tue, 06 Oct 2026 10:33 PM (IST)

सई नदी में आई बाढ़ से रायबरेली का बरचंदा गांव पूरी तरह कट गया है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हुआ है।

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HighLights

  1. बरचंदा गांव बाढ़ से पूरी तरह कट गया, बना टापू।

  2. बच्चे नाव से स्कूल जा रहे, पढ़ाई हुई प्रभावित।

  3. फसलें बर्बाद, ग्रामीणों को आवागमन में भारी जोखिम।

संवाद सूत्र, रायबरेली। सई नदी की बाढ़ से बरचंदा गांव का संपर्क पूरी तरह कट गया है। भोला खेड़ा, लउवा और सिग्नन खेड़ा की ओर जाने वाले तीनों रास्ते पानी में डूबने से बंद हैं। करीब 15 दिनों से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है।

मंगलवार को नाव की व्यवस्था होने पर कुछ बच्चे उसी के सहारे स्कूल गए। अस्पताल, बाजार पहुंचने के लिए ग्रामीणों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। खेतों में पानी भरने से फसल बर्बाद होने की कगार पर है।

गांव अब चारों ओर पानी से घिरा टापू नजर आ रहा है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सिग्नन खेड़ा से बरचंदा के बीच नाव लगाई है। इसी नाव से ग्रामीण बाजार पहुंचे। नाविक हरिशंकर उर्फ बाबा ग्रामीणों के लिए खेवनहार बने हैं। हालांकि तेज बहाव के बीच नाव से सफर करना जोखिम भरा है। कक्षा सात की छात्रा रुचि ने बताया कि बाढ़ के कारण वह करीब एक सप्ताह से स्कूल नहीं जा सकी थी। मंगलवार को नाव की व्यवस्था होने पर वह स्कूल पहुंची।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक भी चिंतित 

साइकिल लेकर नाव से घर लौट रही रुचि ने बताया कि पानी के बीच नाव से आने-जाने में डर लगता है, लेकिन पढ़ाई के लिए दूसरा रास्ता नहीं है। छात्र शंकर राजपूत ने बताया कि पहले वह साइकिल से सड़क तक पहुंचकर स्कूल जाता था, लेकिन रास्ता डूबने के बाद नाव ही सहारा है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक भी चिंतित हैं।

लवकुश, संतोष भरोसे, पंकज और रामसागर समेत ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ का पानी गांव के किनारे बने तालाब तक पहुंच रहा था। घरों में पानी घुसने की आशंका पर ग्रामीणों ने बहाव रोकने के लिए अस्थायी बांध बनाया। उनका कहना है कि समय रहते यह प्रयास नहीं किया जाता तो दर्जनों घर प्रभावित हो सकते थे।

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कोतवाल श्यामलाल पाल का कहना है कि बाढ़ प्रभावित गांव का जायजा लिया गया है। ग्रामीणों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। पुलिस टीम प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है।






उन्नाव के सीमावर्ती गांवों के बच्चे भी परेशान
उन्नाव के करदहा समेत सीमावर्ती गांवों के रास्ते डूबने से निजी स्कूल बसों के रूट बदलने पड़े हैं। चालक देवेंद्र कुमार के मुताबिक बदले मार्ग से बसों को करीब 25 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।


महराना में झोपड़ी ढही
सई की बाढ़ से महराना गांव में वृद्धा की झोपड़ी ढह गई। गृहस्थी का सामान पानी में डूबकर बर्बाद हो गया और वृद्धा सुरक्षित ठिकाने की तलाश में भटक रही है। ग्रामीणों के अनुसार पानी बढ़ने से जंगली जानवर ऊंचे स्थानों की ओर आ रहे हैं। इसी बीच एक जंगली जानवर वृद्धा का बकरा उठा ले गया। इससे ग्रामीणों में भय बढ़ गया है।


पुलिस ने लिया जायजा
पुलिस टीम ने प्रभावित गांव का निरीक्षण किया। ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली और बाढ़ के पानी में अनावश्यक रूप से जाने से बचने तथा बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से नाव की व्यवस्था किए जाने से फिलहाल ग्रामीणों को आवागमन में कुछ राहत मिली है, लेकिन गांव को जोड़ने वाले रास्तों के डूबे होने से सामान्य जनजीवन अभी भी पटरी पर नहीं लौट सका है।