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शिक्षक भर्ती के संस्कृत विषय के विज्ञापन में अर्हता स्पष्ट नहीं, UPHESSC अध्यक्ष को संस्कृत विवि के कुलपति ने लिखा पत्र

By Amlendu Tripathi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 29 Sep 2026 05:35 PM (IST)

उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPHESSC) द्वारा संस्कृत शिक्षक भर्ती विज्ञापन में अर्हता स्पष्ट न होने से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के आचार्य डिग्री धारक असमंजस में हैं।

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज।

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज।  

HighLights

  1. अस्पष्ट अर्हता से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से आचार्य की डिग्री प्राप्त असमंजस में 

  2. कहा- 'आचार्य (संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय)' की अर्हता का स्पष्ट उल्लेख किया जाए

राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से 15 सितंबर को प्रकाशित विज्ञापन संख्या में संस्कृत विषय की अर्हता में मात्र 'स्नातकोत्तर संस्कृत' का उल्लेख है। इस कारण संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से आचार्य की डिग्री लेने वाले असमंजस में हैं।

अभ्यर्थियों में भी अर्हता को लेकर भ्रम

वजह यह कि 'आचार्य (संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय)' का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। संस्कृत विषय की पारंपरिक एवं विशिष्ट उच्च शिक्षा व्यवस्था से आचार्य उपाधि प्राप्त अन्य अभ्यर्थियों में भी अर्हता को लेकर भ्रम है। पूर्व में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद/बोर्ड तथा उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से समय समय पर प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों में संस्कृत विषय के अध्यापन पदों के लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता में आचार्य (संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय) स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाता रहा है।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति ने इंगित किया

इस संबंध में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखा है। कहा है, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से प्राप्त 'आचार्य' उपाधि संस्कृत विषय में उच्च स्तरीय विशिष्ट शैक्षिक योग्यता है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, भारतीय विश्वविद्यालय संघ और उत्तर प्रदेश शासन की ओर से निर्धारित समकक्षता संबंधी प्रावधानों के अनुरूप एमए (संस्कृत) के समकक्ष मान्य है।

शुद्धिपत्र जारी किया जाए

उन्होंने बताया कि आयोग की ओर से प्रकाशित विज्ञापन में संस्कृत विषय की योग्यता में सिर्फ 'स्नातकोत्तर संस्कृत' का उल्लेख है। आग्रह है कि संस्कृत विषय से संबंधित सभी विज्ञापनों में शैक्षिक योग्यता में स्पष्ट रूप से 'आचार्य (संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय)' लिखा जाए। वर्तमान विज्ञापन में भी इस योग्यता को शामिल करते हुए शुद्धिपत्र जारी किया जाए। 

पोर्टल में सुधार की मांग

अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 2670 पदों पर प्रवक्ता का विज्ञापन शिक्षा सेवा चयन आयोग ने जारी किया है। प्रतियोगी छात्र प्रतिनिधिमंडल के शीतला प्रसाद ओझा का कहना है कि जो फार्म भरा जा रहा है उसके पोर्टल में कुछ कमियां हैं, उसे ठीक किया जाए। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से डिग्री लेकर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के फार्म रद हो रहे हैं जबकि काशी हिंदू विश्वविद्यालय दो प्रकार की डिग्री देता है।

पोर्टल में सुधार की आवश्यकता बताई

एमए और आचार्य वहां के छात्रों का फार्म स्वीकार किया जा रहा है। यह भी बताया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से 2012 के बाद जिन्होंने आचार्य की डिग्री ली है, उनके भी फार्म स्वीकार हो रहे हैं। इस प्रकरण को संज्ञान में लेकर पोर्टल में सुधार की आवश्यकता है। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान नई दिल्ली से आचार्य की डिग्री लेने वालों के भी फार्म रद हो रहे हैं।

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