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RPNLU विवाद गहराया: कुलसचिव के बाद विधि विश्वविद्यालय के HOD को कुलपति ने दी कारण बताओ नोटिस

By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 29 Sep 2026 04:33 PM (IST)

डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (आरपीएनएलयू) में प्रशासनिक विवाद गहरा गया है, कुलपति ने कुलसचिव के बाद अब विधि ...और पढ़ें

डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (आरपीएनएलयू) के विधि विभाग के विभागाध्यक्ष को कुलपति ने नोटिस दी है।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (आरपीएनएलयू) के विधि विभाग के विभागाध्यक्ष को कुलपति ने नोटिस दी है।

HighLights

  1. लैपटाप की फोरेंसिक जांच में गोपनीय भर्ती दस्तावेज मिलने का दावा

  2. लैपटॉप की फोरेंसिक जांच में गोपनीय भर्ती दस्तावेज मिलने का दावा।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (आरपीएनएलयू) में प्रशासनिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कुलसचिव वरुण कुमार पांडेय को नोटिस जारी करने के दो दिन बाद अब कुलपति प्रो. डॉ. उषा टंडन ने विधि विभाग के विभागाध्यक्ष (एचओडी) डॉ. दीपक शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

नोटिस में पद के दुरुपयोग, उत्पीड़न, कदाचार, विश्वविद्यालय की गोपनीय सूचनाओं के कथित खुलासे और आधिकारिक कार्यों में हस्तक्षेप समेत कई गंभीर आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। डा. शर्मा को एक अक्टूबर को तक जवाब देना होगा।

आरपीएनएलयू में 12 असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति की शिकायत की जांच शासन स्तर पर बनी तीन सदस्यीय कमेटी कर रही है। 31 जुलाई को हुई नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज लीक होने के बाद कुलपति ने मामले की जांच के लिए अगस्त माह में फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन किया था। कमेटी में पूर्व आईएफएस एवं भारत सरकार के पूर्व विशेष सचिव डा. एन. सिंह, पूर्व आइपीएस एवं पूर्व डीजीपी जसपाल सिंह तथा डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ अरविंद सिंह शामिल थे।

इस कमेटी की फोरेंसिक रिपोर्ट को आधार बनाकर एचओडी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। मामले का सबसे अहम पहलू विधि विभाग के विभागाध्यक्ष (एचओडी) डॉ. दीपक शर्मा को आवंटित लैपटॉप से जुड़ा है। इसकी तकनीकी और फोरेंसिक जांच जांच में लैपटॉप से विश्वविद्यालय की गोपनीय सामग्री से संबंधित चार दस्तावेज मिले। इनमें 12 असिस्टेंट प्रोफेसरों के चयन एवं नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज तथा एक असिस्टेंट रजिस्ट्रार की नियुक्ति से संबंधित संचार शामिल बताया गया है।

रिपोर्ट में एक दस्तावेज लैपटॉप के रिसाइकिल बिन से बरामद होने का भी उल्लेख है। लैपटॉप में प्रस्तावित आफिस आर्डर मिलने को लेकर भी जवाब मांगा गया है। नोटिस में नवनियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों के साथ कथित उत्पीड़न, पद के दुरुपयोग और कदाचार से जुड़े आरोप भी शामिल हैं। मेडिकल सर्टिफिकेट, ज्वाइनिंग और सेवा संबंधी संवेदनशील सूचनाओं तक पहुंच तथा उनके संबंध में संवाद करने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

पूछा गया है कि विभागाध्यक्ष के रूप में उन्होंने नवनियुक्त शिक्षकों से सीधे संवाद क्यों किया और क्या उन्हें ऐसा करने का अधिकार था। वहीं, डॉ. दीपक शर्मा ने आरोपों को लेकर कहा कि उन्होंने भर्ती में अनियमितता का शुरुआत से विरोध किया है और फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी के सामने अपना बयान भी दिया है। नोटिस के जरिए उन पर बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा है।

कुलसचिव के अवकाश पर परीक्षा नियंत्रक को जिम्मेदारी

इस बीच कुलसचिव वरुण कुमार पांडेय के मेडिकल अवकाश पर जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके दायित्वों की वैकल्पिक व्यवस्था की है। कुलपति ने उन्हें हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं करने, छात्रावास वार्डन का कार्यभार नहीं संभालने, पेन ड्राइव चोरी की जांच में कथित लापरवाही और नियुक्ति प्रक्रिया में असहयोग समेत छह बिंदुओं पर नोटिस जारी किया था। अब उनके अवकाश पर होने के कारण परीक्षा नियंत्रक को तत्काल प्रभाव से कुलसचिव के दायित्वों का निर्वहन करने की जिम्मेदारी दी गई है।

सीएम को भेजा पत्र

उधर, कुलपति प्रो. डॉ. उषा टंडन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर कुलसचिव के कार्य-व्यवहार, विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में कथित हस्तक्षेप तथा डा. दीपक शर्मा से जुड़े विभिन्न मामलों में मार्गदर्शन और आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है। कुलपति ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। कुलसचिव वरुण पांडेय का कहना है कि वह फिलहाल मेडिकल अवकाश पर हैं और लौटने के बाद ही पत्र का जवाब देंगे।

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