विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

UP की महिला शिक्षकों को तो जिउतिया व्रत का विशेष अवकाश, अनदेखी पर रसोइयों में टीस; व्रत रख मध्याह्न भोजन बनाना पड़ा

By Amlendu Tripathi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 03 Oct 2026 07:30 PM (IST)

उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में जिउतिया व्रत के दिन महिला रसोइयों को व्रत रखते हुए भी मध्याह्न भोजन बनाना ...और पढ़ें

UP के परिषदीय विद्यालयों में जिउतिया व्रती भी रसोइयों ने मध्याह्न भोजन बनाया। प्रतीकात्मक फोटो

UP के परिषदीय विद्यालयों में जिउतिया व्रती भी रसोइयों ने मध्याह्न भोजन बनाया। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. रसोइयों ने कहा- हमारे साथ भी संवेदनशीलता अपनाई जाए

  2. सवाल किया कि क्या हमें यह सुविधा नहीं मिलनी चाहिए

जाागरण संवाददाता, प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था में महिला रसोइयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हालांकि कई बार उन्हें नियमों की अनदेखी का शिकार होना पड़ता है। शनिवार को जिउतिया व्रत के लिए महिला शिक्षिकाओं और छात्राओं को विशेष अवकाश दिया गया। वहीं महिला रसोइयां को व्रत रहते हुए भी स्कूल की जिम्मेदारी उठानी पड़ी।

यह स्थिति महिला रसोइयों के मन में प्रश्न खड़ा करती है कि क्या महिला होने का सम्मान और उससे जुड़ी सुविधाएं कुछ पदों तक सीमित हैं? रसोइयां अल्प मानदेय में विद्यालय के बच्चों के लिए भोजन तैयार करने, रसोई की व्यवस्था संभालने और स्वच्छता का ध्यान रखने जैसे कार्य करती हैं। उनके श्रम से बच्चों को प्रतिदिन भोजन मिलता है, इसके बाद भी उनके अधिकारों को लेकर अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं है।

उच्च प्राथमिक विद्यालय बसमहुआ बहरिया की रसोइया रंजना शर्मा कहती हैं कि हम भी महिला हैं, हमारे भी परिवार, धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत परिस्थितियां हैं। व्रत में स्कूल आती हैं और भोजन तैयार करने के दायित्व का निर्वहन करती हैं, क्योंकि हमें भी बच्चों के भोजन की चिंता रहती है। जिउतिया व्रत के बावजूद मिड डे मील बनाया। सवाल किया कि क्या हमें यह सुविधा नहीं मिलनी चाहिए। सरकार से किसी विशेष कृपा की मांग नहीं है लेकिन परिस्थितियों को समझने और सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा है।

प्राथमिक विद्यालय पैगम्बरपुर, बहरिया की रसोइया गुलरही कहती हैं कि स्कूल के बच्चों के लिए भोजन बनाना सिर्फ नौकरी नहीं है बल्कि जिम्मेदारी है लेकिन जब हम व्रत में हों या विशेष किसी परिस्थिति में होते हैं तब भी स्कूल आना पड़ता है। जब दूसरी महिला कर्मचारियों को विशेष अवकाश मिलता है तो हमें क्यों अलग रखा जाता है, जबकि हम अपेक्षाकृत कम मानदेय में दायित्व निर्वहन करते हैं। कुछ तो मानवीय व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए।

यह भी पढ़ें- UP LT Grade शिक्षकों का इंतजार जल्द खत्म होगा, मिलेगा प्रमोशन; राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के 3900 अध्यापकों को लाभ

यह भी पढ़ें- UP के उच्चीकृत स्कूलों को शिक्षकों के लिए अभी करना होगा इंतजार, शिक्षक-प्रधानाध्यापक रिक्त पदों पर भर्ती की तैयारी