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सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष और महामंत्री का पंजीकरण लाइसेंस निलंबित, बार कौंसिल ऑफ UP ने की कार्रवाई

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 26 Sep 2026 08:15 PM (IST)

बार कौंसिल ऑफ यूपी ने बड़ी कार्रवाई की। सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल और महामंत्री अवनीश दीक्षित का पंजीकरण लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है।

सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष, महामंत्री का लाइसेंस बार कौंसिल ऑफ UP ने अगले आदेश तक निलंबित किया।

सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष, महामंत्री का लाइसेंस बार कौंसिल ऑफ UP ने अगले आदेश तक निलंबित किया।

HighLights

  1. अगली आदेश तक दोनों पदाधिकारियों का पंजीकरण लाइसेंस निलंबित रहेगा

  2. अनुशासन समिति का निर्णय, किसी कोर्ट में दोनों जन वकालत नहीं कर सकेंगे

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। बार कौंसिल ऑफ यूपी ने सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल और महामंत्री अवनीश दीक्षित का पंजीकरण लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। इससे दोनों किसी भी न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में उपस्थित नहीं हो सकेंगे। यह आदेश अनुशासन समिति ने शनिवार 26 सितंबर को सुनवाई के बाद पारित किया।

अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को

समिति ने अगली सुनवाई 11 अक्टूबर 2026 तय की है और तब तक दोनों का लाइसेंस निलंबित रहेगा। कौंसिल के सचिव आरके शुक्ला की प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई। कौंसिल की 23 अगस्त 2026 को हुई सामान्य बैठक में प्रस्ताव पारित कर परमानन्द श्रीवास्तव को सेंट्रल बार एसोसिएशन एल्डर्स कमेटी का चेयरमैन घोषित करते हुए एक महीने में चुनाव कराने का निर्देश दिया गया था। इसके लिए बार कौंसिल के पांच सदस्य पर्यवेक्षक बनाए गए थे।

दोनों पदाधिकारियों पर क्यों की गई कार्रवाई? 

आरोप है कि सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष/मंत्री ने इस प्रस्ताव को सदन में रखकर अवैधानिक तरीके से खारिज कर दिया। इस पर बार कौंसिल ने आठ सितंबर 2026 को वर्चुअल आपात बैठक में अखिलेश जायसवाल और अवनीश दीक्षित को निलंबित कर कारण बताओ नोटिस जारी किया और प्रकरण अनुशासन समिति को अग्रसारित कर दिया। इसके खिलाफ दोनों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआइ) में आवेदन किया।

बीसीआई ने क्या आदेश दिया?

बीसीआई ने 10 सितंबर 2026 को आदेश दिया कि पहले सुनवाई का समुचित मौका दिए बिना कोई अग्रिम कार्रवाई न की जाए। बार कौंसिल ऑफ यूपी के पूर्व आदेश को स्थगित कर दिया। बीसीआइ के आदेश के क्रम में 11 सितंबर 2026 को बार कौंसिल की आपात बैठक हुई और प्रकरण दोबारा मधुसूदन त्रिपाठी तथा अंकज मिश्र की अनुशासन समिति को अग्रसारित किया गया।

समिति ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं

अनुशासन समिति के समक्ष शनिवार को दोनों अधिवक्ता अपने अधिवक्ता अनीश कुमार सिंह के साथ उपस्थित हुए, वकालतनामा दाखिल कर शिकायत की प्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। समिति ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं क्योंकि उन्होंने बार कौंसिल के प्रस्ताव और आदेश को खारिज कर उसे दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित कराया।

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