UP के नए वकीलों के लिए बड़ी खबर, अब डिग्री लेकर नहीं कर सकेंगे सीधे प्रैक्टिस; अनिवार्यता बदली
उत्तर प्रदेश में नए अधिवक्ताओं के लिए 6 महीने की इंटर्नशिप अनिवार्य कर दी गई है, जो 1 नवंबर 2026 ...और पढ़ें

यूपी में वकालत के लिए नया नियम: बार कौंसिल ऑफ उप्र ने नए अधिवक्ताओं के लिए 6 महीने की इंटर्नशिप अनिवार्य की।
HighLights
सीओपी के लिए 10 साल की प्रैक्टिस कर चुके वरिष्ठ अधिवक्ता का प्रमाणपत्र जरूरी
नए अधिवक्ताओं के लिए छह माह की इंटर्नशिप अनिवार्य, नियम 1 नवंबर 2026 से लागू
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। प्रदेश में अब वकालत की डिग्री लेकर सीधे प्रैक्टिस शुरू नहीं कर सकेंगे। बार काउंसिल ऑफ उप्र ने नए अधिवक्ताओं के लिए छह माह की इंटर्नशिप अनिवार्य कर दी है। यह नियम पहली नवंबर 2026 से लागू होगा। काउंसिल की 10 अक्टूबर को हुई सामान्य बैठक में पारित प्रस्ताव की जानकारी मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में सचिव आरके शुक्ल ने दी।
वरिष्ठ अधिवक्ता की प्रैक्टिस 10 साल से कम न हो
बार कौंसिल ऑफ उप्र के सचिव के अनुसार पंजीकरण तिथि के बाद अभ्यर्थी को सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (सीओपी) के लिए आवेदन से पहले छह माह तक किसी वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ लॉ ट्रेनी के तौर पर काम करना होगा। वरिष्ठ अधिवक्ता की प्रैक्टिस भी कम से कम 10 साल की होनी चाहिए और उनके पास खुद का सीओपी जरूरी है।
काउंसिल सदस्य से सत्यापित कराना होगा
ट्रेनिंग पूरी होने पर वरिष्ठ अधिवक्ता अपने लेटर हेड पर प्रमाण पत्र देंगे। इस प्रमाण पत्र को काउंसिल के किसी सदस्य से सत्यापित कराना होगा और सीओपी आवेदन के समय पोर्टल पर अपलोड करना होगा। बिना इस प्रमाण पत्र के सीओपी जारी नहीं किया जाएगा।
प्रमाण पत्रों के दुरुपयोग रोकने को भी सख्ती
बार कउंसिल ऑफ उप्र ने प्रमाण पत्रों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी सख्ती की है। एक वरिष्ठ अधिवक्ता एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम दो ट्रेनी अभ्यर्थियों को ही प्रमाण पत्र दे सकेंगे। इससे अधिक प्रमाण पत्र देने पर संबंधित अधिवक्ता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
किन पर यह नियम नहीं लागू होगा?
बार काउंसिल ऑफ उप्र ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था बार काउंसिल ऑफ इंडिया से अनुमोदन की प्रत्याशा में लागू की गई है। पहली नवंबर 2026 से पहले सीओपी के लिए आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों पर यह नियम लागू नहीं होगा।
