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इंजन में 15 साल तक कभी बंद नहीं होगा ‘कवच’, खराबी आई तो 72 घंटे में ठीक करेगी कंपनी

By Amarish Kumar Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 27 Sep 2026 05:27 PM (IST)

रेलवे ने 'कवच' प्रणाली के लिए कंपनियों की 15 साल की सीधी जवाबदेही तय की है, जिसमें 4 साल की ...और पढ़ें

सूबेदारगंज स्टेशन से संगम एक्सप्रेस के माध्यम से 190 रूट किमी लंबे प्रयागराज–कानपुर खंड पर ‘कवच’ स्वचालित ट्रेन सुरक्षा। सौ. रेलवे

सूबेदारगंज स्टेशन से संगम एक्सप्रेस के माध्यम से 190 रूट किमी लंबे प्रयागराज–कानपुर खंड पर ‘कवच’ स्वचालित ट्रेन सुरक्षा। सौ. रेलवे

HighLights

  1. ट्रेन हादसों पर लगेगी लगाम, रेलवे बोर्ड ने तय की कंपनियों की सीधी जवाबदेही होगी

  2. 4 साल की वारंटी व 11 साल का मेंटेनेंस अनिवार्य, देश के 68 शेडों में बनेंगे टेस्ट ट्रैक

अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और ट्रेनों की आमने-सामने की भिड़ंत रोकने के लिए रेल इंजनों (लोकोमोटिव) में लगने वाली अत्याधुनिक स्वदेशी टक्कर रोधी प्रणाली ‘कवच’ (वर्जन 4.0) अब किसी भी तकनीकी खराबी के चलते बंद नहीं रहेगी। रेलवे बोर्ड ने उपकरण लगाने वाली कंपनियों को केवल निर्माण या फिटिंग तक सीमित न रखकर अगले 15 वर्षों तक इसके 24 घंटे सुचारू संचालन और रखरखाव के लिए सीधे तौर पर जवाबदेह बना दिया है।

पहले अधिकतम दो साल की सीमित वारंटी मिलती थी, इसके बाद रखरखाव की जिम्मेदारी रेलवे शेडों या नए अनुबंधों पर होती थी। इससे कलपुर्जों (स्पेयर पार्ट्स) की कमी और समन्वय के अभाव में उपकरण की तकनीकी खराबी दूर करने में लंबा समय लगता था।

अब रेलवे ने 'एंड-टू-एंड' जवाबदेही तय कर दी है। कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र मिलने की तारीख से चार साल तक पूरी तरह निश्शुल्क वारंटी (डिफेक्ट लायबिलिटी) रहेगी। इसके बाद अगले 11 वर्षों तक संबंधित जोनल रेलवे उसी कंपनी से व्यापक वार्षिक रखरखाव अनुबंध निष्पादित कराएगा। यानी इंजन पर सिस्टम लगने के बाद कुल 15 साल तक कंपनी ही उसकी कार्यप्रणाली की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी।

यदि इंजन पर लगे कवच उपकरण में कोई भी तकनीकी खराबी आती है, तो कंपनी हर हाल में उसे 72 घंटे के भीतर ठीक करेगी। इसके लिए लोको शेडों और ट्रिप शेडों पर कंपनियों को प्रशिक्षित कर्मचारियों वाली 'प्राम्प्ट रिस्पांस टीम' और पर्याप्त स्पेयर पार्ट्स हमेशा तैनात रखने होंगे। तय समय में सुधार न करने पर रेलवे अपने स्तर पर काम कराकर लागत के साथ 20 प्रतिशत अतिरिक्त हर्जाना कंपनी के बिल से वसूलेगी।

रेलवे बोर्ड के निदेशक विद्युत अभियांत्रिकी (चल स्टाक) विकास आनंद के अनुसार, उत्तर मध्य रेलवे समेत सभी जोन को निर्देश जारी कर दिया है। पूरे फ्लीट का कम से कम 98.5 प्रतिशत और प्रत्येक इंजन का न्यूनतम 95 प्रतिशत समय कवच चालू रहना अनिवार्य है, ऐसा न होने पर कंपनी पर भारी जुर्माना लगेगा।

इसके साथ ही 36 माह में यदि 20 प्रतिशत से अधिक इंजनों में एक जैसी खराबी सामने आती है, तो उसे 'एपिडेमिक डिफेक्ट' माना जाएगा और कंपनी को पूरे बेड़े के उपकरण अपने खर्च पर मुफ्त बदलने होंगे। कंपनी देश भर के 68 लोको शेडों व उत्पादन इकाइयों में कवच परीक्षण के लिए 'टेस्ट ट्रैक' भी अपने खर्च पर बनाएगी और 15 साल तक मेंटेन रखेगी। आरडीएसओ के साफ्टवेयर अपग्रेड का खर्च भी कंपनी ही उठाएगी। इस व्यवस्था से मानवीय भूल या रेड सिग्नल पार होने की स्थिति में भी कवच खुद ब्रेक लगाकर हादसे पूरी तरह रोक देगा।

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