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TGT-PGT Bharti : पुरानी नियमावली की मांग पर छात्रों का प्रदर्शन तेज, शिक्षा निदेशालय घेरा, एक गुट लखनऊ पहुंचl

By Amlendu Tripathi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Mon, 21 Sep 2026 05:50 PM (IST)

प्रयागराज में प्रतियोगी छात्रों ने टीजीटी-पीजीटी भर्ती पुरानी नियमावली से कराने की मांग को लेकर शिक्षा निदेशालय का घेराव किया। एक गुट लखनऊ भी पहुंचा है।

टीजीटी-पीजीटी भर्ती:में पुरानी नियमावली की मांग को लेकर प्रयागराज में प्रदर्शन करते प्रतियोगी छात्र। जागरण

टीजीटी-पीजीटी भर्ती:में पुरानी नियमावली की मांग को लेकर प्रयागराज में प्रदर्शन करते प्रतियोगी छात्र। जागरण

HighLights

  1. आंदोलन के एक साथी की मौत के बाद छात्रों में आक्रोश, मांगें और तेज

  2. प्रयागराज के सिविल लाइंस में धरनास्थल पर सभा कर दिखाई एकजुटता

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। TGT-PGT Bharti टीजीटी और पीजीटी की भर्ती पुरानी नियमावली से कराने की मांग कर रहे प्रतियोगी छात्र गम और गुस्से में हैं। आंदोलन के एक साथी की मौत के बाद एकल विषय स्नातक अभ्यर्थियों ने सीसीएसएस स्नातक डिग्री को संबद्ध विषय के रूप मे शामिल किए जाने की मांग को लेकर लखनऊ पहुंच गए।

समर्थन देने शिक्षक एमएलसी मान सिंह भी पहुंचे

दूसरे गुट ने शिक्षा निदेशालय का घेराव शुरू कर दिया है। आंदोलित छात्रों ने पहले पत्थर गिराघर के पास सभा की। उन्हें समर्थन देने के लिए शिक्षक एमएलसी मान सिंह पहुंचे। उन्होंने भरोसा दिया कि वे प्रतियोगियों की आवाज को सपा मुखिया अखिलेश यादव तक पहुंचाएंगे। उसके बाद सभी प्रतियोगी शिक्षा निदेशालय पहुंच गए। उनके साथ वे चार आंदोलनकारी भी हैं, जो लगातार 16 दिन से क्रमिक अंशन पर हैं।

बोले- पुरानी नियमावली से भर्ती हो

टीजीटी और पीजीटी की भर्ती पुरानी नियमावली से कराने की मांग कर रहे प्रतियोगी छात्र गम और गुस्से में हैं। आंदोलन के साथी रहे विजय बहादुर की मौत के बाद रविवार को पत्थर गिरजाघर के पास धरनास्थल पर सभी ने मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी और आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया। इस पूरे प्रकरण की जानकारी देने के लिए युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह ने भी राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। उधर एकल विषय स्नातक अभ्यर्थियों ने सीसीएसएस स्नातक डिग्री को संबद्ध विषय के रूप मे शामिल किए जाने की मांग को लेकर लखनऊ चलने का आह्वान किया। 

मांगों को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे?

TGT-PGT Bharti 15 दिन से चल रहा प्रतियोगियों का आंदोलन सोमवार को भी जारी रहा। छात्रों ने कहा, प्रशासन स्पष्ट जवाब दे। मांगों को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं। प्रतियोगियों ने सवाल उठाया कि क्या इसी तरह छात्र अपनी जिंदगी और भविष्य की लड़ाई लड़ते हुए दम तोड़ते रहेंगे। आशुतोष पांडेय ने कहा, सरकार और प्रशासन को यह समझना होगा कि एक अवसर की मांग छात्रों के भविष्य से जुड़ी है। क्या छात्रों को पुरानी नियमावली के अनुसार एक अवसर देना उनकी जिंदगी से भी बड़ा मुद्दा हो गया है?

राष्ट्रपति को लिखा पत्र  

युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर 16 सितंबर 2025 को नियमावली में किए गए बदलाव की जानकारी दी है। कहा है कि भर्ती की पात्रता एवं परीक्षा के प्रारूप में परिवर्तन से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के सामने सवाल खड़े हुए हैं। नई व्यवस्था में प्रवक्ता पद के लिए बीएड सहित विभिन्न पात्रता शर्तों में बदलाव से ऐसे अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं, जिन्हें पूर्व व्यवस्था में अवसर मिलता रहा है। कहा कि हिंदी, प्राविधिक कला, संगीत, शारीरिक शिक्षा, गृह विज्ञान और अंग्रेजी सहित विभिन्न विषयों में पात्रता संबंधी बदलावों पर अभ्यर्थियों के बीच असमंजस है। हिंदी विषय में इंटरमीडिएट स्तर पर संस्कृत की अनिवार्यता को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। 

नई नियमावली से पात्रता का संकट

प्रतियोगी छात्रों का नेतृत्व कर रहे पंकज पांडेय का कहना है कि प्रदेश में टीजीटी पीजीटी शिक्षक भर्ती की नई नियमावली लागू होने से लगभग सात लाख अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं। वे पुरानी नियमावली के आधार पर तैयारी कर रहे। अब नई शैक्षिक अर्हताओं के कारण पात्रता का संकट खड़ा हो गया है। विजय बहादुर की उम्र भी करीब 50 वर्ष थी। लंबे समय से तैयारी कर रहे थे। अचानक जब अर्हता में बदलाव किया गया तो वे भी तनाव में आ गए। 

प्रमुख विषयों में नियमों का परिवर्तन

नई व्यवस्था में पीजीटी के अनेक विषयों में संबंधित विषय की स्नातकोत्तर डिग्री के साथ बीएड अनिवार्य किया गया है। इससे वे अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं जिन्होंने पुरानी नियमावली के अनुसार परास्नातक की योग्यता प्राप्त की थी, लेकिन बीएड नहीं हैं। हिंदी विषय की पात्रता में संस्कृत को अतिरिक्त शैक्षिक अर्हता के रूप में जोड़ा गया है। इससे ऐसे अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं जो पुरानी नियमावली के अनुसार पात्र थे, लेकिन नई संस्कृत संबंधी शर्त पूरी नहीं करते। पुरानी व्यवस्था में प्राविधिक कला से संबंधित योग्यता के आधार पर अवसर प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के लिए नई व्यवस्था में पात्रता का स्वरूप बदल गया है।

इन विषयों के भी अभ्यर्थी हो रहे प्रभावित

TGT-PGT Bharti बड़ी संख्या में कला और प्राविधिक कला के अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। संगीत विषय में भी शैक्षिक एवं प्रशिक्षण संबंधी अर्हताओं में परिवर्तन हुआ है। शारीरिक शिक्षा के अभ्यर्थी भी प्रभावित हुए हैं। पुरानी व्यवस्था में उपलब्ध विभिन्न प्रशिक्षण योग्यताओं की तुलना में नई व्यवस्था में अधिक विशिष्ट शैक्षिक योग्यता निर्धारित की गई है। गृह विज्ञान में विषय-विशेष योग्यता तथा बीएड जैसी शर्तों को अधिक स्पष्ट किया गया है। कई विषयों में अब संबंधित विषय में निर्धारित स्नातकोत्तर योग्यता और विषय-संयोजन को अधिक महत्व दिया गया है।

टीईटी को लेकर सवाल

प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि टीईटी को शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया में शामिल करने से लगभग दो लाख अतिरिक्त अभ्यर्थियों के प्रभावित होने की आशंका है। टीईटी को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने से पहले इसके प्रभाव का अध्ययन किया जाना चाहिए। टीईटी अभ्यर्थियों के हितों को सुरक्षित रखते हुए पारदर्शी व्यवस्था की मांग है। डीएलएड/प्राथमिक शिक्षक भर्ती में ग्रामीण क्षेत्र के उपलब्ध पदों को भी इसी भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने की भी आवाज उठ रही है। प्रतियोगियों का कहना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्र के सभी उपलब्ध पदों को एक साथ जोड़ा जाता, तो बड़ी संख्या में प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को रोजगार का अवसर मिलता और ग्रामीण विद्यालयों में शिक्षकों की कमी भी दूर करने में मदद मिलती। सरकार और शिक्षा सेवा चयन आयोग को चाहिए की पुरानी एवं नई नियमावली के बीच विषयवार अंतर की समीक्षा करें।

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