UP शासन तक पहुंचा प्रयागराज में 472 बीघा वन भूमि के गायब होने का प्रकरण, DM को कार्रवाई के निर्देश
प्रयागराज के कोरांव स्थित बेलहट में 472 बीघा वन भूमि के रिकॉर्ड से गायब होने का मामला अब यूपी शासन ...और पढ़ें

प्रयागराज में वन भूमि घोटाले का मामला शासन तक पहुंच गया है। जागरण आर्काइव
HighLights
डेढ़ साल से लंबित है प्रकरण, राजस्व परिषद आयुक्त ने मामले को लिया संज्ञान
कोरांव के बेलहट में वन भूमि में हेराफेरी, तहसील के जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। यमुनापार में कोरांव के बेलहट में 468 बीघे वन भूमि के गायब होने के प्रकरण की फाइल तहसील के अफसरों ने दबा दी। अब यह प्रकरण शासन स्तर तक पहुंच गया है। राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव ने इसे संज्ञान लिया है। डीएम को तत्काल इसका निस्तारण कराने के निर्देश दिए।
किसके खाते में कर दी गई वन भूमि?
बेलहट गांव में वन विभाग की करीब 2044 बीघे वन भूमि हैं। कई दशक पहले इस गांव में चकबंदी हुई थी। इस चकबंदी के पहले तक यह जमीन वन विभाग के नाम चढ़ी हुई थी। चकबंदी के बाद करीब 472 बीघे जमीन से वन विभाग का नाम ही गायब हो गया। यह जमीन किसके खाते में चली गई इसका कोई हिसाब-किताब ही नहीं है।
पुरानी फाइल खोली तो खुली पोल
पूर्व में यहां तैनात रहे वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी कभी इस तरफ ध्यान नहीं दिया। करीब डेढ़ साल पहले जब वन विभाग की जमीनों वाली पुरानी फाइलें पलटी गईं तो मामले की पोल खुली। इसके बाद खोजबीन शुरू हुई।
तहसील के अधिकारी मामले को दबाए बैठे रहे
कोरांव तहसील के अफसरों से भी पत्राचार हुआ। एक के बाद एक कई अनुस्मारक भेजे गए। फिर भी तहसील के अधिकारी मामले को दबाए बैठे रहे। वन विभाग ने डीएम को जानकारी दी। कई बार डीएम ने भी तहसील प्रशासन को जल्द से जल्द भूमि वन विभाग के नाम चढ़ाने के निर्देश दिए। यह भी बेअसर रहे। फाइल प्रकरण जहां का तहां अटका रहा।
डीएफओ ने उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया मामला
इसके बाद डीएफओ अरविंद कुमार यादव ने मामले को राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश के उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया। अब राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव सूरज कुमार यादव ने डीएम को मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
