प्रयागराज में टीजीटी-पीजीटी छात्रों के आंदोलन के बीच एक छात्र की मौत, साथियों में गहरा आक्रोश
प्रयागराज में टीजीटी-पीजीटी छात्रों के 16 दिवसीय आंदोलन के दौरान एक छात्र विजय बहादुर की मौत हो गई, जिससे साथियों ...और पढ़ें

टीजीटी-पीजीटी छात्रों के आंदोलन प्रयागराज में जारी है, इस बीच एक छात्र की मौत हो गई। जागरण आर्काठव की फोटो
HighLights
पुरानी नियमावली के अनुसार अवसर देने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्र
युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह ने राष्ट्रपति को मांगों से संबंधित लिखी चिट्ठी
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। टीजीटी-पीजीटी पुरानी नियमावली के अनुसार अवसर देने की मांग रहे प्रतियोगियों का धरना पत्थर गिरजाघर पर रविवार को भी जारी रहा। आंदोलन 16वें दिन रविवार को भी जारी रहा। वहीं शनिवार रात आंदोलन से जुड़े एक छात्र की मौत हो गई। इससे छात्रों में आक्रोश है।
आंदोलन का हिस्सा रहे प्रतियोगी छात्र जौनपुर निवासी विजय बहादुर की शनिवार रात मौत हो गई। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका इलाज डॉ. कार्तिकेय के यहां चल रहा था। इस घटना से आंदोलनरत छात्रों में नाराजगी और दुख है। सभी ने शोकसभा कर श्रद्धांजलि दी।
प्रतियोगियों ने सवाल उठाया कि क्या इसी तरह छात्र अपनी जिंदगी और भविष्य की लड़ाई लड़ते हुए दम तोड़ते रहेंगे। आशुतोष पांडेय ने कहा, सरकार और प्रशासन को यह समझना होगा कि एक अवसर की मांग छात्रों के भविष्य से जुड़ी है। क्या छात्रों को पुरानी नियमावली के अनुसार एक अवसर देना उनकी जिंदगी से भी बड़ा मुद्दा हो गया है?
उधर, पुरानी नियमावली को लेकर युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। कहा है कि 16 सितंबर 2025 को नियमावली में किए गए बदलाव के बाद भर्ती की पात्रता एवं परीक्षा के प्रारूप में परिवर्तनों को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के सामने सवाल खड़े हुए हैं। अभ्यर्थियों को पुरानी नियमावली के आधार पर अवसर दिया जाए। नई व्यवस्था में प्रवक्ता पद के लिए बीएड सहित विभिन्न पात्रता शर्तों में बदलाव से ऐसे अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं, जिन्हें पूर्व व्यवस्था में अवसर मिलता रहा है।
सहायक अध्यापक पदों की विषयवार अर्हताओं में किए गए बदलावों का भी उल्लेख किया है। कहा कि हिंदी, प्राविधिक कला, संगीत, शारीरिक शिक्षा, गृह विज्ञान और अंग्रेजी सहित विभिन्न विषयों में पात्रता संबंधी बदलावों पर अभ्यर्थियों के बीच असमंजस है। हिंदी विषय में इंटरमीडिएट स्तर पर संस्कृत की अनिवार्यता को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।
जौनपुर के सुजानगंज निवासी विजय कुमार की मृत्यु का भी उल्लेख करते हुए कहा, वह 2016 से अंग्रेजी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे थे। परीक्षा संबंधी मानसिक दबाव के बीच उनकी तबीयत बिगड़ी और मृत्यु हो गई।
