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परीक्षा में नव साक्षरों से पूछा- क्या कूड़ा इकट्ठा करना सरकार का दायित्व है? महिला शरणालय-कारागार में भी जुटे परीक्षार्थी

By Amlendu Tripathi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 20 Sep 2026 07:37 PM (IST)

प्रयागराज में नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत मूलभूत साक्षरता व संख्यात्मकता मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें 5,237 नव ...और पढ़ें

नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत प्रयागराज में आयोजित परीक्षा में शामिल महिलाएं। सौ. विभाग

नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत प्रयागराज में आयोजित परीक्षा में शामिल महिलाएं। सौ. विभाग

HighLights

  1. 689 केंद्रों पर हुई मूलभूत साक्षरता व संख्यात्मकता मूल्यांकन परीक्षा

  2. जनपद के 5,237 अभ्यर्थी हुए शामिल, सभी 15 वर्ष से अधिक आयु के

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। उल्लास ‘नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत मूलभूत साक्षरता व संख्यात्मकता मूल्यांकन परीक्षा रविवार को हुई। सभी विकासखंडों में कुल 689 केंद्र बनाए गए। महिला शरणालय और कारागार में भी यह परीक्षा कराई गई।

परीक्षा का उद्देश्य क्या था?

जनपद के 5,237 (15 वर्ष से अधिक आयु) लोग शामिल हुए। इसका उद्देश्य असाक्षरों में विकसित मूलभूत साक्षरता व संख्यात्मकता संबंधी दक्षता का आकलन करते हुए साक्षरता की मुख्यधारा से जोड़ना रहा। परीक्षार्थियों को कुल 21 प्रश्नों के उत्तर तीन घंटे में देने थे। इनमें पढ़ने लिखने और गणित की क्षमता को जांच गया। प्रत्येक खंड 50 अंक का रहा। अंकित चित्र के साथ उनके नाम लिखे गए थे, उनका मिलान करने के साथ दो आधे वाक्य को जोड़ते हुए एक सही वाक्य बनाने के लिए कहा गया।

ये रोचक प्रश्न भी पूछे गए 

पूछा गया कि टंकियों और कूलर को नियमित रूप से साफ करना चाहिए या नहीं। मलेरिया और डेंगू से फैलने वाली बीमारी क्या है? मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए या नहीं? सरकार कचरे का निपटारा करने के बारे में चिंतित है या नहीं, सूखे और गीले कूड़े को अलग रखना चाहिए या नहीं। यह भी पूछा गया कि क्या कूड़ा इकट्ठा करना सरकार का दायित्व है? लेखन क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए रिक्त स्थान भरना, दिए गए शब्द का प्रयोग कर वाक्य बनाने जैसे प्रश्न शामिल रहे।

बीएसए ने भी परीक्षा व्यवस्था का जायजा लिया

गणित खंड में जोड़ने, घटाने आदि की व्यावहारिक क्षमता परखी गई। परीक्षा को पारदर्शी तरीके से कराने के लिए सभी विकासखंड में बीईओ नोडल अधिकारी नामित किये गए थे। पर्यवेक्षण में परीक्षा केंद्रों पर एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन) को लगाया गया। बीएसए ने भी परीक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। गंगापार व यमुनापार क्षेत्र में परीक्षा के प्रभावी अनुश्रवण एवं समन्वय के लिए अलग अलग नोडल सक्रिय रहे।

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