डिवाइस रोकेगी ऑनलाइन फिजूलखर्ची, चेहरे के भाव पढ़ेगी; फिर तय करेगी कि आपको पैसा खर्च करना चाहिए या नहीं
प्रयागराज के भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) इलाहाबाद, असम विश्वविद्यालय और AMU के शोधकर्ताओं ने एक अनोखी डिवाइस बनाई है। ...और पढ़ें

फालतू खर्च रोकने वाली डिवाइस तैयार करने वाले विज्ञानी डाॅ. दिव्यज्योति भट्टाचार्य, काजोल, डाॅ. रंजीत सिंह और सुमैया गौहर। सौ. शोधकर्ता
HighLights
आइआइआइटी, असम विश्वविद्यालय और एएमयू के शोधकर्ताओं ने बनाया है डिवाइस, मिला पेटेंट
इस डिवाइस का नाम ‘स्मार्ट डिवाइस टू मानिटर द ई-वालेट यूटिलाइजेशन एंड द स्पेंडिंग बिहेवियर’
मृत्युंजय मिश्र, प्रयागराज। डिजिटल पेमेंट के दौर में जहां एक क्लिक में पैसा खर्च हो जाता है, वहीं अब आपकी “आवेग खरीदारी” पर लगाम लगाने के लिए एक अनोखी तकनीक सामने आई है। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइआइटी) इलाहाबाद, असम विश्वविद्यालय और एएमयू के शोधकर्ताओं को एक ऐसी स्मार्ट डिवाइस के लिए पेटेंट मिला है, जो आपके चेहरे के भाव पढ़कर तय करेगी कि आपको पैसा खर्च करना चाहिए या नहीं।
इन्होंने बनाया स्मार्ट डिवाइस
इस अनोखे आविष्कार का नाम ‘स्मार्ट डिवाइस टू मानिटर द ई-वालेट यूटिलाइजेशन एंड द स्पेंडिंग बिहेवियर’ रखा गया है। इसे आइआइआइटी के प्रो. रंजीत सिंह, शोध छात्रा काजोल, असम विश्वविद्यालय के दिव्य ज्योति भट्टाचार्य और एएमयू की सुमैया गौहर के दल ने मिलकर विकसित किया है। डाॅ. रंजीत सिंह कहते हैं कि यह काम्पैक्ट डिवाइस किसी भी मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर आसानी से क्लिप की जा सकती है। इसमें कैमरा, माइक्रोफोन, एक्सेलरोमीटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का संयोजन है।
डिवाइस की आपकी हर गतिविधि पर नजर
उन्होंने बताया कि जैसे ही आप फोन-पे, गूगल-पे, पेटीएम जैसे ऐप्स से भुगतान करते हैं, यह डिवाइस आपकी हर गतिविधि पर नजर रखती है। अगर ट्रांजेक्शन के दौरान आपके चेहरे पर हिचकिचाहट दिखे जैसे भौंहें सिकुड़ना या असहजता तो यह तुरंत अलर्ट देती है कि भाई, सोच लो! डिवाइस न केवल हर यूपीआइ ट्रांजेक्शन को ट्रैक करती है बल्कि महीने भर का खर्च विश्लेषण भी तैयार करती है। यदि खर्च तय सीमा से अधिक हो जाए तो चेतावनी देती है।
उपयुक्त ई-वालेट भी सुझाती है
इतना ही नहीं, यह यूजर की आदतों को समझकर सबसे उपयुक्त ई-वालेट भी सुझाती है। डिवाइस यूजर से यह भी पूछती है कि उसने कोई ऐप क्यों हटाया। यह फीडबैक (यूजर की अनुमति से) कंपनियों तक पहुंचाया जाता है, ताकि वे अपनी सेवाओं में सुधार कर सकें। प्रो. रंजीत सिंह कहते हैं कि आजकल लोग ई-वालेट से इतना खर्च कर देते हैं कि मां भी नहीं रोक पाती। हमने ऐसी डिवाइस बनाई है जो मां की तरह समझाती है।
सुरक्षा में भी फुलप्रूफ
इस डिवाइस में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। फिंगरप्रिंट और फेस रिकग्निशन लाक, रिमोट वाइप फीचर और पानी और झटकों से सुरक्षित बाडी के साथ एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन भी है। प्रो. सिंह बताते हैं कि भारत में हर महीने यूपीआइ ट्रांजेक्शन का आंकड़ा 20 लाख करोड़ रुपये से आगे निकल चुका है। ऐसे में आवेग में की गई खरीदारी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। यह डिवाइस न सिर्फ यूजर्स को खर्च पर नियंत्रण देगी बल्कि फिनटेक कंपनियों को भी वास्तविक उपभोक्ता व्यवहार समझने में मदद करेगी।
