Sharad Purnima 2026 : 16 कलाओं वाले चंद्रमा की किरणें देंगी आरोग्य, खुले आसमान के नीचे खीर रखने व खाने से 'अमृत' जैसा लाभ
शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की 16 कलाओं से निकलने वाली किरणें आरोग्य ...और पढ़ें

श्री स्वामी नरोत्तमानंद गिरि वेद विद्यालय प्रयागराज में शरद पूर्णिमा पर खीर खाते छात्र। जागरण आर्काइव
HighLights
मान्यता- रात में आसमान के नीचे दूध-चावल की खीर रखने से चंद्रमा की किरणों से अमृत टपकता है
प्रयागराज में झूंसी के श्री स्वामी नरोत्तमानन्द गिरि वेद विद्यालय में शास्त्रीय परंपरा की दी गई जानकारी
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। Sharad Purnima 2026 शरद पूर्णिमा कल रविवार 25 अक्टूबर को है। इसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। नारद पुराण के अनुसार इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और घरों में प्रवेश करती हैं। सफेद वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन शुभ होता है। कई साधक रात भर जागकर (कोजागरी) विधिपूर्वक पूजन करते हैं।
शरद पूर्णिमा को चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है, ऐसे में रात में खुले आसमान के नीचे दूध-चावल से बनी खीर रखने की परंपरा है। मान्यता है इससे खीर में चंद्रमा की किरणों से अमृत टपकता है और खीर औषधीय गुणों से युक्त हो जाती है। झूंसी स्थित श्री स्वामी नरोत्तमानन्द गिरि वेद विद्यालय में छात्रों को इस परंपरा और पर्व की जानकारी दी गई। चंद्रमा पूजन और खीर की परंपरा से भी जोड़ा गया। सभी ने 16 कलाओं वाले चंद्रमा की किरणों से आरोग्य और माता लक्ष्मी से समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।
आचार्य ब्रजमोहन पांडेय ने बताया कि केवल शरद पूर्णिमा के दिन ही चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। धार्मिक व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण ने इसी रात वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था, इसलिए इसे रास पूर्णिमा भी कहते हैं।
उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण ने गीता के पुरुषोत्तम योग के 15वें अध्याय के 13वें श्लोक में कहा है, गामाविश्य च भूतानि धारयाम्यहमोजसा। पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः৷৷” अर्थात मैं ही प्रत्येक लोक में प्रवेश करके अपनी शक्ति से सभी प्राणीयों को धारण करता हूं और मैं ही चंद्रमा के रूप से वनस्पतियों में जीवन रस बनकर समस्त प्राणीयों का पोषण करता हूं। सामवेद में भी इसे लेकर कई महत्वपूर्ण चीजें उल्लेखित हैं।
Sharad Purnima 2026 आचार्य अवनीश पांडेय ने कहा, ऋग्वेद प्रथम मंडल के सूक्त 91 में कहा गया है, "तवं न: सोम विश्वतो रक्षा राजन्नघायतः। न रिष्येत्वावतः सखा।।" अर्थात हे राजा सोमदेव आप जिसकी रक्षा करते हैं वह कभी नष्ट नहीं होता। आप दुष्टों से हर प्रकार से हमारी रक्षा करें। धार्मिक दृष्टि से शरद पूर्णिमा की रात पवित्र मानी जाती है। कनकधारा स्तोत्र के पाठ और ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करने से धन-धान्य में वृद्धि की मान्यता है।
