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तय समय पर पूरे होंगे रेल प्रोजेक्ट्स, ठेकेदारों पर 'सीधे काम' की शर्त लागू, यात्रियों को समय पर मिलेंगी हाई-टेक सुविधाएं

By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 17 Mar 2026 11:45 PM (IST)

रेलवे ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए ठेकेदारों पर सीधे काम करने की शर्त लागू की ...और पढ़ें

परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए ठेकेदारों पर रेलवे ने शिकंजा कसा है।

परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए ठेकेदारों पर रेलवे ने शिकंजा कसा है। 

HighLights

  1. रेलवे ने देरी पर अब कार्रवाई के लिए सरल किए नियम

  2. कम बोली लगा प्रोजेक्ट की गुणवत्ता से नहीं हो सकेगा समझौता

अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। रेलवे का प्रोजेक्ट शुरू होता है लेकिन तय समय पर पूरा नहीं होता, ठेकेदार बार-बार समय सीमा बढ़ाते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। रेलवे ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ाने और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं समय पर देने के लिए टेंडर नियम बदल दिए हैं। अब नई लाइनों, स्टेशनों के पुनर्विकास और सुरक्षा से जुड़े कामों में होने वाली देरी पर लगाम लगेगी।

ठेकेदारों को 60 प्रतिशत काम स्वयं करना होगा 

बड़े कामों से लेकर प्लेटफार्म सौंदर्यीकरण, फुटओवर ब्रिज व नई ट्रेनों के ट्रैक जैसे प्रोजेक्ट्स में भी अब मुख्य ठेकेदार को 60% काम स्वयं करना होगा, पहले 70 प्रतिशत काम यह दूसरे छोटे ठेकेदारों (उप-ठेका)से कराते थे। कम बोली लगाकर गुणवत्ता से समझौता करने वाले ठेकेदारों पर अतिरिक्त आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। रेलवे अब हर महीने काम की मानिटरिंग करेगा।

ठेका रद करने की आसान प्रक्रिया  

देरी होने पर ठेका रद करने की प्रक्रिया आसान कर दी गई है, जिससे अटके हुए प्रोजेक्ट्स के कारण यात्रियों को होने वाली असुविधा खत्म होगी। रेलवे ने अपने इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) नियमों को सख्त करते हुए 'मिडलमैन कल्चर' को खत्म करने का फैसला किया है। अक्सर देखा जाता है कि बड़ी कंपनियां टेंडर हासिल करने के बाद काम को छोटे और कम अनुभवी उप-ठेकेदारों के भरोसे छोड़ देती थीं, जिससे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और समय-सीमा दोनों प्रभावित होती थीं।

कंपनियां केवल कागजों पर टेंडर लेती थीं

अब रेलवे ने नियम बना दिया है कि मुख्य ठेकेदार कुल प्रोजेक्ट वैल्यू का अधिकतम 40% ही उप-ठेका दे सकेगा। यानी 60% काम मुख्य कंपनी को अपने स्वयं के संसाधनों और कर्मियों के जरिए पूरा करना होगा। पहले यह सीमा 70% तक थी, जिसका फायदा उठाकर कंपनियां केवल कागजों पर टेंडर लेती थीं।

प्रोजेक्ट की गुणवत्ता से समझौता करने वालों पर नकेल

कम बोली लगाकर प्रोजेक्ट की गुणवत्ता से समझौता करने वाले ठेकेदारों पर भी नकेल कसी गई है। यदि कोई बिडर अनुमानित लागत से 5% से अधिक नीचे की बोली लगाता है, तो उसे 5% अतिरिक्त परफार्मेंस गारंटी जमा करनी होगी। साथ ही, बिड सिक्योरिटी को 0.5% से बढ़ाकर 2% कर दिया गया है। इससे केवल वही कंपनियां मैदान में टिक पाएंगी जो आर्थिक और तकनीकी रूप से सक्षम हैं।

यात्रियों को क्या होगा फायदा? 

- प्लेटफार्म सौंदर्यीकरण, एफओबी और नए ट्रैक जैसे प्रोजेक्ट्स अब डेडलाइन पर पूरे होंगे।-मुख्य कंपनी की सीधी जवाबदेही होने से निर्माण कार्य की क्वालिटी विश्वस्तरीय होगी।
- काम की हर महीने मानिटरिंग होगी और देरी होने पर ठेका रद करने की प्रक्रिया अब आसान कर दी गई है।

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