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आश्चर्य है... चाणक्य के वंशज नेताओं को माला पहनाने में शान समझते हैं : प्रो. विकास शर्मा

By Amlendu Tripathi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Thu, 08 Oct 2026 02:34 PM (IST)

प्रो. विकास शर्मा ने अपने उपन्यास 'आल हर फायर्स' के माध्यम से विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति और उनके तानाशाही ...और पढ़ें

आल हर फायर्स उपन्यास के लेखक प्रो. विकास शर्मा। सौ. स्वयं

आल हर फायर्स उपन्यास के लेखक प्रो. विकास शर्मा। सौ. स्वयं

HighLights

  1. आल हर फायर्स उपन्यास के लेखक विश्वविद्यालयों के वातावरण से चिंतित

  2. कुलपतियों की नियुक्ति व जेन जी की जीवन शैली पर केंद्रित है उपन्यास

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। देश के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति में बहुत गड़बड़झाला है। अधिकांश विश्वविद्यालयों के कुलपति तानाशाह हो चुके हैं। वहां प्रोफेसर डरे सहमे रहते हैं। यहां तक कि वे किसी गलत बात का विरोध करने से भी बचते हैं। यह कहना है आल हर फायर्स उपन्यास के लेखक प्रो. विकास शर्मा का।

कुलपतियों की नियुक्ति व जेन जी की जीवन शैली पर केंद्रित इस उपन्यास के बाद चर्चा में आए प्रो. शर्मा बुधवार को प्रयागराज में थे। अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर कई सवाल खड़े किए। कहा, अधिकांश कुलपतियों को राजनीतिक संरक्षण मिला है, इसलिए उनकी तानाशाही चरम पर है। आल हर फायर्स उपन्यास में इलाहाबाद विश्वविद्यलाय सहित कई अन्य विश्वविद्यालयों को विषयवस्तु बनाया गया है।

कहते हैं कि यह उपन्यास जेन जी की जीवनशैली, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बाद शिक्षकों का कार्य व्यवहार लिपिकीय होने, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों में घटती छात्र उपस्थिति, एआइ के कारण मौलिक रचनाओं में कमी जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रो. शर्मा कवि कुमार विश्वास के बड़े भाई भी हैं।

उन्होंने कहा कि आश्चर्य का विषय है कि एक व्यक्ति लगातार चार से पांच बार कुलपति कैसे बन सकता है। वह इस पर भी नाराजगी जताते हैं कि चाणक्य के वंशज शिक्षक नेताओं को माला पहनाने और बुके देने में शान समझते हैं। अपनी साहित्यिक यात्रा के संदर्भ में उन्होंने बताया कि 15 अंग्रेजी के उपन्यास लिख चुके हैं। नया उपन्यास ईरान यूएस इजरायल युद्ध को संदर्भित करते हुए आने वाला है।

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