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प्रयागराज: विकसित कॉलोनियां बनीं बाजार, कोचिंग और नर्सिंग होम के चलते सड़कों पर पार्किंग

By Gyanendra Singh1 Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 27 Sep 2026 04:00 PM (IST)

प्रयागराज की आवासीय कॉलोनियां धीरे-धीरे व्यावसायिक केंद्र बनती जा रही हैं, जहाँ दुकानें, कोचिंग और नर्सिंग होम संचालित हो रहे ...और पढ़ें

प्रयागराज के टैगोर टाउन स्थित रिहायशी क्षेत्र में अस्पताल के बाहर खड़े वाहन। जागरण

प्रयागराज के टैगोर टाउन स्थित रिहायशी क्षेत्र में अस्पताल के बाहर खड़े वाहन। जागरण

HighLights

  1. आपात स्थिति में एंबुलेंस, दमकल के पहुंचने में भी होती है काफी परेशानी

  2. कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति, बिगड़ता गया कालोनियों का स्वरूप

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। आवासीय कॉलोनियों को शहर का सुकून भरा हिस्सा बनाने के लिए नियम कागजों पर तो सख्त हैं, लेकिन जमीन पर असर कमजोर दिख आ रहा है। आवासीय उपयोग के लिए विकसित कालोनियां धीरे-धीरे बाजार बनती जा रही हैं। घरों में दुकानें, कार्यालय, कोचिंग सेंटर, क्लीनिक और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

कार्रवाई की प्रभावशीलता पर उठे सवाल

इसकी शिकायतों के बाद नोटिस दिया जाता है। निरीक्षण होता है और कहीं-कहीं कार्रवाई भी की जाती है, कुछ समय बाद फिर वही गतिविधियां शुरू हो जाती हैं। इससे कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नंबर गेम

08 जोन हैं नगर और विस्तारित क्षेत्र में
30 हजार भवन स्वामियों को 10 वर्ष में दिया गया है नोटिस
70 मानचित्र हर माह पास हो रहे हैं
150 अवैध भवन हर माह सील हो रहे हैं
60 हेक्टेयर भूमि पर प्लाटिंग हर महीने ध्वस्त की जा रही है।

आवासीय भवनों का व्यावसायिक उपयोग 

जार्ज टाउन, टैगोर टाउन, गोविंदपुर, मेहंदौरी, दारागंज, भरद्वाजपुरम (अल्लापुर), राजापुर, म्योराबाद, बेली, कमला नगर, सलोरी समेत कई अन्य इलाकों में आवासीय भवनों का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। मुख्य सड़क से लेकर बस्ती की गलियों तक ऐसे भवन हैं, जहां दिनभर ग्राहकों और कोचिंग में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की आवाजाही बनी रहती है। इससे उन सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ रहा है, जिन्हें आवासीय क्षेत्र के अनुसार विकसित किया गया था।

पार्किंग को लेकर बड़ी समस्या 

सबसे बड़ी समस्या पार्किंग को लेकर सामने आ रही है। व्यवसाय से संबंधित लोग सड़क किनारे गाड़ियां पार्क कर देते हैं। कई जगह दुकानों और बड़े प्रतिष्ठानों के बाहर गाड़ियों के चलते रास्ते की चौड़ाई कम हो जाती है। सुबह और शाम जाम की स्थिति बनती है। आपात स्थिति में एंबुलेंस और दमकल के पहुंचने में भी परेशानी हो सकती है।

नोटिस के बाद फिर शुरू हो जाता है कारोबार

शिकायत मिलने पर संबंधित विभागों की ओर से नोटिस जारी किए जाते हैं। कुछ मामलों में सीलिंग या अन्य कार्रवाई की जाती है। हालांकि स्थायी समाधान के अभाव में कार्रवाई का असर लंबे समय तक नहीं रहता। कई भवनों में नोटिस के बाद गतिविधियां बंद हुईं, कुछ समय बाद दोबारा शुरू हो गईं। इससे अभियान की निरंतरता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।

अभिलेख और वास्तविकता में अंतर

नगर निगम के अभिलेखों में गैर आवासीय भवनों की संख्या लगभग 20 हजार है लेकिन वर्तमान में 70 से 80 हजार आवासीय भवनों का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों में किया जा रहा है। जार्ज टाउन, टैगोर टाउन और आसपास के क्षेत्रों में कोचिंग, क्लीनिक, कार्यालय तथा अन्य प्रतिष्ठानों की भरमार इसका उदाहरण है।

कॉलोनियों की मूल योजना पर असर

आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है। इससे कालोनियों की मूल योजना भी प्रभावित हो रही है। सड़क, पार्किंग, सीवर, पेयजल, बिजली और यातायात जैसी सुविधाएं आवासीय जरूरतों के अनुसार विकसित की गई थीं। आबादी के साथ कारोबार बढ़ने से इन संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
शहर के सुनियोजित विकास के लिए जरूरी है कि आवासीय और व्यावसायिक उपयोग की सीमाएं स्पष्ट रूप से लागू हों। केवल नोटिस जारी करने के बजाय कार्रवाई के बाद नियमित निगरानी और दोबारा व्यावसायिक गतिविधि मिलने पर प्रभावी कदम उठाने होंगे।

आवासीय भवनों में कोचिंग, नर्सिंग होम, जिम संचालन होने के संबंध में कार्रवाई समय-समय पर की जाती है। नियम के विपरीत आवासीय भवनों का उपयोग करने वालों के खिलाफ जल्द ही टीम बनाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू है।
-ऋषि राज, पीडीए उपाध्यक्ष

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