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प्रयागराज में रेलवे का घूसखोर कार्यालय अधीक्षक बर्खास्त, एपीओ पर जांच तेज

By Amarish Manish shuklaEdited By: Vivek Shukla
Published: Wed, 07 Oct 2026 10:30 AM (GMT+05:30)

रेलवे प्रशासन ने भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत प्रयागराज में सख्त कार्रवाई की है। सहायक लोको पायलट दंपती ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. रेलवे ने भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई।

  2. कार्यालय अधीक्षक राजेंद्र मणि त्रिपाठी को सेवा से बर्खास्त।

  3. सहायक कार्मिक अधिकारी अरविंद कुमार पर विभागीय जांच जारी।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। रेलवे प्रशासन ने भ्रष्टाचार और घूसखोरी के मामलों पर अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। सहायक लोको पायलट (एएलपी) दंपती के स्थानांतरण के एवज में रिश्वत मांगने के चर्चित मामले में उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) प्रशासन ने कार्यालय अधीक्षक को सेवा से बर्खास्त कर दिया है, जबकि मामले में लिप्त सहायक कार्मिक अधिकारी (एपीओ) के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जीएम नरेश पाल सिंह के कड़े निर्देशों के बाद हुई इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है।

क्या था पूरा मामला?
मीरपुर निवासी सहायक लोको पायलट की तैनाती वर्तमान में प्रयागराज मंडल में थी, जबकि उनकी पत्नी भी सहायक लोको पायलट के पद पर कानपुर में पदस्थ थीं। दंपती ने 'स्पाउस ग्राउंड' (पति-पत्नी के एक ही स्थान पर पदस्थापन का नियम) के तहत प्रयागराज में एक साथ तैनाती के लिए ट्रांसफर आवेदन दिया था। प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी को लेकर जब पीड़ित रेलकर्मी डिप्टी डीआरएम कार्यालय पहुंचे, तो वहां तैनात एपीओ अरविंद कुमार ने उन्हें कार्यालय अधीक्षक राजेंद्र मणि त्रिपाठी से संपर्क करने को कहा। आरोप है कि अधीक्षक राजेंद्र मणि ने ट्रांसफर फाइल को आगे बढ़ाने के लिए 70 हजार रुपये की रिश्वत की मांग रखी।

सीबीआई ने बिछाया था जाल
दंपती ने घूस देने के बजाय इसकी लिखित शिकायत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कर दी। सीबीआई ने मामले का सत्यापन करने के बाद जाल बिछाया और 10 सितंबर को डीआरएम कार्यालय में छापेमारी कर एपीओ अरविंद कुमार और कार्यालय अधीक्षक राजेंद्र मणि त्रिपाठी को रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार कर सीधे जेल भेज दिया। दोनों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

रेलवे की दोहरी कार्रवाई: निलंबन के बाद सीधे बर्खास्तगी
सीबीआई कार्रवाई के तत्काल बाद उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन ने प्राथमिक स्तर पर दोनों रेलकर्मियों को निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही पूरे प्रकरण की आंतरिक विभागीय जांच बैठा दी गई।

उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि जीएम के निर्देशों के आधार पर रेलवे की साख को बट्टा लगाने वाले कर्मियों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया गया है। जांच रिपोर्ट के पहले चरण में कार्यालय अधीक्षक राजेंद्र मणि त्रिपाठी पर लगे आरोपों की पुष्टि होने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से रेलवे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

वहीं, एपीओ अरविंद कुमार की भूमिका को लेकर विभागीय जांच अभी प्रगति पर है। सीपीआरओ के अनुसार, जांच पूरी होते ही तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को प्रेषित की जाएगी और बोर्ड स्तर से ही उनके खिलाफ अंतिम दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।

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प्रशासनिक गलियारों में हलचल
कर्मचारियों के वैवाहिक आधार पर तबादले जैसे संवेदनशील मामलों में रिश्वतखोरी का यह मामला सामने आने के बाद रेलवे यूनियन और कर्मचारी संगठनों में भी भारी रोष देखा गया।

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प्रशासन की इस त्वरित बर्खास्तगी से संदेश स्पष्ट है कि पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रेलवे ने सभी विभागों को कर्मचारियों के सेवा संबंधी आवेदनों के समयबद्ध व पारदर्शी निस्तारण के निर्देश भी जारी किए हैं।