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'नियमों का पालन हो रहा तो अजान में बाधा न डाले पुलिस', इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निस्तारित की याचिका

Published: Wed, 07 Oct 2026 04:17 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सहारनपुर की आयशा मस्जिद में अजान को लेकर अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि ...और पढ़ें

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HighLights

  1. हाई कोर्ट ने सहारनपुर की आयशा मस्जिद में अजान पर दिया आदेश।

  2. ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन करने पर पुलिस नहीं करेगी हस्तक्षेप।

  3. लाउडस्पीकर का उपयोग निर्धारित डेसिबल सीमा में ही करना होगा।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सहारनपुर की आयशा मस्जिद में पांच वक्त की अजान को लेकर अहम आदेश दिया है। कहा है कि यदि याची ध्वनि प्रदूषण से संबंधित नियमों का पालन करते हैं तो पुलिस और जिला प्रशासन अजान में हस्तक्षेप नहीं करेगा। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने शहनवाज खान व पांच अन्य की याचिका इसी निर्देश के साथ निस्तारित कर दी है।

याचीगण ने मांग की थी कि थाना गागलहेड़ी स्थित मस्जिद में उन्हें पांच वक्त की अजान और इसके लिए लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति दी जाए। याचिका में आरोप था कि जिला प्रशासन और पुलिस उन्हें इसकी अनुमति नहीं दे रही है, जबकि इस संबंध में हाई कोर्ट के निर्णय हैं। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष लिखित निर्देश प्रस्तुत किया।

इसके अनुसार अजान करने से नहीं रोका जा रहा है, लेकिन लाउडस्पीकर का उपयोग ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 के तहत निर्धारित डेसिबल सीमा के भीतर ही करना होगा। इस क्रम में 15 मई, 2020 को तय अफजल अंसारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले का हवाला भी दिया गया।

उस फैसले में कोर्ट ने कहा है कि अजान इस्लाम का आवश्यक और अभिन्न हिस्सा हो सकती है, लेकिन लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों से अजान देना धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं है, जिसे अनुच्छेद 25 के तहत मौलिक अधिकार का संरक्षण मिले। यह अधिकार लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है। किसी भी स्थिति में रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर की अनुमति नहीं दी जा सकती।

याचियों के अधिवक्ता ने कहा कि वे किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं करेंगे। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि याचीगण नोटरी शपथ-पत्र के साथ प्रार्थनापत्र दें कि वे नियम व निर्देशों का पालन करेंगे। ऐसा होने पर पुलिस कोई बाधा नहीं डालेगी, साथ ही यह भी सुनिश्चित करेगी कि शपथ-पत्र का पालन हो। उल्लंघन पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकेगी।

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