प्रयागराज के लोगों को दाखिल-खारिज और रजिस्ट्री में बड़ी राहत, अब सिर्फ एक हजार रुपये विलंब शुल्क लगेगा
प्रयागराज नगर निगम ने संपत्ति दाखिल-खारिज और वरासत में लगने वाले विलंब शुल्क में बड़ा बदलाव किया है। अब हर ...और पढ़ें

प्रयागराज में संपत्ति के दाखिल-खारिज और वरासत में लगने वाले विलंब शुल्क में बड़ी राहत मिली है।
HighLights
नगर निगम सदन की बैठक में हर माह 500 रुपये बढ़ोतरी का प्रावधान खत्म
वरासत में भी एकमुश्त शुल्क लगेगा, 15 से 20 हजार लोगों को मिलेगा लाभ
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। संपत्ति की रजिस्ट्री कराने या दाखिल-खारिज में देरी अब लोगों की जेब पर हर महीने भारी नहीं पड़ेगी। नगर निगम सदन ने विलंब शुल्क की मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए एक हजार रुपये का एकमुश्त विलंब शुल्क निर्धारित करने के संकल्प को मंजूरी दे दी है। अब देरी होने पर हर माह 500 रुपये अतिरिक्त विलंब शुल्क नहीं देना होगा।
मृतक की संपत्ति के वरासत के मामलों में भी एक हजार रुपये ही विलंब शुल्क लिया जाएगा। इस निर्णय से करीब 15 से 20 हजार लोगों को राहत मिलने का अनुमान है। प्रस्ताव पारित होते ही पार्षदों ने मेज थपथपाकर इसका स्वागत किया।
नगर निगम सदन की बैठक गुरुवार को महापौर गणेश केसरवानी की अध्यक्षता में हुई। जनहित से जुड़े कई प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान संपत्ति के दाखिल-खारिज, नई रजिस्ट्री और वरासत में लगने वाले विलंब शुल्क का मुद्दा प्रमुखता से उठा।
पार्षदों ने कहा कि संपत्ति खरीदने के बाद कई बार दस्तावेजों की प्रक्रिया, पारिवारिक परिस्थितियों या अन्य कारणों से समय पर दाखिल-खारिज नहीं हो पाता। ऐसे में मूल शुल्क के साथ हर महीने बढ़ता विलंब शुल्क लोगों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है।
अब तक नगर निगम में दाखिल-खारिज समेत संबंधित प्रक्रियाओं में देरी होने पर हर माह 500 रुपये विलंब शुल्क लेने का प्रावधान था। यानी जितनी अधिक देरी होती, उतना ही शुल्क बढ़ता जाता। पार्षदों का कहना था कि इस व्यवस्था का सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग और छोटे संपत्ति खरीदारों पर पड़ रहा था।
कई लोगों को जानकारी के अभाव में या किसी अपरिहार्य कारण से समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती थी। बाद में उन्हें मूल प्रक्रिया पूरी करने के साथ बढ़ा हुआ विलंब शुल्क भी जमा करना पड़ता था।
पार्षद कमलेश तिवारी, भोला तिवारी और ज्ञानेंद्र मिश्रा ने पिछली सदन की बैठक में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने मांग की थी कि विलंब शुल्क की व्यवस्था को सरल और जनहितकारी बनाया जाए। उनका तर्क था कि हर महीने शुल्क बढ़ाने के बजाय एक निश्चित राशि निर्धारित की जाए, जिससे लोगों को अनावश्यक आर्थिक भार से राहत मिल सके।
अगर आप 10 सितंबर 2026 को कोई भी जमीन खरीदते हैं तो एक हजार शुल्क लगेगा। लेकिन दाखिल खारिज 10 सितंबर 2027 को कराएंगे तो कोई शुल्क नहीं लगेगा। सदन की बैठक में नगर आयुक्त साईं तेजा,अपर नगर आयुक्त राजीव शुक्ला,अरविंद राय,जलकल के महाप्रबंधक संजीव कुमार,जलकल के लेखाधिकारी सुजीत कुमार,नगर निगम विद्युत यांत्रिक के मुख्य अभियंता डा. संजय कटियार,जलकल के अधिशासी अभियंता संदीप उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
15 से 20 हजार लोगों को राहत की उम्मीद
नगर निगम के इस निर्णय से दाखिल-खारिज, नई रजिस्ट्री और वरासत से जुड़े करीब 15 से 20 हजार लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। खासकर वे लोग राहत महसूस करेंगे, जिनके मामले लंबे समय से लंबित हैं और विलंब शुल्क लगातार बढ़ने के कारण प्रक्रिया पूरी कराने में परेशानी आ रही थी। नए निर्णय के बाद अब देरी की अवधि बढ़ने के साथ हर महीने 500 रुपये की अतिरिक्त देनदारी नहीं बढ़ेगी। एक हजार रुपये का एकमुश्त विलंब शुल्क जमा कर संबंधित प्रक्रिया पूरी कराई जा सकेगी।
स्वच्छता रैंकिंग वाले वार्ड में नाला सफाई की खुली पोल
नगर निगम सदन में उस समय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए, जब स्वच्छ सर्वेक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान पाने वाले वार्ड 31 के पार्षद ने ही नाला सफाई की व्यवस्था पर सवाल उठा दिया। पार्षद ने कहा कि उनके वार्ड में नालों की ठीक से सफाई नहीं होने के कारण बारिश होते ही घरों में पानी भर जाता है। नालों से निकलने वाली गंदगी आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। पार्षद ने कहा कि लोग लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
