प्रयागराज: गांवों में भ्रष्टाचार की रेंग रहीं फाइलें, विभागों में 100 मामले धूल फांक रहे सरकारी सिस्टम पर उठे सवाल
प्रयागराज में गांवों के विकास में हुए भ्रष्टाचार की सौ से अधिक शिकायतें सरकारी विभागों में धूल फांक रही हैं, ...और पढ़ें

सोर्स- AI से जेनरेट की गई प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
जनपद स्तरीय 20 अधिकारियों के पास लंबित हैं सौ से अधिक शिकायतें लंबित
कोई डेढ़ साल से दबाकर बैठा, पंचायती राज विभाग व प्रशासन गंभीर नहीं
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। गांवों के विकास के नाम पर प्रधानों व सचिवों ने सरकारी धन की खूब लूट की। करीब दो दर्जन से अधिक मामलों किनारे लग चुके हैं। किसी में प्रधान के अधिकार छिने तो किसी में भ्रष्टाचार के प्रमाण न मिलने पर क्लीन चिट मिली। ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार से जुड़ी करीब एक सैकड़ा से अधिक फाइलें अभी सरकारी विभागों में धूल फांक रही है।
सरकारी सिस्टम पर उठे सवाल
तमाम फाइलें तो ऐसी हैं, जो जांच अधिकारी बनाए गए दूसरे विभागों के करीब 20 जनपद स्तरीय अधिकारियों की अलमारियों में कैद हैं। वहीं कुछ शिकायतें पंचायती राज विभाग कार्यालय में फाइलों के बोझ तले दबी हुई है। सिर्फ इसलिए क्योंकि, जांच में मिली गड़बड़ी पर दोषी प्रधान व सचिव का जवाब नहीं आया। सवालों में घिरे गांवों के विकास की हकीकत सामने आए भी तो कैसे। यही नहीं सरकारी सिस्टम खुद सवालों के घेरे में है।
एक साल बाद भी पूरी नहीं हुई जांच
मेजा के भईयां निवासी कृष्णधर मिश्रा की शिकायत पर डीएम ने 28 अक्टूबर को ग्राम पंचायत के कार्यों की जांच के निर्देश दिए। जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी को जांच सौंपी गई, लेकिन यह फाइल अब भी जहां की तहां अटकी पड़ी है।
ढाई महीने में नहीं हुआ जवाब का परीक्षण
धनूपुर के शंकरपुर व किरांव में कूड़ेदान की खरीद सहित अन्य कार्यों में लाखों रुपये का घोटाला हुआ। तीन महीने पहले मामला पकड़ा गया। प्रधानों ने जवाब दिया, लेकिन ढाई महीने बाद भी अधिकारी उसका परीक्षण नहीं करा सके। सचिव पर कार्रवाई की फाइल सुल्तानपुर के डीडीओ कार्यालय में दबी पड़ी है।
नोटिस बाद में मिली पहले हुआ निस्तारण
हंडिया के टेला निवासी मुकेश कुमार का आरोप है कि ग्राम पंचायत में नियमों के विपरीत हुए भुगतान की शिकायत की थी। जांच में आरोप सही मिलने पर ग्राम पंचायत का बैंक खाता भी सीज हुआ था। दोबारा जांच की खानापूरी कराकर खाता फिर खोल दिया गया। यह जांच तीन सितंबर को हुई, जबकि उन्हें नोटिस 15 सितंबर को मिली।
ऐसी मामलों के निस्तारण के लिए अभियान शुरू किया गया है। हर सप्ताह 20 मामलों का निस्तारण किया जाएगा। दोषियों पर कार्रवाई भी होगी।
- रवि शंकर द्विवेदी, डीपीआरओ।
