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प्रयागराज में चार घंटे तक चला ग्रामीणों और तेंदुआ में 'छद्म युद्ध', हमले में दो लोग घायल हुए, हर ओर थी दहशत

By Jagran News Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Thu, 08 Jan 2026 02:03 PM (IST)

प्रयागराज के झूंसी के छिबैया गांव में तेंदुआ ने ग्रामीणों को चार घंटे तक डराया। छिबैया गांव में लाठी-डंडों से ...और पढ़ें

प्रयागराज के झूंसी स्थित छिबैया गांव में तेंदुए ने घंटों तक ग्रामीणों को आतंकित रखा, पुलिस-पीएसी बल भी डटी रही। जागरण्

प्रयागराज के झूंसी स्थित छिबैया गांव में तेंदुए ने घंटों तक ग्रामीणों को आतंकित रखा, पुलिस-पीएसी बल भी डटी रही। जागरण्

HighLights

  1. लोग लाठी-डंडा लेकर दौड़ा रहे थे, तेंदुआ गांव के इस कोने से उस कोने तक दौड़ता-भागता रहा

  2. झूंसी के छिबैया गांव के घर में जान बचाने के लिए घुसा तेंदुआ तो बाहर से बंद किया दरवाजा

  3. खौफ में घरवालों ने अपने को एक कमरे में बंद किया, ग्रामीणों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला

जागरण्गे संवाददाता, प्रयागराज। गुरुवार सुबह का वक्त था, दर्जनों लोगों के हाथों में लाठी-डंडा था फिर भी खौफ में थे। शोर मचाते हुए वे गंगापार में झूंसी स्थित छिबैया गांव में तेंदुआ को दौड़ा रहे थे। तेंदुआ  अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था। वह गांव के इधर से उधर भाग रहा था, पीछे-पीछे ग्रामीण थे। इस दौरान करीब चार घंटे तक ग्रामीणों में दहशत का आलम था। पुलिस के साथ पीएसी जवान भी बुला लिए गए थे। उन्हें भीड़ को नियंत्रित करने में मशक्कत करनी पड़ी।

जिस घर में घुसा तेंदुआ, वहां महिलाएं-बच्चे थे

इस दौड़-भाग में दो लोग तेंदुए के हमले से घायल भी हो गए। इस लुका-छिपी के बाद आखिर तेंदुआ गांव स्थिात इंवर्टर व बैटरी का काम करने वाले शेखर सिंह के घर में घुस गया। इस मकान में पहले से ही कुछ महिलाएं और बच्चे मौजूद थे। तेंदुआ जैसे ही घर में घुसा, ग्रामीणों ने तत्काल बाहर से दरवाजा बंद कर दिया।

 

prayagraj leopard terrorises in Jhunsi chibaiyan

घर के रोशनदान से लोगों को सुरक्षित निकाला गया

शेखर के परिवार वाले भी इसी घर में कैद हो गए। दहशत में इन लोगों ने अपने आप को एक कमरे में बंद कर लिया। बाहर शोर-शराबा हो रहा था और अंदर तेंदुआ और शेखर के परिवार के लोग थे। इसके बाद ग्रामीणों ने मशक्कत करके घर के रोशनदान से सभी को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला। तब उनकी जान में जान आई। 

prayagraj leopard terrorises and police

करीब 10 माह से तेंदुआ की थी दहशत

पिछले करीब छह माह से गंगापार में तेंदुआ दहशत का पर्याय बना था। कभी इस गांव में दिखता तो कभी दूसरे गांव में तो कभी कछार के इलाकों में। तेंदुआ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने अपना पूरा जोर लगा दिया था। जगह-जगह पिंजरा भी रखवाया गया था, लेकिन वह पकड़ में नहीं आ सका था। इस दौरान तेंदुआ के हमले में कई ग्रामीण घायल भी हो गए तो कई मवेशी उसका निवाला भी बने।

prayagraj leopard attake injured

कोटवा में दिखी थी पहली झलक

अगस्त महीने में तेंदुए ने अपनी मौजूदगी का एहसास कराया था। सबसे पहले वह बहादुरपुर के दक्षिणी कोटवा के गंगा के कछार में दिखा था। इसके बाद 10 अगस्त को मलखानपुर में राजेंद्र बिंद को जख्मी किया। 11 अगस्त को सुदनीपुर में रतौरा तालाब के पास दिखा। तीन सितंबर को सुदनीपुर में भीटेश्वर मंदिर के पास नजर आया। आठ सितंबर को जमुनीपुर में तारा बिंद को घायल किया था। इसके बाद एक झलक उसकी दलापुर में दिखी थी और फिर झूंसी के एचआइआर में कई दिनों तक तेंदुआ घूमता रहा।

कानपुर से बुलाई गई ट्रैकुलाइज करने वाली टीम

गुरुवार सुबह करीब पांच बजे गंगापार स्थित झूंसी के छिबैया गांव के लोगों को तेंदुआ नजर आया था।इसके बाद करीब चार घंटे तक वह इधर से उधर भागता रहा। आखिर में वह एक घर में घुस गया। ग्रामीणों ने उसी में तेंदुए को बंद कर दिया। सूचना पर डीएफओ अरविंद कुमार टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अब उसे ट्रैकुलाइज करने के लिए कानपुर से विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है।

तेंदुआ भी सहमा हुआ था

झूंसी से करीब सात किलोमीटर दूर स्थित छिवैया गांव में सुबह करीब पांच बजे लोगों की नजर तेंदुए पर पड़ी। इसके बाद लोगों में दहशत फैल गई। खबर गांव में फैली तो सैकड़ों लोग एकत्र हो गए। हाथों में लाठी-डंडे लेकर ग्रामीणों ने तेंदुए को दौड़ा लिया। करीब चार घंटे तक वह गांव के इस कोने से उस कोने तक दौड़ता-भागता रहा। आगे-आगे तेंदुआ था तो पीछे-पीछे लाठी-डंडे लेकर लोग। लोग भी खौफ में थे और तेंदुआ भी अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था।

तेंदुए को देखने के लिए छतों पर चढ़े लोग

तेंदुए को लेकर दहशत तो थी ही, वह लोगों में कौतुहल का विषय भी बना रहा। आसपास के कई गांवों के लोग छिवैया पहुंच गए। जिस घर में तेंदुआ फंसा था, वहां पर लोगों की भारी भीड़ एकत्र हो गए। तमाम ग्रामीण सिर्फ तेंदएु की एक झलक देखने के लिए परेशान थे। कोई घरों की छत पर खड़ा था तो कोई खिड़कियों से झांक रहा था।

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