प्रयागराज में चार घंटे तक चला ग्रामीणों और तेंदुआ में 'छद्म युद्ध', हमले में दो लोग घायल हुए, हर ओर थी दहशत
प्रयागराज के झूंसी के छिबैया गांव में तेंदुआ ने ग्रामीणों को चार घंटे तक डराया। छिबैया गांव में लाठी-डंडों से ...और पढ़ें

प्रयागराज के झूंसी स्थित छिबैया गांव में तेंदुए ने घंटों तक ग्रामीणों को आतंकित रखा, पुलिस-पीएसी बल भी डटी रही। जागरण्
HighLights
लोग लाठी-डंडा लेकर दौड़ा रहे थे, तेंदुआ गांव के इस कोने से उस कोने तक दौड़ता-भागता रहा
झूंसी के छिबैया गांव के घर में जान बचाने के लिए घुसा तेंदुआ तो बाहर से बंद किया दरवाजा
खौफ में घरवालों ने अपने को एक कमरे में बंद किया, ग्रामीणों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला
जागरण्गे संवाददाता, प्रयागराज। गुरुवार सुबह का वक्त था, दर्जनों लोगों के हाथों में लाठी-डंडा था फिर भी खौफ में थे। शोर मचाते हुए वे गंगापार में झूंसी स्थित छिबैया गांव में तेंदुआ को दौड़ा रहे थे। तेंदुआ अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था। वह गांव के इधर से उधर भाग रहा था, पीछे-पीछे ग्रामीण थे। इस दौरान करीब चार घंटे तक ग्रामीणों में दहशत का आलम था। पुलिस के साथ पीएसी जवान भी बुला लिए गए थे। उन्हें भीड़ को नियंत्रित करने में मशक्कत करनी पड़ी।
जिस घर में घुसा तेंदुआ, वहां महिलाएं-बच्चे थे
इस दौड़-भाग में दो लोग तेंदुए के हमले से घायल भी हो गए। इस लुका-छिपी के बाद आखिर तेंदुआ गांव स्थिात इंवर्टर व बैटरी का काम करने वाले शेखर सिंह के घर में घुस गया। इस मकान में पहले से ही कुछ महिलाएं और बच्चे मौजूद थे। तेंदुआ जैसे ही घर में घुसा, ग्रामीणों ने तत्काल बाहर से दरवाजा बंद कर दिया।

घर के रोशनदान से लोगों को सुरक्षित निकाला गया
शेखर के परिवार वाले भी इसी घर में कैद हो गए। दहशत में इन लोगों ने अपने आप को एक कमरे में बंद कर लिया। बाहर शोर-शराबा हो रहा था और अंदर तेंदुआ और शेखर के परिवार के लोग थे। इसके बाद ग्रामीणों ने मशक्कत करके घर के रोशनदान से सभी को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला। तब उनकी जान में जान आई।

करीब 10 माह से तेंदुआ की थी दहशत
पिछले करीब छह माह से गंगापार में तेंदुआ दहशत का पर्याय बना था। कभी इस गांव में दिखता तो कभी दूसरे गांव में तो कभी कछार के इलाकों में। तेंदुआ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने अपना पूरा जोर लगा दिया था। जगह-जगह पिंजरा भी रखवाया गया था, लेकिन वह पकड़ में नहीं आ सका था। इस दौरान तेंदुआ के हमले में कई ग्रामीण घायल भी हो गए तो कई मवेशी उसका निवाला भी बने।

कोटवा में दिखी थी पहली झलक
अगस्त महीने में तेंदुए ने अपनी मौजूदगी का एहसास कराया था। सबसे पहले वह बहादुरपुर के दक्षिणी कोटवा के गंगा के कछार में दिखा था। इसके बाद 10 अगस्त को मलखानपुर में राजेंद्र बिंद को जख्मी किया। 11 अगस्त को सुदनीपुर में रतौरा तालाब के पास दिखा। तीन सितंबर को सुदनीपुर में भीटेश्वर मंदिर के पास नजर आया। आठ सितंबर को जमुनीपुर में तारा बिंद को घायल किया था। इसके बाद एक झलक उसकी दलापुर में दिखी थी और फिर झूंसी के एचआइआर में कई दिनों तक तेंदुआ घूमता रहा।
कानपुर से बुलाई गई ट्रैकुलाइज करने वाली टीम
गुरुवार सुबह करीब पांच बजे गंगापार स्थित झूंसी के छिबैया गांव के लोगों को तेंदुआ नजर आया था।इसके बाद करीब चार घंटे तक वह इधर से उधर भागता रहा। आखिर में वह एक घर में घुस गया। ग्रामीणों ने उसी में तेंदुए को बंद कर दिया। सूचना पर डीएफओ अरविंद कुमार टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अब उसे ट्रैकुलाइज करने के लिए कानपुर से विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है।
तेंदुआ भी सहमा हुआ था
झूंसी से करीब सात किलोमीटर दूर स्थित छिवैया गांव में सुबह करीब पांच बजे लोगों की नजर तेंदुए पर पड़ी। इसके बाद लोगों में दहशत फैल गई। खबर गांव में फैली तो सैकड़ों लोग एकत्र हो गए। हाथों में लाठी-डंडे लेकर ग्रामीणों ने तेंदुए को दौड़ा लिया। करीब चार घंटे तक वह गांव के इस कोने से उस कोने तक दौड़ता-भागता रहा। आगे-आगे तेंदुआ था तो पीछे-पीछे लाठी-डंडे लेकर लोग। लोग भी खौफ में थे और तेंदुआ भी अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था।
तेंदुए को देखने के लिए छतों पर चढ़े लोग
तेंदुए को लेकर दहशत तो थी ही, वह लोगों में कौतुहल का विषय भी बना रहा। आसपास के कई गांवों के लोग छिवैया पहुंच गए। जिस घर में तेंदुआ फंसा था, वहां पर लोगों की भारी भीड़ एकत्र हो गए। तमाम ग्रामीण सिर्फ तेंदएु की एक झलक देखने के लिए परेशान थे। कोई घरों की छत पर खड़ा था तो कोई खिड़कियों से झांक रहा था।
