समुद्र मंथन के रत्नों से सजा संगम नगरी का कलश चौराहा, रात में रोशनी से नहाई आकृतियां खूबसूरती को बढ़ा रहीं
प्रयागराज का कलश चौराहा अब समुद्र मंथन से निकले रत्नों की आकर्षक आकृतियों से सजाया गया है, जिसमें 14 फीट ...और पढ़ें

प्रयागराज का कलश चौराहा। जागरण
HighLights
14 फीट ऊंचा कुंभ कलश व समुद्र मंथन से निकले रत्नों की लगाई गई आकर्षक आकृतियां
सनातन धर्म व समुद्र मंथन की धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर विकसित किया गया यह चौराहा
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। धर्म और अध्यात्म की नगरी प्रयागराज में कलश चौराहे को दिव्य और भव्य स्वरूप दिया गया है। यहां समुद्र मंथन से निकले रत्नों की आकर्षक आकृतियां स्थापित की गई हैं। दिन में इनकी भव्यता लोगों को आकर्षित करती है, वहीं रात में रोशनी से नहाई आकृतियां चौराहे की खूबसूरती में चार चांद लगा रही हैं।
इन आकृतियों से सजाया गया चौराहा
सनातन संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं को दर्शाता यह चौराहा शहर की सुंदरता में नया रंग भर रहा है। चौराहे पर समुद्र मंथन से निकले कालकूट (हलाहल) विष, कामधेनु गाय, उच्चैःश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, रंभा अप्सरा, महालक्ष्मी, वारुणी, चंद्रमा (सोम), पारिजात वृक्ष, पांचजन्य शंख और भगवान धन्वंतरि की आकर्षक आकृतियां लगाई गई हैं।
चौराहे के रखरखाव की जिम्मेदारी निजी कंपनी को सौंपी
इसके साथ ही अमृत कलश और कुंभ कलश को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है। यहां स्थापित कुंभ कलश की आकृति 14 फीट ऊंची है, जो चौराहे का प्रमुख आकर्षण बनी हुई है। इन आकृतियों को इस तरह सजाया गया है कि धार्मिक आस्था के साथ शहर की सुंदरता भी निखरे। रात में रंग-बिरंगी रोशनी से इनका आकर्षण और बढ़ जाता है। चौराहे के रखरखाव की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपी गई है।
सनातन धर्म के मर्म को बयां कर रहा कलश चौराहा
नगर आयुक्त साईं तेजा ने बताया कि शहर के चौराहों को आकर्षक और दिव्य स्वरूप देने के प्रयास किए जा रहे हैं। कलश चौराहे को सनातन धर्म और समुद्र मंथन की धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर विकसित किया गया है।
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