संगम नगरी का नया लैंडमार्क : अब केवल स्टेशन नहीं, 'सिटी सेंटर' बनेगा प्रयागराज जंक्शन; एक ही छत के नीचे पूरी होगी हर जरूरत
प्रयागराज जंक्शन को 960 करोड़ रुपये के बजट से एक भव्य सिटी सेंटर के रूप में पुनर्विकसित किया जा रहा ...और पढ़ें

प्रयागराज जंक्शन।
HighLights
प्रयागराज के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे
2026 तक पूरा होगा, हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। तीर्थराज प्रयागराज की पहचान अब केवल त्रिवेणी संगम और कुंभ से ही नहीं, बल्कि आधुनिकता के उस शिखर से भी होगी जो सिविल लाइंस की ऊंची इमारतों के बीच आकार ले रहा है। प्रयागराज जंक्शन अब महज ट्रेनों के आवागमन का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि यह उत्तर भारत के सबसे भव्य 'सिटी सेंटर' के रूप में उभरने जा रहा है। 960 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ, यह देश का सर्वाधिक स्टेशन बजट वाला पुनर्विकास प्रोजेक्ट बन गया है। 9 मंजिलों वाली इस नई इमारत में अब गांव के किसान से लेकर शहर के कारपोरेट जगत तक की हर जरूरत का समाधान मिलेगा।
अत्याधुनिक ढांचा : 45 मीटर ऊंची नौ मंजिला इमारत
सिविल लाइंस साइड में बन रही जंक्शन की नई बिल्डिंग अपने अंतिम स्वरूप में है। 45 मीटर ऊंची इस गगनचुंबी इमारत में ग्राउंड फ्लोर के साथ कुल नौ तल (फ्लोर) हैं। रेलवे का लक्ष्य इसे एक ऐसे 'कमर्शियल हब' के रूप में विकसित करना है, जहाँ यात्री सुविधाओं के साथ-साथ विश्वस्तरीय व्यापारिक गतिविधियां भी संचालित हों।
गांव से शहर तक : सबकी जरूरतों का संगम
इस सिटी सेंटर की सबसे बड़ी खासियत इसका समावेशी होना है। आम आदमी के लिए- स्टेशन पर 'एक स्टेशन एक उत्पाद' (ओएसओपी) के कियोस्क होंगे, जहां स्थानीय हस्तशिल्प और क्षेत्रीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। गांव से आने वाले यात्रियों के लिए साफ-सुथरे प्रतीक्षालय, आधुनिक शौचालय, फ्री वाई-फाई और कम लागत वाले फूड प्लाजा की व्यवस्था होगी।
शहरियों और पर्यटकों के लिए
शहर के लोगों के लिए यहाँ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, ब्रांडेड आउटलेट्स और मल्टीप्लेक्स की सुविधा होगी। अब ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन आने वाले लोग वहीं अपनी पसंदीदा फिल्म देख सकेंगे या डिनर कर सकेंगे।
व्यापारिक वर्ग के लिए : तीसरी से नौवीं मंजिल तक कार्पोरेट कार्यालयों के लिए जगह दी जा रही है, जिससे यह शहर का नया बिजनेस एड्रेस बनेगा।
'सात सी' (7सी) की अवधारणा पर विकास
जंक्शन का पुनर्विकास सात मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित है-
कंजेशन फ्री स्टेशन : आने और जाने वाले यात्रियों के लिए अलग-अलग रास्ते होंगे ताकि भीड़ न हो।
आधुनिक सुविधा : लिफ्ट और एस्केलेटर का जाल बिछाया गया है।
संरक्षण : प्रयागराज की सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति को बचाते हुए निर्माण।
स्वच्छता : ग्रीन बिल्डिंग और वेस्ट मैनेजमेंट की अत्याधुनिक तकनीक।
संचार : हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और सूचना केंद्र।
परिवहन एकीकरण : मेट्रो, इलेक्ट्रिक बसों और पार्किंग का जंक्शन से सीधा जुड़ाव।
संयुक्त विकास : कमर्शियल और ट्रांसपोर्ट सुविधाओं का एक साथ विस्तार।
निवेश को खुले द्वार : 45 साल की लीज पर मिलेगा स्पेस
रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) ने इस प्रोजेक्ट को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़ी योजना तैयार की है। बिल्डिंग के तीसरे से नौवें फ्लोर तक, यानी लगभग 2 लाख वर्गफुट से अधिक के क्षेत्र को निजी निवेशकों के लिए खोल दिया गया है।
राजस्व साझाकरण माडल : यह पूरी योजना 'रेवेन्यू शेयरिंग' पर आधारित है, जिसमें रेलवे को कम से कम 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी मिलेगी।
प्री-बिड मीटिंग : 17 मार्च 2026 को आरएलडीए मुख्यालय में इसकी महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इच्छुक निवेशक 23 अप्रैल 2026 तक अपनी बोली लगा सकते हैं।
यात्रियों की सुविधा
पुनर्विकसित जंक्शन पर यात्रियों का अनुभव पूरी तरह बदलने वाला है।
भव्य कानकोर्स : यात्री प्रथम तल पर बने विशाल 'कानकोर्स' में आराम से बैठकर ट्रेन का इंतजार करेंगे। यहाँ से सीधे एस्केलेटर के जरिए वे अपने प्लेटफार्म पर उतरेंगे।
स्काईवाक और फुटओवर ब्रिज : 12 मीटर चौड़े फुटओवर ब्रिज और दो-स्तरीय स्काईवॉक से प्लेटफॉर्म के बीच की आवाजाही आसान होगी।
बीएमएस और ग्रीन बिल्डिंग : पूरी बिल्डिंग 'बिल्डिंग मैनेजमेंट सिस्टम' (बीएमएस) से नियंत्रित होगी और दिव्यांग यात्रियों के लिए पूरी तरह सुलभ होगी।
संगम नगरी का नया भविष्य
मंडल पीआरओ अमित सिंह के मुताबिक, छह अगस्त 2023 को शुरू हुआ यह सपना साल 2026 के अंत तक धरातल पर पूरी तरह उतर जाएगा। यह जंक्शन न केवल रेलवे के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत बनेगा, बल्कि प्रयागराज के युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा करेगा।
