विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गैरों के नाम हुई प्रयागराज की वन भूमि, कटघरे में राजस्व विभाग; क्या भूमि नामांंतरण से पूर्व पुराने दस्तावेज नहीं देखे जाते?

By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Mon, 16 Mar 2026 02:23 PM (IST)

प्रयागराज में वन भूमि का अवैध नामांतरण सामने आया है, जिससे राजस्व विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। ...और पढ़ें

प्रयागराज के यमुनापार के कोरांव तहसील में वन भूमि को लेकर कई दावेदार सामने आ रहे हैं।

प्रयागराज के यमुनापार के कोरांव तहसील में वन भूमि को लेकर कई दावेदार सामने आ रहे हैं।

HighLights

  1. कोरांव के बेदीपट्टी में करीब 64 बीघा भूमि महिला के नाम दर्ज थी

  2. अब बेलहट में 400 बीघा भूमि का दावा करने वाले भी खड़े हो गए

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे हो जाएं और राजस्व विभाग को पता न चले, यह बात समझ में आती हैं। यहां तो वन भूमि ही दूसरों के नाम पर दर्ज हो रही है। यमुनापार के कोरांव तहसील में ही इसके कई मामले सामने आ चुके हैं। इससे राजस्व विभाग की कार्यशैली को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या भूमि नामांंतरण के पहले पुराने दस्तावेज भी नहीं देखे जाते।

कोरांव के बेदीपट्टी में महिला काबिज थी

कोरांव तहसील के बेदीपट्टी में वन विभाग की करीब 64 बीघा वन भूमि राजस्व विभाग के दस्तावेजों में एक महिला पानकली के दर्ज हो गई थी। कई साल तक यही महिला इस वन भूमि की मालिक बनी रही। वर्ष 2024 में वन विभाग ने अपनी जमीनों के पुराने दस्तावेज निकलवाने शुरू किए। बेदीपट्टी की वन भूमि के दस्तावेज भी निकलवाए गए, जिसके बाद महकमे को इसकी जानकारी हुई। मामला प्रशासन तक पहुंचा, जिसके बाद बीते दिसंबर में भूमि फिर वन विभाग के नाम चढ़ी।

कोरांव के बेलहट में कई काश्तकार कर रहे दावेदारी

इसी तहसील के बेलहट में 2044 बीघा वन भूमि है। इसमें से 472 बीघा भूमि विभाग के दस्तावेजों से गायब है। वहीं लगभग 400 बीघे वन भूमि पर कई काश्तकार दावेदारी कर रहे हैं। इस मामले का पटाक्षेप अभी तक नहीं हुआ है।

मेजा तहसील में भी गड़बड़ी की आशंका

इसके अलावा मेजा तहसील क्षेत्र के चकडीहा में भी सैकड़ों बीघे वन भूमि है। बेलहट और बेदीपट्टी के बाद अब चकडीहा में भी इसी तरह की गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। वन भूमि के इस तरह से विवादों में पड़ने से एक बात तो साफ है कि वन विभाग अपनी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। इसी के साथ राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीनों का नामांतरण हो रहा है।

यह भी पढ़ें- रेलवे प्रयागराज जंक्शन को 45 वर्ष के पट्टे पर देगा, 7 फ्लोर का टेंडर जारी, रेलयात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मिलेंगी

यह भी पढ़ें- बेसिक स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं शुरू, कक्षा दो-तीन में 50% मौखिक व चार-पांच में 70% लिखित परीक्षा होगी