प्रयागराज में वन भूमि और ग्राम सभा की जमीनें खनन माफिया के निशाने पर, कई गांवों में बारूद से तोड़ रहे पहाड़-पत्थर
प्रयागराज के शंकरगढ़, भैसाही जैसे कई गांवों में वन भूमि और ग्राम सभा की जमीनों पर सिलिका सैंड का अवैध ...और पढ़ें

प्रयागराज में पहाड़ी इलाकों में खनन माफिया पहाड़ और पत्थरों में धमाके कर रहे हैं।
HighLights
कई बार पकड़े जा चुके हैं मामले, फिर भी नहीं उठाए जा रहे ठोस कदम
बारूद से पहाड़ तोड़कर चोरी-छिपे सिलिका सैंड निकाल रहे हैं।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। यमुनापार में शंकरगढ़ के भैसाही में पकड़ा गया सिलिका सैंड के अवैध खनन का मामला सिर्फ एक उदाहरण मात्र है। आसपास के कई गांव ऐसे हैं, जहां यह खेल खुलेआम चल रहा है। बिना किसी अनुमति या पट्टे के खनन माफिया पहाड़ और पत्थरों में धमाके कर रहे हैं। इनकी गूंज बस्तियों को भले दहला रही हो, लेकिन जिम्मेदारों के कानों तक इसकी गूंज नहीं पहुंच रही है।
बिना एनओसी हो रहा अवैध खनन
शंकरगढ़ इलाके का चरहारी, भैसाही और घोंद गांव सिलिका सैंड के अवैध खनन के लिए कुख्यात हैं। यह वह इलाके हैं, जहां पर वन भूमि हैं। वन भूमि पर वैसे भी खनन पर रोक है। अन्य जमीनों पर भी खनन के लिए वन विभाग की अनुमति जरूरी होती है। फिलहाल, विभाग ने यहां पर किसी को एनओसी नहीं दी है। इसके बाद भी अवैध खनन हो रहा है।
चोरी-छिपे सिलिका सैंड निकालते हैं
सूत्रों का कहना है कि इलाके के ही रहने वाले कुछ खनन माफिया इसमें संलिप्त हैं। पहले ड्रिल मशीन से पथरीली जमीन पर बोरिंग करते हैं। इसके बाद बारूद लगाकर पत्थर तोड़ते हैं। फिर, इलाके के मजदूरों को लगाकर चोरी-छिपे सिलिका सैंड निकालते हैं। इलाके में चल रहे प्लांटों में छह से सात हजार रुपये प्रति ट्राली के हिसाब से इसे बेचा जाता है।
कार्रवाई के बाद भी अवैध खनन नहीं रुक रहा
खनन माफिया ग्राम सभा, पहाड़ व अन्य सरकारी जमीनों के साथ वन भूमि को भी नहीं छोड़ रहे हैं। बीते एक साल के अंदर ही चरहारी में करीब छह, भैसाही में करीब आठ और घोंद में अवैध खनन का एक मामला पकड़ा गया था। इसमें वन विभाग ने कार्रवाई की थी, लेकिन इसके बाद भी खनन नहीं रुका। इसके अलावा बिहरिया, जनवा, गढ़वा में भी अवैध रूप से खनन हो रहा है।
चरहारी, भैसाही और घोंद में खनन की एनओसी नहीं दी गई है। फिर भी खनन हो रहा है। वन भूमि के मामलों में वह कार्रवाई कर रहे हैं। अन्य प्रकरण में कार्रवाई का अधिकार उन्हें नहीं है।
- आकाश कुमार, वन दारोगा, शंकरगढ़।
