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प्रयागराज में आबकारी सिपाही की मौत मामले में अस्पताल संचालक डॉक्टर पर FIR, कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई

By tara chand Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 25 Oct 2026 01:08 PM (IST)

प्रयागराज में आबकारी सिपाही इमरान अहमद की मौत के मामले में कोर्ट के आदेश पर अस्पताल संचालक डॉ. फिरोजउद्दीन के ...और पढ़ें

आबकारी विभाग में कांस्टेबल की मौत मामले में अस्पताल संचालक पर प्रयागराज में केस दर्ज हुआ है।

आबकारी विभाग में कांस्टेबल की मौत मामले में अस्पताल संचालक पर प्रयागराज में केस दर्ज हुआ है।

HighLights

  1. लिवर की बीमारी से पीड़ित था इमरान अहमद

  2. गौस नगर, करेली के अस्पताल में भर्ती कराया था

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। आबकारी सिपाही 35 वर्षीय इमरान अहमद की मौत के मामले में आखिरकार मुकदमा दर्ज हो गया है। कोर्ट के आदेश पर करेली पुलिस ने गौस मेडिकेयर सेन्टर हॉस्पिटल के संचालक डॉ. फिरोजउ‌द्दीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

इमरान के अब्बा अली अहमद सिद्दीकी का कहना है कि आबकारी विभाग में कांस्टेबल के पद पर सेवारत रहने के दौरान बेटा लीवर की बीमारी से पीडित हुआ। 21 जुलाई 2024 को उसे गौस नगर, करेली स्थित अस्पताल में चेकअप कराया। वहां डॉक्टर फिरोजउ‌द्दीन ने तात्कालिक समुचित इलाज के लिए भर्ती किया। बताया कि उस वक्त बेटे की हालत सामान्य थी।

डॉ. फिरोजउ‌द्दीन ने इमरान अहमद को तत्काल अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी। डॉक्टर ‌ने बताया गया कि मरीज के पेट में पानी भरने के कारण उसे तकलीफ बढ़ गई है, इसलिए पानी निकाला जाना प्राण रक्षा के लिए अत्यन्त आवश्यक है। डाॉ. फिरोजउ‌द्दीन द्वारा मरीज के पेट का अल्ट्रासाउन्ड और एक्स-रे युनाइटेड डायग्नोस्टिक सेंटर करैली में कराया। फिर आपरेशन थियेटर में ले जाया गया।

आरोप के अनुसार डॉ. फिरोजउ‌द्दीन ने किसी गैस्ट्रोलजिस्ट (पेट रोग विशेषज्ञ) एवं लीवर रोग विशेषज्ञ (हेप्टोलजिस्ट) से बिना कोई राय मशविरा किए तथा रोग विशेषज्ञ के बिना देखरेख में शल्यक्रिया करके मरीज के लीवर से पानी निकाला। इसके तत्काल बाद मरीज की हालत अत्यंत गम्भीर होने पर डाॅ. फिरोजउ‌द्दीन की सलाह पर मरीज को अरोग्यवरम क्रिटीकल केयर यूनिट के आईसीयू वार्ड में भर्ती किया गया। उसे इन्सेटिंव केयर में वेंटिलेटर पर रखा गया। मरीज की हालत में सुधार न होने के कारण 23 जुलाई 2024 को मृत्यु हो गई।

अली अहमद सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि इलाज में लापरवाही और शल्य क्रिया की अनभिजता और अकुशलता के कारण मौत हुई है। इसके लिए डॉ. फिरोजउ‌द्दीन जिम्मेदार है। उसने इलाज और ऑपरेशन के नाम पर कई बार पैसे लिए और रशीद नहीं दी। फिरोजउ‌द्दीन ने पीड़ित को धोखे में रखकर उसके पुत्र को अस्पताल में आपातकालीन इलाज की व्यवस्था नहीं होने के बावजूद भी धन उगाही करने की लालच में भर्ती कर लिया। यह भी आरोप लगाया कि फिरोजउ‌द्दीन के पास एमबीबीएस एवं सर्जन की डिग्री नही है और वह मात्र BUMS डिग्री धारक (यूनानी डॉक्टर) है और शल्य क्रिया से पूर्णतयाः अनभिज्ञ है।

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