गांजा या असलहा नहीं...नकली खाद की कोड वर्ड में फोन पर होती थी डीलिंग, यूरिया को बताते थे 'नमकीन'
प्रयागराज में नकली खाद का बड़ा कारोबार पकड़ा गया है, जहां तस्कर 'नमकीन' कोड वर्ड का इस्तेमाल कर किसानों को ...और पढ़ें

प्रयागराज के यमुनापार के कोरांव में नकली खाद के कारोबार करने में एक आरोपित की गिरफ्तारी हुई है।
HighLights
प्रयागराज में नकली खाद के कारोबार का भंडाफोड़, पुलिस के हत्थे चढ़ा एक आरोपित, सरगना फरार
कोरांव क्षेत्र के कपासी गांव में एक सप्ताह में करीब 25 किसानों के हाथों बेची थी 200 बोरी नकली डीएपी
1800 रुपये प्रति बोरी तय था दाम, फोन पर आर्डर लेकर अर्टिगा कार से गांव जाकर करते थे डिलिवरी
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। जिस तरह से चरस, गांजा और असलहे के कारोबार में तस्कर कोड वर्ड में बात करते हैं, ठीक वही तरीका नकली खाद का कारोबार करने वाला गैंग भी अपना रहा था। किसानों को सख्त हिदायत दी गई थी कि फोन पर आर्डर देते समय खाद का नाम न लें, बल्कि इसकी जगह पर नमकीन कहें। यही नहीं खाद का प्रयोग करने के बाद बची हुई बोरियों को तत्काल जला देने की शर्त भी रखी गई थी।
जिले में खाद की मची किल्लत ने किसानों को नकली खाद का गोरखधंधा करने वालों पर आंखें बंद करके भरोसा करने के लिए मजबूर कर दिया। यही वजह है कि जिस डीएपी की कीमत 1350 रुपये है, उसके लिए 1800 रुपये तक किसान दे रहे थे। झांसे में आए कई किसानों को बताया गया था कि समितियों से मिलीभगत करके खाद निकाली जाती है। हालांकि खाद खेतों में डालने के बाद भी उसका कोई असर नहीं हुआ। किसानों को चिंता अपनी पूंजी की हो रही है। किसान मांग उठा रहे हैं कि उनकी रकम वापस कराई जाए।
किसानों की सतर्कता से डीएपी के नाम पर इफ्को की बोरी में नकली खाद भर बेचने वाले गैंग का राजफाश हुआ है। इसका एक सदस्य पुलिस के हत्थे चढ़ गया। जबकि, सरगना फरार हो गया है। किसानों से फोन पर आर्डर लेकर यह गैंग अर्टिगा कार से गांव में खाद की डिलिवरी देता था। कोड वर्ड में खाद को नमकीन कहा जाता था, ताकि चोरी पकड़ी न जाए।
यमुनापार में कोरांव के कपासी गांव में बीते एक सप्ताह के अंदर इस गैंग ने डीएपी के नाम पर 20 से 25 किसानों के हाथ करीब 200 बोरी नकली खाद बेची थी। कोरांव कस्बे का रहने वाला अवधेश केसरी इफ्को कंपनी की बोरी में यह नकली डीएपी भर कर 1800 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से बेचता था। खेतों में डालने के कई दिन बाद भी जब खाद का कोई असर नहीं दिखा तो किसानों को शंका हुई। गांव के रामचंद्र सहित अन्य किसानों ने कारोबारियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।
बुधवार को 10 बोरी खाद का आर्डर दिया। रात में अवधेश अपने एक अन्य साथी लवकुश के साथ खाद लेकर पहुंचा तो ग्रामीणों ने घेर लिया। इस पर अवधेश तो कार लेकर फरार हो गया, लेकिन लवकुश ग्रामीणों के हत्थे चढ़ गया। लोगों ने उसे कोरांव पुलिस के सिपुर्द कर दिया। गुरुवार को फिर किसान थाने पहुंचे और तहरीर दी।
सूचना पर जिला कृषि अधिकारी केके सिंह भी पहुंचे। पकड़े गए आरोपी और किसानों से बातचीत की। किसानों के यहां रखी नकली खाद के सैंपल लिए। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि खाद पूरी तरह से नकली है। एक आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है। जबकि, मुख्य सरगना अवधेश फरार हो गया है। एफआइआर दर्ज कराई जाएगी।
कालाबाजारी में खाद की दुकान सीज
जिला कृषि अधिकारी केके सिंह ने गुरुवार को जारी, जसरा, शंकरगढ़, नारीबारी, कोरांव क्षेत्र में छापेमारी का अभियान चलाया। शंकरगढ़ के गडहिया स्थित पटेल खाद बीज भंडार में जांच के दौरान कालाबाजारी पकड़ी। यहां 15 किसानों को 50-50 बोरी यूरिया बेची गई थी, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं था। पीओएस मशीन में 160 बोरी एनपीके दिखाई गई थी। जबकि, मौके पर गोदाम खाली था। ओवररेटिंग की बात भी सामने आई। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि दुकान सीज कर दी है। संबंधित के खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा।
खाद के अवैध कारोबार में पिता भी गया था जेल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अवधेश के पिता ओम प्रकाश केसरी पहले खाद का व्यापार करते थे। उन्होंने विभाग से लाइसेंस भी ले रखा था। कई साल पहले किसान नेताओं ने तमाम आरोप लगाते हुए कस्बे में घेराव व प्रदर्शन किया था। इसी मामले में ओम प्रकाश को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसमें वह जेल भी गया था। साथ ही उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था।
