प्रयागराज में डेंगू का फैला दायरा, अब तक मरीजों की संख्या बढ़कर हुई 88, SRN अस्पताल में क्या है व्यवस्था?
प्रयागराज में डेंगू का दायरा बढ़ गया है और अब तक 88 मरीज सामने आ चुके हैं। एसआरएन, बेली और ...और पढ़ें

प्रयागराज में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
HighLights
एसआरएन अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए आरक्षित है वार्ड
काल्विन व बेली अस्पताल में भी मरीजों के लिए वार्डों की व्यवस्था
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। डेंगू के संक्रमण और मच्छरों के डंक से यदि आप निश्चिंत हैं तो यह बड़ी भूल हो सकती है। सितंबर में डेंगू की रफ्तार धीमी रही लेकिन अक्टूबर खतरे का संकेत देते हुए आया है। चार दिनों में जिस तरह से संक्रमित मरीज तेजी से बढ़े हैं, अस्पतालों में भी आरक्षित वार्ड के हालात बता रहे हैं कि एडीज मच्छर हावी होने लगे हैं। अब तक 88 मरीजों में डेंगू हो चुका है। रविवार को ब्लड सेंटरों में प्लेटलेट की मांग करने वालों की संख्या अधिक रही।
एसआरएन अस्पताल के आरक्षित वार्ड में भर्ती मरीज
स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय की मेडिसिन इमरजेंसी में रविवार को आठ मरीज अलग-अलग समय लाए गए। इनमें डेंगू के लक्षण को गम्भीर पाते हुए चार मरीजों को भर्ती किया गया। इनकी जांच के लिए ब्लड के नमूने पैथोलाजी भेजे गए। पहले से भी कई मरीज डेंगू आरक्षित वार्ड में भर्ती हैं। इनकी जांच रिपोर्ट सोमवार को आएगी।
काल्विन व बेली अस्पताल में भी डेंगू वार्ड
टीबी सप्रू चिकित्सालय 'बेली अस्पताल' में रविवार शाम तक डेंगू संक्रमित चार मरीज भर्ती रहे। शनिवार को भर्ती मरीजों की संख्या छह थी। स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में 30 बेड का डेंगू आरक्षित वार्ड है, इसमें डेंगू संक्रमित छह मरीज भर्ती हैं। बेली अस्पताल में 20 और मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय 'काल्विन' में 25 बेड का डेंगू वार्ड है।
सीएचसी में भी 5-5 बेड आरक्षित
सीएमओ डॉ. एके तिवारी ने बताया है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पांच-पांच बेड आरक्षित रखे गए हैं। कहा है कि डेंगू के लक्षण किसी भी बुखार पीड़ित में दिखें, त्वचा पर चकत्ते पड़ने लगे तो मरीज को असप्ताल ले जाने में देरी न करें।
बेली में डेंगू मरीजों के लिए जरूरी दवाएं उपलब्ध
बेली अस्पताल की मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. भावना शर्मा ने कहा है कि आरक्षित वार्ड में सभी जरूरी दवाएं स्टोर कराई गई हैं। चार मरीज भर्ती हैं। बेड पर मच्छरदानी लगाई गई है। बताया कि डेंगू के मरीज ज्यादातर शहरी क्षेत्र से आ रहे हैं, यह भी कहा कि प्लेटलेट की मांग तभी की जाती है जब मरीज की जान पर संकट आता है। फिलहाल भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।
