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प्रयागराज में करोड़ों की बरामदगी: मकान मालिक बोला- मेरा पैसा नहीं, तो आखिर किसका है यह धन?

By Tara Gupta Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 30 Oct 2026 03:39 PM (IST)

प्रयागराज के नवाबगंज में एक घर से तीन ड्रमों में करोड़ों रुपये बरामद हुए हैं, लेकिन मकान मालिक राजेश उर्फ ...और पढ़ें

प्रयागराज में करोड़ों की बरामदगी मामले में पुलिस व आयकर विभाग जांच कर रही है। जागरण आर्काइव

प्रयागराज में करोड़ों की बरामदगी मामले में पुलिस व आयकर विभाग जांच कर रही है। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. बरामदगी के 24 घंटे बाद भी रुपये किसके, साफ नहीं

  2. सगे भाई समेत पूरे परिवार से पुलिस कर रही पूछताछ

  3. आयकर विभाग के अधिकारी भी मामले की जांच कर रहे

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। नवाबगंज के बरईपुर रामनगर गांव स्थित एक घर से तीन ड्रम में मिले करोड़ों रुपये किसके हैं और यहां कैसे आए? इसकी तस्वीर दूसरे दिन भी साफ नहीं हो सकी। पुलिस का दावा है कि मकान मालिक राजेश उर्फ बबलू और उसके भाई राकेश ने पूछताछ में कहा कि बरामद रकम उनकी नहीं है। इसको लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।

कोई सुराग नहीं मिल पा रहा

उधर, गुरुवार रात आयकर विभाग की टीम गांव पहुंची। सहायक आयुक्त की अगुवाई में छह सदस्यीय टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी है। रात को मकान समेत अन्य संभावित स्थानों पर सर्च आपरेशन चलाने और ड्रम में रखे पैसों की गिनती मशीन से किए जाने की बात कही गई है। वहीं, पुलिस की टीम सगे भाई और परिवार के सदस्यों से पूछताछ करती रही, लेकिन इतनी बड़ी रकम को लेकर कोई सुराग नहीं जुटा सकी।

पुलिस ने की थी छापेमारी

दीपावली के मद्देनजर गंगानगर जोन में नकबजनी को लेकर पुलिस ने अभियान शुरू किया। सक्रिय अपराधियों और उनकी गतिविधियों का पता लगाया जा रहा था, तभी बुधवार को पुलिस को पता चला कि राजेश और राकेश ने अपने मकान में करोड़़ों रुपये छिपाकर रखे हैं। तब एडीसीपी पुष्कर वर्मा, एसीपी श्यामजीत प्रमिला सिंह ने कई थाने की पुलिस के साथ राजेश और उसके भाई राकेश के मकान में छापेमारी की।

प्लास्टिक के ड्रम में 500-500 रुपये के नोट थे

यह देख ग्रामीणों की भीड़ जुटने लगी तो पुलिस ने नजदीक आने से रोक दिया। पुलिस ने मकान के भीतर जमीन खोदकर रखे गए तीन प्लास्टिक के ड्रम को बाहर निकाला। उसे खोलकर देखा तो तीनों ड्रम में पांच-पांच सौ रुपये नोट की गड्डी भरी हुई थी। पुलिस ने बरामद रकम को थाने के मालखाने में रखवाते हुए आयकर सहित अन्य विभागों को जानकारी दी।

रुपये के बारे में कोई कुछ नहीं बता रहा

इसी बीच ग्रामीणों में मकान से 60 करोड़ रुपये मिलने की चर्चा होती रही। पुलिस ने मकान मालिक भाइयों समेत चार लोगों को उठाकर पहले पूछताछ शुरू की। इसके बाद परिवार के सदस्यों से भी रकम के बारे में पूछा गया, लेकिन कोई कुछ नहीं बताया। गुरुवार को पुलिस मकान को सील करने के बाद सुबह से लेकर शाम तक आयकर की टीम का इंतजार करती रही, लेकिन वह रात करीब आठ बजे पहुंची।

किसकी है रकम, क्यों छिपाई गई थी?

पूछताछ के दौरान राकेश व राजेश ने कहा कि ड्रम में बरामद रुपये उनके नहीं हैं। इससे बड़ा सवाल यह उठा कि आखिरकार इतनी बड़ी रकम किसकी है, कहां से लाई गई है और किस उद्देश्य के चलते छिपाकर रखी गई थी? फिलहाल अब इस मामले में लोगों की निगाह आयकर विभाग पर टिकी है। नोटों की पूरी गिनती होने के बाद साफ होगा कि बरामद रकम कितनी है?

मुंबई-पुणे से लौटने के बाद बनाई करोड़ों की प्रापर्टी

ग्रामीणों के मुताबिक, बरईपुर रामनगर निवासी राजेश यादव करीब 15 साल पहले मुंबई गया था। वहां एक कंपनी में काम करने की बात बताता था। इसके बाद पुणे गया और आभूषण दुकान में नौकरी करने की बात बताई। कोरोना काल के दौरान वह परिवार समेत गांव लौटा। इसके बाद इसके बाद दादनपुर, मुबारकपुर, मेंडारा और शांतिपुरम में लाखों रुपये की जमीन, ट्रैक्टर-ट्राली, पिकअप खरीदी। उसने दूसरे गांव में भी जमीन खरीदकर शानदार मकान बनवाया। करोड़ों रुपये की प्रापर्टी बनाने पर ग्रामीण उससे पूछते तो साफ तौर पर कुछ नहीं बताता था।

आठ दिन पहले राकेश समेत पांच पर केस

नवाबगंज थाने में आठ दिन पहले राजेश उर्फ बबलू, उसके भाई लवकुश, रजनीश उर्फ छोटू, राज व अमर यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। रिपोर्ट बरईपुर रामनगर निवासी अभिषेक कुमार ने दर्ज कराई थी। अभिषेक का आरोप है कि उसका छोटा भाई 15 माह की बच्ची आरू को लेकर दवा के लिए जा रहा था। तभी राजेश समेत अन्य लोगों ने गाड़ी में टक्कर मार दी। विरोध पर विपक्षी गाली-गलौज करने लगे और मारपीट की, जिससे भाई व बच्ची चोटिल हो गई। तब हमलावरों ने जान से मारने की धमकी भी दी थी। ग्रामीणों चर्चा है कि इस घटना के बाद ही जांच कर रही पुलिस को बबलू और उसके भाई के घर रखी नकदी के बारे में जानकारी मिली थी। हालांकि झगड़ा और पैसे के कनेक्शन को लेकर पुलिस कुछ नहीं कह रही है।

जांच में साइबर या दूसरे अपराध से संबंधित पैसा होने की बात सामने नहीं आई है। पूछताछ में मकान मालिक ने खुद का पैसा होने की बात से इन्कार किया है। प्रथम दृष्टया आय से अधिक संपत्ति का मामला लग रहा है। पूरे मामले की जांच आयकर विभाग को दे दी गई है।
- सोनम कुमार, डीसीपी गंगानगर।

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