60 हजार प्राथमिक शिक्षक पदों पर भर्ती की मांग तेज, प्रयागराज में छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोका
प्रयागराज में 60 हजार प्राथमिक शिक्षक पदों पर भर्ती की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोका।
HighLights
आंदोलन के 11वें दिन सिविल लाइंस में छात्रों ने प्रदर्शन किया
छात्रों ने खाली पड़े शिक्षक भर्ती में विज्ञापन जारी करने की मांग की
राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। खाली पड़े करीब 60 हजार प्राथमिक शिक्षक पदों पर भर्ती की मांग को लेकर प्रयागराज में छात्रों का आंदोलन 11वें दिन गुरुवार को और तेज हो गया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सुबह करीब आठ बजे सिविल लाइंस स्थित धरनास्थल के पास पहुंच गए।
डीएलएड अभ्यर्थियों द्वारा 60 हजार नई शिक्षक भर्ती का विज्ञापन शीघ्र जारी किए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार स्पष्ट निर्णय नहीं लेती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों के बड़ी संख्या में पहुंचने की सूचना पर पुलिस-प्रशासन भी सक्रिय हो गया।
सिविल लाइंस में धरनास्थल की ओर जाने वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग कर छात्रों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं हर्ष होटल के पास एकत्र हो गए और वहीं प्रदर्शन शुरू कर दिया। मौके पर पुलिस बल तैनात रहा। आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं, लेकिन इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की जा रही है।
छात्रों ने सरकार से रिक्त पदों का अधियाचन जारी कर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे हैं और सरकार की ओर से भर्ती को लेकर ठोस फैसला होने तक पीछे नहीं हटेंगे। नई नियमावली के कई प्रावधानों पर आपत्ति छात्रों के विरोध का एक बड़ा कारण नई नियमावली में किए गए बदलाव भी हैं।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक पीजीटी में बीएड की अनिवार्यता को लेकर सबसे अधिक विरोध है। उनका कहना है कि पुरानी नियमावली में प्रवक्ता पद के लिए बीएड अनिवार्य नहीं था जबकि नई नियमावली में इसे जरूरी किए जाने से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। इसी तरह अभ्यर्थी प्राविधिक कला के आधार पर कला शिक्षक बनने के अवसर खत्म किए जाने का भी विरोध कर रहे हैं।
छात्रों का दावा है कि करीब 105 वर्षों से प्राविधिक कला के आधार पर कला शिक्षक बनने का अवसर मिलता रहा है, लेकिन नई व्यवस्था में बीएड अनिवार्य किए जाने से यह अवसर समाप्त हो गया है। हिंदी में संस्कृत की बाध्यता का भी विरोध नई नियमावली में हिंदी विषय में संस्कृत को अनिवार्य किए जाने पर भी अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई है।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार पहले इंटर या स्नातक स्तर पर किसी एक स्तर पर संस्कृत होने पर अभ्यर्थी पात्र हो सकते थे, लेकिन नई व्यवस्था में इंटरमीडिएट में संस्कृत को अनिवार्य किए जाने से कई अभ्यर्थी प्रभावित होंगे। इसके अलावा संगीत और गृह विज्ञान विषय में बीएड अनिवार्य किए जाने का भी विरोध किया जा रहा है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि संगीत में प्रभाकर के साथ बीएड और गृह विज्ञान में भी बीएड अनिवार्य करने से पात्र अभ्यर्थियों के अवसर सीमित हो जाएंगे। सीपीएड और सिंगल सब्जेक्ट अभ्यर्थियों की चिंता प्रदर्शनकारियों ने शारीरिक शिक्षा में सीपीएड धारकों को पात्रता से बाहर किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। वहीं सामाजिक विज्ञान समेत कुछ विषयों में सिंगल सब्जेक्ट से डिग्री लेने वाले अभ्यर्थियों ने भी अवसर कम होने की आशंका जताई है।
छात्रों ने आरोप लगाया कि मंगलवार रात धरना दे रहे उनके कुछ साथियों को पुलिस ने जबरन वहां से हटा दिया। आंदोलनकारियों ने कहा कि आंदोलन कमजोर नहीं होगा। छात्र समिति के संयोजक आशुतोष पांडेय के नेतृत्व में छात्रों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
