विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

नदी है कि...भगवान के नाम के गांवों का किनारा, देवी-देवताओं के नाम पर हैं बेलन नदी के किनारे बसे दर्जनों गांव व मजरे

By Gyanendra Singh Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 16 Aug 2026 03:42 PM (IST)

प्रयागराज में बेलन नदी के किनारे बसे दर्जनों गांवों के नाम देवी-देवताओं पर आधारित हैं, जो इस क्षेत्र के आध्यात्मिक ...और पढ़ें

नदी की प्रतीकात्मक फोटो।

नदी की प्रतीकात्मक फोटो।

HighLights

  1. प्रयागराज में गांवों के नाम भर पौराणिक नहीं है, यहां आध्यात्मिक वातावरण भी 

  2. नदी घाटी सभ्यता से भी जुड़ी है बेलन, पुरातत्व विभाग करा रहा उत्खनन कार्य

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। बेलन का नदी तंत्र भले ही छोटा है मगर उसका वैभव काफी बड़ा है। मध्य भारत के विंध्य पर्वत श्रेणीमाला से बहने वाली बेलन की नदी प्रणाली ही उसके इतिहास के साथ ही भूगोल को दर्शाता है। इतिहास में जाएं तो नदी घाटी की सभ्यता का यह वर्णन करती है। भूगोल ऐसा है कि तीन किमी दूर बसे दो गांवों में यह नदी छह किमी की दूरी तय कर पहुंचती है।

बेलन किनारे के गांवों, मजरों व पुरवा के नाम आध्यात्मिक और पौराणिक हैं। शिवराजपुर, शिवपुर, शंकरपुर, महावीरपुर, भगवानपुर, भवानीपुर, दुर्गापुर, भवानी पट्टी, दर्शनी, देवघाट, गजाधरपुर, गोपालपुर, किशनपुर, मुरलीपुर, वंशीपुर, रामनाथपुर, रामपुर, सीतापुर, लखनपुर, विष्णुपुरी, गणेशपुर, हनुमानपुर, गंगानगर, लक्ष्मीनगर नाम के गांव नदी के किनारे हैं। नाम भर पौराणिक नहीं है, यहां आध्यात्मिक वातावरण भी बना है।

उप्र-मप्र की सीमा पर कोरांव में बसे शिवपुर व शिवराजपुर के जैसे नाम हैं, वैसी ही भक्ति है। ब्लाक प्रमुख कोरांव मुकेश कोल ने बताया कि बेलन तट के गांव में भोले के भक्तों की संख्या संग शिवालय भी ज्यादा हैं। विनय द्विवेदी ने बताया कि पूरा सावन माह भोले की भक्ति में लीन रहता है। परिवार का एक सदस्य सावन के सोमवार का व्रत रहता है।

धर्मेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोनू के मुताबिक भगवान शंकर के मंदिर में महामृत्युंजय जाप के साथ शिव आराधना होती है। भवानीपुर और दुर्गापुर में शारदीय व वासंतिक नवरात्र के अलावा गुप्त नवरात्र में देवी की दिपूजा होती है। हनुमानपुर में पवनपुत्र के मंदिर हैं तो देवघाट गांव में शिवालय हैं। देवघाट के दिनेश पटेल, राजाराम व गेंदालाल ने बताया कि सावन में शिवमंदिर में प्रतिदिन पूजा होती है।

नेवादा के पुष्पराज सिंह ने बताया कि ये गांव प्राचीन सभ्यताओं और पुरातात्विक महत्व को समेटे हैं। पुरातत्व विभाग का उत्खनन कार्य चल रहा है। सोनभद्र से निकली बेलन मीरजापुर होकर प्रयागराज आती है। लगभग 180 किमी लंबी नदी मेजा में टोंस से होकर गंगा में मिलती है।

कोरांव तहसील क्षेत्र से होकर बहने वाली बेलन नदी के तट पर बसे राजस्व गांवों के नाम वास्तव में अद्वितीय हैं। देवी-देवताओं के नामों के इन गांवों का रिकार्ड तहसील में भी दशकों से दर्ज हैं।
-टी. प्रसाद, उप जिलाधिकारी, कोरांव।

यह भी पढ़ें- प्रयागराज : गृहकर के 90 हजार बकाएदारों को राहत, OTS योजना के तहत निर्धारित बकाया राशि 3 किश्तों में जमा कर सकेंगे

यह भी पढ़ें- प्रयागराज में अगले कुछ दिन कैसा रहेगा मौसम? IMD का पूर्वानुमान- छाए रहेंगे बादल, होगी बारिश; फिर उमस बढ़ेगी