दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालय की शोभा बढ़ाएंगी प्रयाग की 60 कलाकृतियां, Allahabad Musium से भेजी जाएंगी दिल्ली
प्रयागराज के इलाहाबाद संग्रहालय से 60 दुर्लभ कलाकृतियां दिल्ली में बन रहे 'युग-युगीन भारत' संग्रहालय भेजी जाएंगी। इनमें सिंधु और ...और पढ़ें

इलाहाबाद संग्रहालय।
HighLights
सिंधु और हड़प्पा सभ्यता कालीन सभ्यता से जुड़ी कलाकृतियां भेजने की प्रक्रिया शुरू
दिल्ली में बन रहा है युग-युगीन भारत संग्रहालय, अगले वर्ष इसका शुभारंभ होगा
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। आजादी के महानायक अमर बलिदानी चंद्रशेखर आजाद पार्क स्थित इलाहाबाद संग्रहालय अलंकरण कलाकृतियां दुनिया के सबसे बड़े 'युग-युगीन भारत' दिल्ली की शोभा बढ़ाएंगी। इलाहाबाद संग्रहालय की 60 अलंकरण कलाकृतियों को चुना गया है जो दिल्ली भेजी जाएंगी।
प्रधानमंत्री की परिकल्पना पर बन रहा संग्रहालय
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना पर बन रहा दिल्ली का संग्रहालय वर्ष 2027 में तैयार हो जाएगा। इलाहाबाद संग्रहालय से भेजी जाने वाली कलाकृतियां सिंधु और हड़प्पा सभ्यता के दौरान की भी हैं।
खास-खास
18 गैलरी हैं इलाहाबाद स्थित संग्रहालय में, केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित, राज्यपाल हैं समिति अध्यक्ष
1942 में संग्रहालय के संग्रहों की समृद्धि के लिए आवश्यक प्रसास किए, फिर होता गया समृद्धिशाली
देश भर के संग्रहालयों से मंगाई जा रहीं कलाकृतियां
दिल्ली में बन रहे 'युग-युगीन भारत' संग्रहालय में देश भर के संग्रहालयों से कलाकृतियां मंगाई जा रही हैं। इलाहाबाद संग्रहालय की भी दुर्लभ और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाने वालीं कलाकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी। इनमें प्रस्तर, मृद, आधुनिक कला, लघु चित्र और अन्य महत्वपूर्ण कलाकृतियों को चुना गया है। यहां संरक्षित इन कलाकृतियों को देश के इतिहास, कला और संस्कृति की विविधता को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से प्रस्तावित दिल्ली संग्रहालय में रखा जाएगा।
इलाहाबाद संग्रहालय में पत्र आया है
संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की ओर से इसके लिए इलाहाबाद संग्रहालय में पत्र आ चुका है। संग्रहालय स्तर पर कलाकृतियों का चयन और उनकी सूची तैयार की जा चुकी है। युग-युगीन संग्रहालय की पहली गैलरी में इन्हें रखा जाएगा, जिसका नाम 'अलंकरण गैलरी' होगा। अलंकरण गैलरी में यहां से भेजी जाने वाली दुर्लभ पांडुलिपियों को भी रखा जाएगा।
राज्यपाल की स्वीकृति पर भेजी जाएंगी कलाकृतियां
इलाहाबाद संग्रहालय की अध्यक्ष व इस प्रोजेक्ट की नोडल अधिकारी डॉ. संजू मिश्रा की निगरानी में चयनित कलाकृतियों की सूची और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत कलाकृतियों को भेजने के लिए इलाहाबाद संग्रहालय समिति की अध्यक्ष व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। अध्यक्ष से मिलने पर कलाकृतियों को दिल्ली भेजा जाएगा।
दिल्ली भेजने के दौरान कलाकृतियों का होगा बीमा
इलहाबाद संग्रहालय से भेजी जाने वाली कलाकृतियों की जिम्मेदारी भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय पर है। मंत्रालय ही इसका खर्च उठाएगा। परिवहन पर लगभग तीन लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है। इन कलाकृतियों का बीमा कराया जाएगा।
भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय की ओर से पत्र आने के बाद 60 दुर्लभ कलाकृतियों की सूची तैयार कर दी गई है। इसे अनुमोदन के लिए राज्यपाल के पास भेजा गया है। उनका अनुमोदन मिलने के बाद संस्कृति मंत्रालय को पत्र भेजा जाएगा।
- डॉ. संजू मिश्रा, अध्यक्ष, इलाहाबाद संग्रहालय।
इलाहाबाद संग्रहालय में हैं प्रमुख कलाकृतियां और संग्रह
टेराकोटा संग्रह: कौशांबी और आसपास के क्षेत्रों से मिली मिट्टी की दुर्लभ मूर्तियां, खिलौने, देवी-देवता और मानव आकृतियां यहां मौजूद हैं।
प्रस्तर एवं कांस्य मूर्तियां: दूसरी शताब्दी से लेकर मध्यकाल तक की सुंदर पत्थरों और कांसे की मूर्तियां (जैसे सरस्वती और कुबेर की मूर्तियां) प्रदर्शित हैं।
चित्रकला: राजस्थानी और पहाड़ी (कांगड़ा) शैली के लघु चित्र तथा निकोलस रोरिच के प्रसिद्ध चित्रकला शामिल हैं।
ऐतिहासिक वस्तुएं: स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की ऐतिहासिक पिस्तौल भी यहां विशेष रूप से रखी गई है।
पांडुलिपियां: महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंत और निराला जैसे महान साहित्यकारों की हस्तलिखित पांडुलिपियां हैं।
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