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दुष्कर्म पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान ना होने पर भी मिलेगा मुआवजा, हाईकोर्ट ने दिया 3 लाख देने का आदेश

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Sat, 24 Oct 2026 05:24 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने फैसला सुनाया है कि पॉक्सो पीड़िता को केवल चोट के निशान न मिलने पर मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता।

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HighLights

  1. पॉक्सो पीड़िता को चोट न मिलने पर भी मिलेगा मुआवजा।

  2. हाई कोर्ट ने रानी लक्ष्मीबाई कोष से तीन लाख देने का आदेश।

  3. मेडिकल रिपोर्ट में चोट न होना मुआवजे से वंचित नहीं करेगा।

विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा कि पाक्सो अधिनियम के तहत प्रवेशात्मक लैंगिक हमले की पीड़िता को केवल इसलिए मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता कि मेडिकल रिपोर्ट में शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं। अदालत ने पीड़िता को रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष से तीन लाख रुपये देने का आदेश दिया है। प्रमाणित आदेश पेश होने के 10 दिन के भीतर भुगतान करना होगा।

न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने कहा कि पीड़िता को मुआवजा अपराध का शिकार होने के कारण दिया जाता है, न कि शरीर पर चोट के निशान के आधार पर। अदालत ने मुआवजा देने से इनकार करने के जिला संचालन समिति के फैसले को कानून और योजना के प्रविधानों के विपरीत माना। मामले के अनुसार, राजधानी के सरोजनीनगर थाने में सात दिसंबर 2022 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। 13 जनवरी 2023 को आरोपपत्र दाखिल हुआ।

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योजना के तहत पाक्सो अधिनियम की धारा चार के अपराध में तीन लाख रुपये मुआवजे का प्रविधान है। इसमें एक लाख रुपये प्राथमिकी दर्ज होने के 15 दिन के भीतर और शेष दो लाख रुपये आरोपपत्र दाखिल होने के एक महीने के भीतर दिए जाने हैं। इसके बावजूद जिला संचालन समिति ने मेडिकल रिपोर्ट में प्रवेशात्मक लैंगिक हमले की पुष्टि नहीं होने का हवाला देकर मुआवजा देने से इन्कार कर दिया था।

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पीड़िता के पिता ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि पाक्सो अधिनियम की धारा तीन के तहत प्रवेशात्मक लैंगिक हमला साबित करने के लिए शारीरिक चोट होना जरूरी नहीं है। केवल चोट के निशान नहीं मिलने से यौन हमले की घटना को नकारा नहीं जा सकता।