मालगाड़ी के लोको पॉयलट राजधानी-शताब्दी व दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनें नहीं चला सकेंगे, रेलवे का आदेश जारी
रेलवे बोर्ड ने प्रीमियम ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन हेतु सख्त नियम लागू किए हैं। अब मालगाड़ी के लोको पायलट राजधानी, शताब्दी, दुरंतो जैसी ट्रेनें नहीं चला सकेंगे।

प्रयागराज-मुंबई दुरंतो एक्सप्रेस । जागरण आर्काइव
HighLights
पैसेंजर ट्रेन द्वारा लाल सिग्नल पार करने की घटना के बाद उठाया गया कदम
रेलवे बोर्ड ने 24 सितंबर को जारी किया आदेश, देश भर में नियम लागू
रेलवे का कड़ा फैसला और सख्ती के निर्देश, नियमों की अनदेखी पर रोक
अमरीष मनीष शुक्ल, प्रयागराज। ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन को लेकर रेलवे बोर्ड ने सख्त रुख अपनाया है। अब किसी भी परिस्थिति में राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों की कमान मालगाड़ी के लोको पॉयलट (चालक) को नहीं सौंपी जा सकेगी। इसके अलावा, विशेष या मांग पर चलने वाली ट्रेनों (टीओडी) में ऐसे चालकों की ड्यूटी लगाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है, जिनका संबंधित रेल मार्ग पर रूट लर्निंग (रास्ते की तकनीकी जानकारी या एलआर) बाकी हो।
रेलवे ने क्यों लिया फैसला?
यह कड़ा कदम पूर्वी रेलवे के आसनसोल मंडल स्थित सीतारामपुर स्टेशन पर बीते 29 जुलाई को एक पैसेंजर ट्रेन द्वारा लाल सिग्नल पार करने (एसपैड- सिग्नल पास्ड एट डेंजर) की गंभीर घटना के बाद उठाया गया है। रेलवे बोर्ड की उच्चस्तरीय बैठक में इस मामले की समीक्षा के बाद सभी जोनल महाप्रबंधकों को नए सुरक्षा दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया गया है।
सिग्नल न देख पाने व हादसों का जोखिम बना रहता था
आपात स्थिति या नियमित लोको पॉयलटों की कमी होने पर कई बार मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ ही विशेष ट्रेनों में मालगाड़ी के लोको पॉयलटों की ड्यूटी लगा दी जाती थी। कई मामलों में ऐसे लोको पॉयलटों को भी उन रूटों की ट्रेनों में भेज दिया जाता था, जिनका उस ट्रैक पर आवश्यक रूट लर्निंग (मार्ग की पहचान) पूरा नहीं हुआ होता था। इससे सिग्नल न देख पाने और हादसों का जोखिम बना रहता था।
रेलवे बोर्ड के सख्त नियम
रेलवे बोर्ड के निदेशक विद्युत अभियांत्रिकी (चल स्टाक) विकास आनंद के अनुसार अब राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों के लिए यदि नियमित लोको पॉयलट उपलब्ध नहीं हैं, तो अन्य निर्धारित शेड्यूल से मेल/एक्सप्रेस के नियमित लोको पॉयलटों को हटाकर इन ट्रेनों में लगाया जाएगा, लेकिन मालगाड़ी के लोको पॉयलट को यह जिम्मेदारी किसी भी हाल में नहीं मिलेगी।
सामान्य मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों पर भी सख्त नियम
सामान्य मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों के मामले में भी सख्त नियम तय किए गए हैं। ये ट्रेनें सामान्यतः मेल/पैसेंजर लोको पायलट ही चलाएंगे। यदि वे उपलब्ध नहीं हैं, तो केवल उन्हीं मालगाड़ी चालकों को जिम्मेदारी दी जाएगी, जो 'ए' ग्रेड प्राप्त हों और जिनका चयन ट्रैक्शन व आपरेटिंग विभाग के सेफ्टी अधिकारियों की स्क्रीनिंग के बाद तैयार पैनल से हुआ हो। यदि ऐसा पैनलबद्ध चालक भी न मिले, तो इंजन के केबिन (फुट-प्लेट) में लोको इंस्पेक्टर (एलआई) की मौजूदगी अनिवार्य होगी।
साफ्टवेयर में होगा तकनीकी सुधार
नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए रेलवे अब तकनीकी बंदोबस्त भी कर रहा है। क्रू मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) में ऐसा प्रावधान किया जा रहा है कि यदि किसी ड्राइवर का रूट लर्निंग (एलआर) बाकी है, तो साफ्टवेयर खुद ही उसकी बुकिंग को रोक देगा। इसके साथ ही ''क्रिस'' (रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र) को एक नया डैशबोर्ड तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है, ताकि विशेष ट्रेनों के संचालन की सूचना संबंधित क्रू लाबी को समय रहते मिल सके और मुख्यालय के केवल उन्हीं चालकों को भेजा जाए जिनके रूट ज्ञान की स्थिति पूरी तरह पुख्ता हो।
