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उत्तर मध्य रेलवे ने 6 माह में पूरा किया साल भर का कबाड़ निस्तारण का लक्ष्य, कमाए 286 करोड़ रुपये

By Amarish Kumar Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 02 Oct 2026 05:17 PM (IST)

उत्तर मध्य रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का 285 करोड़ रुपये का कबाड़ निस्तारण लक्ष्य मात्र छह महीने में पूरा किया। 286.79 करोड़ रुपये कमाए हैं।

एनसीआर ने कबाड़ निस्तारण में उपलब्धि हासिल की है।

एनसीआर ने कबाड़ निस्तारण में उपलब्धि हासिल की है।

HighLights

  1. एनसीआर जोन ने 'वेस्ट टू वेल्थ' की दिशा में नया कीर्तिमान बनाया

  2. इस कामयाबी से आम यात्रियों व रेल संचालन पर भी असर दिखेगा

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) जोन ने ''वेस्ट टू वेल्थ'' (कचरे से कंचन) की दिशा में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। रेलवे बोर्ड द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तय किए गए 285 करोड़ रुपये के पूरे साल के स्क्रैप (कबाड़) बिक्री लक्ष्य को एनसीआर ने मात्र छह महीने की पहली छमाही में ही हासिल कर लिया है। इस अवधि में रेलवे ने 286.79 करोड़ रुपये का अनुपयोगी सामान बेचकर सरकारी खजाने को मजबूत किया है।

पहले क्या थी व्यवस्था?

अब तक रेलवे में पूरे वित्तीय वर्ष (12 महीने) के दौरान धीरे-धीरे अनुपयोगी सामग्री, पुरानी पटरियों, पहियों और निष्क्रिय कोचों की पहचान कर उनकी नीलामी की प्रक्रिया चलती थी। कई बार साल के अंत तक भी लक्ष्य पूरा करना चुनौती बन जाता था और लंबे समय तक कबाड़ यार्डों व रेल पटरियों के किनारे पड़ा रहता था। इससे न केवल परिसर में जगह घिरती थी, बल्कि सुरक्षा पर भी असर पड़ता था।

अब क्या हुआ बदलाव?

अब व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए उत्तर मध्य रेलवे ने त्वरित पहचान, समयबद्ध नीलामी और डिजिटल मॉनिटरिंग की सटीक रणनीति अपनाई। नतीजा यह हुआ कि पूरे 12 महीने में पूरा होने वाला काम महज छह महीने में न केवल पूरा हुआ, बल्कि तय लक्ष्य को पार भी कर गया।

परिसर होंगे स्वच्छ, सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के निर्देशन और प्रधान मुख्य सामग्री प्रबंधक एसपी द्विवेदी की अगुआई में मिली इस कामयाबी से आम यात्रियों और रेल संचालन पर भी सीधा असर दिखेगा।

कबाड़-मुक्त और सुरक्षित ट्रैक

पटरियों और रेलवे स्टेशनों के आसपास वर्षों से पड़ा लोहा और कबाड़ हट जाने से दुर्घटनाओं की आशंका घटेगी और ट्रैक मेंटेनेंस आसान होगा।

स्वच्छता और खाली जमीन का बेहतर उपयोग

स्टेशनों और रेलवे परिसरों में गंदगी की बड़ी वजह बनने वाला स्क्रैप हटने से ''स्वच्छ भारत अभियान'' को गति मिली है। साथ ही खाली हुई जमीन का उपयोग नई रेल परियोजनाओं और यात्री सुविधाओं के विस्तार में किया जा सकेगा।

विकास कार्यों में तेजी

छह महीने में जुटाए गए 286.79 करोड़ रुपये के राजस्व से रेलवे के विकास और आधुनिकीकरण के कार्यों को गति मिलेगी।

आगे भी अप्रत्याशित आंकड़ा आने की उम्मीद 

उत्तर मध्य रेलवे के सीनियर पीआरओ डॉ. अमित मालवीय ने बताया कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा। पूरे जोन को शत-प्रतिशत स्क्रैप-मुक्त बनाने के लिए बची हुई छमाही में भी इसी तेजी से काम जारी रहेगा, जिससे इस वित्तीय वर्ष के अंत तक राजस्व का एक अप्रत्याशित आंकड़ा सामने आने की उम्मीद है।

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