अब दवा खाना भूले तो स्वजन को मिलेगा संदेश, MNNIT इलाहाबाद के शोधकर्ताओं ने बनाया अनूठा स्मार्ट मेडिसिन कंटेनर
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNNIT) इलाहाबाद के शोधकर्ताओं ने IoT आधारित स्मार्ट मेडिसिन कंटेनर विकसित किया है। यह डिवाइस ...और पढ़ें

स्मार्ट मेडिसिन कंटेनर डिवाइस की जानकारी देते MNNIT इलाहाबाद के इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष प्रो. बसंत कुमार। जागरण
HighLights
आईओटी तकनीक वाली डिवाइस अलर्ट के साथ केयर गिवर को भी भेजेगी संदेश
पिछले माह मिला इसको पेटेंट, अब डिवाइस को कामर्शियलाइज करेंगे विज्ञानी
मृत्युंजय मिश्र, जागरण, प्रयागराज। अस्पताल की ओपीडी में बैठे बुजुर्ग मरीज के सामने दवाइयों के कई डिब्बे रखे थे। वह बार-बार पर्ची देख रहे थे लेकिन समझ नहीं पा रहे थे कि कौन-सी दवा कब लेनी है। यह दृश्य मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के प्रो. बसंत कुमार के मन में सवाल छोड़ गया कि क्या ऐसी तकनीक नहीं हो सकती, जो मरीज को सही समय पर सही दवा लेने की याद दिलाए और भूलने पर परिजनों को भी सूचना दे दे।
पांच साल शोध के बाद डिवाइस तैयार
इसी सोच ने इंटरनेट आफ थिंग्स (आईओटी) आधारित स्मार्ट मेडिसिन कंटेनर का रूप लिया। पांच साल के शोध के बाद तैयार इस डिवाइस को पिछले महीने भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से पेटेंट भी मिल गया है। यह उपकरण तय समय पर अलार्म और एलईडी के जरिए मरीज को दवा लेने का संकेत देता है। यदि मरीज दवा नहीं निकालता, तो उसके केयर गिवर या परिवार के सदस्य के मोबाइल पर तुरंत संदेश भेज देता है। इससे अकेले रहने वाले बुजुर्गों और नियमित दवा लेने वाले मरीजों की देखभाल अधिक आसान और सुरक्षित हो सकेगी।

स्मार्ट मेडिसिन कंटेनर में रखनी होगी दवा
एमएनएनआईटी के इलेक्ट्रानिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष प्रो. बसंत कुमार और शोधार्थी सौरभ सिन्हा ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित स्मार्ट मेडिसिन कंटेनर को विकसित किया है। आकार में छोटा लेकिन तकनीकी रूप से अत्याधुनिक यह डिवाइस बर्जर, एलईडी और स्मार्ट अलर्ट सिस्टम से लैस है। मरीज को केवल डॉक्टर की पर्ची के अनुसार दवाइयों को कंटेनर के अलग-अलग खानों में रखना होगा। मोबाइल एप के जरिए दवा की जानकारी और उसे लेने का समय फीड करना होगा।
समय पर डिवाइस बजाएगी अलार्म
समय होते ही डिवाइस अलार्म बजाएगी और जिस खाने में संबंधित दवा रखी होगी, वहां एलईडी लाइट जल उठेगी। इसकी सबसे बड़ी विशेषता स्मार्ट निगरानी प्रणाली है। यदि दो बार अलार्म बजने के बाद भी मरीज कंटेनर खोलकर दवा नहीं निकालता है तो यह स्वतः केयर गिवर या परिवार के सदस्य के मोबाइल पर संदेश भेज देगा। इससे अकेले रहने वाले बुजुर्गों और नियमित दवा लेने वाले मरीजों की देखभाल और आसान हो सकेगी।
ओपीडी की घटना से आया विचार
इस नवाचार की शुरुआत वर्ष 2020 में हुई। प्रो. वसंत कुमार ने बताया कि एक अस्पताल की ओपीडी में उन्होंने एक बुजुर्ग मरीज को दवाइयों के कई डिब्बों के साथ बैठे देखा। मरीज को यह समझने में कठिनाई हो रही थी कि कौन-सी दवा कब लेनी है। यहीं से एक ऐसे काम्पैक्ट और स्मार्ट उपकरण का विचार आया, जो दवा लेने की पूरी प्रक्रिया को आसान बना सके। इसके बाद शोध शुरू हुआ, मोबाइल एप तैयार किया गया और विभाग के थ्री-डी प्रिंटर की मदद से डिवाइस का प्रोटोटाइप विकसित किया गया। इसके डिजाइन से लेकर कंपोनेंट माउंटिंग और सिस्टम डिजाइन तक का पूरा कार्य संस्थान के शोधकर्ताओं ने स्वयं किया।
दवा खत्म होने से पहले मिलेगा अलर्ट
डिवाइस ब्लूटूथ के माध्यम से मोबाइल से जुड़ती है। दवा खत्म होने से पहले नया स्टाक भरने का अलर्ट देती है। शोधकर्ताओं की योजना अगले तीन से चार महीनों में इस स्मार्ट मेडिसिन कंटेनर का व्यावसायीकरण करने की है। एमएनएनआइटी के इनक्यूबेशन सेंटर के सहयोग से इसे प्रयोगशाला से बाजार माडल के तहत एक स्टार्टअप के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि यह तकनीक जल्द आम लोगों तक पहुंच सके।
अलग है स्मार्ट मेडिसिन कंटेनर
एमएनएनआइटी प्रयागराज का स्मार्ट मेडिसिन कंटेनर सामान्य दवा बाक्स से इसलिए अलग है, क्योंकि यह दवा लेने का समय बताने के साथ उसकी अनदेखी होने पर केयर गिवर को भी संदेश भेजता है। इसमें अलार्म, एलईडी संकेतक और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी की सुविधा है। फिलहाल यह बाक्स आठ खानों का है पर इसको आवश्यकताा के अनुसार अतिरिक्त खाने बढ़ाए जा सकेंगे। इसके हर बाक्स में मोशन सेंसर लगे हैं, जिससे पता चल सकेगा कि संबंधित बाक्स से दवा ली गई है या नहीं। इसकी डिजाइन और कंपोनेंट माउंटिंग शोधकर्ताओं ने स्वयं की है।
चार महीने में व्यायवसायीकरण की योजना
इंटरनेट आफ थिंग्स (आईओटी) आधारित स्मार्ट मेडिसिन कंटेनर को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए संस्थान के इनोवेशन एंड इनब्यूबेशन हब एमएनएनआइटी फाउंडेशन की मदद से स्टार्टअप विकसित किया जाएगा। इसके तहत डिवाइस को व्यावसायिक उत्पादन के योग्य बनाने, उसकी उपयोगिता को बेहतर करने और बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर काम होगा। शोधकर्ताओं की योजना अगले तीन से चार महीने में इसका व्यावसायीकरण शुरू करने की है। इसके बाद डिवाइस आम लोगों के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।
