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Karwa Chauth 2026 : करवाचौथ के व्रत में चंद्रमा को क्यों दिया जाता है अर्घ्य, आइए जानें क्या कहते हैं ज्योतिर्विद

By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Mon, 26 Oct 2026 04:20 PM (IST)

Karwa Chauth 2026 इस करवाचौथ 29 अक्टूबर को सुहागिनें अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखेंगी। इस बार द्विग्रही योग और ...और पढ़ें

Karwa Chauth 2026 करवाचौथ 29 अक्टूबर को है।

Karwa Chauth 2026 करवाचौथ 29 अक्टूबर को है।

HighLights

  1. ग्रह और नक्षत्रों की जुगलबंदी से बढ़ गया है पर्व का महत्व

  2. 29 अक्टूबर को महिलाएं रखेंगी करवाचौथ व्रत, करेंगी पूजन

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। Karwa Chauth 2026 अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि की संकल्पना साकार करने को सुहागिन महिलाएं करवाचौथ का व्रत 29 अक्टूबर को रखेंगी। पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य के लिए सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निराहार और निर्जला (बिना पानी के) रहेंगी।

छलनी से चांद फिर पति का देखेंगी चेहरा

सूर्यास्त के बाद मां पार्वती, भगवान शिव, कार्तिकेय और गणेश जी की पूजा करके छलनी से चांद और फिर अपने पति का चेहरा देखकर जल ग्रहण करेंगी। द्विग्रही योग और चंद्रमा के उच्च होने से पर्व का महत्व बढ़ गया है।

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वृष राशि में चंद्रमा उच्च में रहना पुण्यकारी : आचार्य देवेंद्र

श्रीधर्मज्ञानोपदेश संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार कार्तिक कृष्णपक्ष की चतुर्थी पर करवाचौथ पर्व मनाया जाता है। चतुर्थी गुरुवार अर्थात 29 अक्टूबर की भोर 4.27 बजे से लगकर शुक्रवार 3्0 अक्टूबर की भोर 2.11 बजे तक रहेगी। गुरुवार को रोहिणी नक्षत्र दोपहर 3.32 बजे तक है। दोपहर 3.33 बजे से मृगशिरा नक्षत्र लग जाएगा। तुला राशि में सूर्य और बुध के संचरण से द्विग्रही योग रहेगा। वहीं, वृष राशि में चंद्रमा के उच्च में रहना पुण्यकारी है।

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कल्याणकारी योग बना रहे चंद्रमा : आचार्य विद्याकांत

पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार करवाचौथ में चंद्रमा की स्तुति का विशेष महत्व है। वृष राशि में चंद्रमा उच्च के रहेंगे। चंद्रोदय शाम 7.57 बजे होगा। पूजन के समय मृगशिरा नक्षत्र रहेगा। मृगशिरा नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता सोम अर्थात चंद्रमा हैं। जो अत्यंत कल्याणकारी योग बना रहे हैं। पूजन स्थल पर स्थापित देवी-देवताओं का अलग-अलग मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए। इसमें ''ऊं शिवायै नम:'' से पार्वती का, ''ऊं नम: शिवाय'' से शिव का, ''ऊं षण्मुखाय नम:'' से स्वामी कार्तिकेय का, ''ऊं गणेशाय नम:'' से गणेश का तथा ऊं ''सोमाय नम:'' का जाप करते हुए चंद्रमा का पूजन करना चाहिए।

चंद्रमा से मिलती है निरोगी काया : डॉ. अमिताभ

Karwa Chauth 2026 ज्योतिषाचार्य डॉ. अमिताभ गौड़ के अनुसार करवाचौथ व्रत में चंद्रमा की पूजा धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। चंद्रमा मन का कारक एवं औषधियों को संरक्षित करते हैं। कार्तिक मास में औषधियों के गुण विकसित अवस्था में होते है। यह गुण उन्हें चंद्रमा से प्राप्त होता है। इससे व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ्य और निरोगी काया मिलती है। करवाचौथ के व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देने का विधान इसी कारण है। चलनी से देखने पर चंद्रमा की सकारात्मक किरणें सीधे शरीर में प्रवेश करती हैं।

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