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जल जीवन मिशन फर्जीवाड़ा : प्रयागराज में 20 करोड़ के फर्जी भुगतान में फंसे कई इंजीनियर, जांच शुरू

By Gyanendra Singh Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Tue, 19 May 2026 03:45 PM (IST)

प्रयागराज में जल जीवन मिशन के तहत 20 करोड़ रुपये के फर्जी भुगतान का बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें ...और पढ़ें

प्रयागराज में जल जीवन मिशन में फर्जी भुगतान का बड़ा मामला की जांच शुरू है। सोर्स- AI से जेनरेट की गई प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रयागराज में जल जीवन मिशन में फर्जी भुगतान का बड़ा मामला की जांच शुरू है। सोर्स- AI से जेनरेट की गई प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. लखनऊ की टेक्निकल टीम फर्जीवाड़ा जांच के लिए प्रयागराज में डेरा डाल दिया है

  2. अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता तथा चार एई और जेई इस फर्जीवाड़ा में घिरे

  3. इसी वर्ष फरवरी व मार्च में किया गया मनमाना भुगतान, आठ फर्मों के नाम गई राशि

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। जल जीवन मिशन में फर्जी भुगतान का बड़ा मामला प्रयागराज में पकड़ा गया है। इसमें कई इंजीनियर पूरी तरह से घिर गए हैं, जिसमें अधिशासी अभियंता और अधीक्षण अभियंता रहे प्रवीण कुमार कुट्टी का आजमगढ़ तबादला हो चुका है। लगभग 20 करोड़ रुपये का फर्जी तरीके से भुगतान करा लिया गया है।

उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित

इस मामले में प्रबंध निदेशक के निर्देश पर उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी गई है। जांच कमेटी में शामिल मुख्य अभियंता ने इस तरह के भुगतान की सभी फाइलें लखनऊ मंगा ली गई हैं। उनकी ओर से गठित की गई लखनऊ की टेक्निकल टीम जांच के लिए प्रयागराज में डेरा डाल दिया है।

खास-खास

- 112 योजनाओं में तरह-तरह के कार्यों के नाम पर 10-10 लाख रुपये के कराए गए भुगतान
- 60 पेयजल योजनाओं में पहले से हो चुके कार्यों को कागज पर दोबारा दिखाकर निकाली राशि
- 664 पेयजल योजना का हो रहा निर्माण, इसके अलावा 234 योजनाएं ली गई हैं रेट्रोफिटिंग में

सत्यापन रिपोर्ट में गबन का सामने आया मामला 

विभाग की सत्यापन रिपोर्ट में गबन का यह मामला सामने आया है। जल जीवन मिशन के तहत एक ही योजनाओं के विभिन्न कार्यों के लिए बार-बार फर्जी भुगतान हुआ है। इसमें कई योजनाओं में वास्तविक रूप से पाइप लाइन पहले से बिछी थी, फिर भी इन योजनाओं में कागज पर पाइप बिछाकर दोबारा भुगतान करा लिया गया, जिसमें 10 करोड़ रुपये का फर्जी पेमेंट हुआ है।

फर्जी भुगतान कराया गया

इसी तरह रेट्रोफिटिंग में ली गईं योजनाओं में भी करोड़ों का फर्जी भुगतान करा लिया गया और योजना पूर्ण दिखा दी गई। मतलब जिन योजनाओं को रेट्रोफिटिंग में लिया गया, वे इसके लायक थीं ही नहीं। वहां पहले ही काम हो चुका था और फिर फर्जी भुगतान कराया गया। इस तरह से 10-10 लाख रुपये का भुगतान 112 पेयजल योजनाओं का करा लिया गया।

तत्कालीन एसई व एक्सईएन समेत कई की जांच चल रही

इस प्रकरण की जांच प्रमुख अभियंता के नेतृत्व में मुख्य अभियंता मुख्यालय एके सिंह कर रहे हैं। फर्जी भुगतान को लेकर तत्कालीन एसई व एक्सईएन प्रवीण कुमार कुट्टी की विशेष रूप से जांच चल रही है। दरअसल, वह काफी समय तक एक साथ दोनों पदों पर तैनात थे। दो सहायक अभियंताओं तथा दो अवर अभियंताओं की भी जांच चल रही है।

प्रयागराज में पेयजल योजना के भुगतान में की गई गड़बड़ी की जांच शुरू करा दी गई है। टेक्निकल टीम पेयजल योजनाओं की मौके पर जाकर जांच कर रही हैं। इसके बाद उच्चस्तरीय जांच टीम भी मौके पर जाएगी।
- एके सिंह, मुख्य अभियंता मुख्यालय लखनऊ, उप्र जल निगम

664 पानी की टंकियां बन रहीं, 234 रेट्रोफिटिंग में

जनपद में कुल 664 पानी की टंकियां बन रही हैं। इसके अलावा 234 पानी की टंकियों को रेट्रोफिटिंग में लिया गया है। रेट्रोफिटिंग वह टंकियां हैं, जो काफी पुरानी हैं और उनकी मरम्मत कराई जा रही है। इसी तरह यमुनापार में मेजा क्षेत्र में गंगा किनारे और बारा में यमुना नदी के किनारे इंटेकवेल की स्थापना की जा रही है, जिससे मेजा, मांडा व कोरांव तथा जसरा, शंकरगढ़ के गांवों में जलापूर्ति की जाएगी।

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