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सर्दियों में GPS ट्रैकर से लैस होंगे पेट्रोलमैन, रियल-टाइम दर्ज होगा पटरियों का तापमान; यात्रियों का सफर सुरक्षित रहेगा

By Amarish Kumar Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Thu, 24 Sep 2026 09:08 PM (IST)

सर्दियों में रेल हादसों को रोकने और सफर को सुरक्षित बनाने के लिए रेलवे बोर्ड ने ट्रैक सुरक्षा के कड़े ...और पढ़ें

रेल पटरियों की जांच करता पेट्रोलमैन। साभार: डीआरएम एक्स हैंडल

रेल पटरियों की जांच करता पेट्रोलमैन। साभार: डीआरएम एक्स हैंडल

HighLights

  1. देश भर में लागू की गई व्यवस्था, सुरक्षित होगी यात्री

  2. भोर में तीन से छह बजे तक गहन निगरानी का निर्देश

अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। सर्दियों में कड़ाके की ठंड के कारण रेल पटरियों में सिकुड़न और दरार आने का खतरा बढ़ जाता है। रेल हादसों को रोकने और सफर को सुरक्षित बनाने के लिए रेलवे बोर्ड ने एनसीआर समेत पूरे देश में ट्रैक सुरक्षा के कड़े निर्देश जारी किए हैं। रात में गश्त करने वाले पेट्रोलमैन समय पर गश्त करते हुए निर्धारित पैदल दूरी तय करेंगे और इनकी निगरानी जीपीएस के जरिए होती रहेगी।

पहले पटरियों के तापमान को भी पारंपरिक तरीकों से नोट किया जाता था, जिससे सिस्टम पर तुरंत अपडेट मिलने में देरी होती थी। अब देश भर में पेट्रोलमैन जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस से लैस होंगे, कंट्रोल रूम से उनकी लाइव लोकेशन और मूवमेंट पर हर दिखेगी। पटरियों का तापमान लगातार मापने के लिए कंटीन्यूअस रेल थर्मामीटर हमेशा चालू रहेंगे और यह तापमान सीधे ''ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम'' में वास्तविक-समय में दर्ज होगा।

अत्यधिक ठंड और जोखिम वाले घंटों को ध्यान में रखकर पेट्रोलमैन और कीमैन की ड्यूटी का समय बदला जाएगा। भोर में तीन से छह बजे तक सबसे अधिक सतर्कता बरती जाएगी। रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक सिविल इंजीनियरिंग (प्लानिंग) के. आर. चौधरी के अनुसार गश्त के लिए केवल अनुभवी कर्मियों को लगाया जाएगा और उन्हें ठंड से बचाने के लिए गर्म कपड़े व जरूरी सुरक्षा किट दी जाएगी।

पटरियों की आंतरिक जांच (यूएसएफडी) बिना किसी देरी के पूरी की जाएगी और जहां भी पटरियों में घिसाव या जंग दिखेगा, वहां ट्रेनों की रफ्तार घटा दी जाएगी। सभी जोनल रेलवे के प्रधान मुख्य इंजीनियरों को कहा गया है कि यदि ट्रैक पर जरा सी भी खराबी की आशंका हो, तो तुरंत ट्रेनों को रोककर पहले ट्रैक को सुरक्षित करें और नियमों का कड़ाई से पालन कर अनुपालन रिपोर्ट बोर्ड को भेजें।

ऐसे होगी पटरियों की सुरक्षा

पटरियों के अंदर अगर बाल बराबर भी दरारें हैं तो यूएसएफडी मशीन हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स भेजकर पटरियों के भीतर छिपी इन अदृश्य दरारों को पकड़ लेगी। अब पटरियों के फास्टनरों को खोलकर, हाइड्रोलिक जैक व बर्नर की मदद से उन्हें ''डी-स्ट्रेस'' (तनाव मुक्त) किया जाएगा। ताकि शून्य डिग्री पर भी वे चटकें नहीं। पेट्रोलमैन को रात में अगर पटरी टूटी देखेंगे तो ट्रैक पर ''डेटोनेटर'' (रेलवे पटाखे) बांध देंगे। संकेत मिलते ही लोकोपायलट ट्रेन रोक देंगे।

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