Indian Railways : अब मिनटों में दुरुस्त होगी रेल पटरी, पोर्टेबल हाइड्रोलिक मशीन जल्द दूर करेगी खामी
उत्तर मध्य रेलवे ने ट्रैक रखरखाव के लिए पोर्टेबल हाइड्रोलिक टैंपिंग मशीन पेश की है, जो ट्रेनों को रोके बिना ...और पढ़ें

उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) में ट्रैक मेंटेनेंस के लिए 'पोर्टेबल हाइड्रोलिक टैंपिंग मशीन' से काम करते रेलकर्मी । सौ. सीपीआरओ
HighLights
ट्रेन आते ही तत्काल पटरी से हटाकर किनारे खड़ी कर दी जाएगी मशीन
उत्तर मध्य रेलवे में इस मशीन का सफल ट्रायल, अब बनेगी स्वादेशी मशीन
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। सब्बल और हथौड़ों के सहारे पटरियों के नीचे गिट्टियां ठोकते रेलकर्मियों की तस्वीर अब इतिहास बनने जा रही है। उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने ट्रैक मेंटेनेंस के पुराने ढर्रे को बदलते हुए अत्याधुनिक 'पोर्टेबल हाइड्रोलिक टैंपिंग मशीन'' को पटरी पर उतार दिया है।
बिना ट्रेनों को रोक पटरी की खामी दूर होगी
महज चार कर्मचारियों से संचालित होने वाली यह हल्की मशीन बिना ट्रेनों को रोके, मिनटों में पटरियों को हाई-स्पीड दौड़ के लिए पूरी तरह तैयार कर देगी। अब तक पटरियों के नीचे गिट्टियों की पैकिंग ढीली पड़ने पर या तो कई टन वजनी भारी-भरकम मशीनों को बुलाना पड़ता था या फिर गैंगमैन घंटों पसीना बहाकर हाथ से काम करते थे।
ट्रेन परिचालन नहीं रुकेगा
भारी मशीनों को ट्रैक पर उतारने के लिए ट्रेनों का परिचालन रोककर लंबा ट्रैफिक ब्लाक लेना पड़ता था, जिससे गाड़ियां लेट होती थीं। दूसरी ओर, मैनुअल तरीके से की गई पैकिंग में श्रम अधिक लगता था और वैसी एकरूपता व मजबूती नहीं आ पाती थी।
अत्याधुनिक मशीन की खूबियां
अत्याधुनिक पोर्टेबल मशीन से यह पूरी व्यवस्था बदल जाएगी। चार विशेष टूल्स से लैस यह मशीन भारी मशीनों जितनी ही उच्च कंपन आवृत्ति (वाइब्रेशन) पैदा कर स्लीपरों के दोनों किनारों पर गिट्टियों को बेहद मजबूती से कस देती है। इसका सबसे बड़ा फायदा इसका आफ-ट्रैक होना है।
इसे कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है
ट्रेन आते ही इसे कुछ ही मिनटों में आसानी से पटरी से हटाकर किनारे खड़ा कर देते हैं। यानी काम भी नहीं रुकेगा और ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक भी नहीं लगेगा। यह मशीन रेलवे यार्ड, लूप लाइनों और खासकर उन संवेदनशील प्वाइंट व क्रासिंग पर भी बेहद सटीक काम करती है, जहां ट्रेनें लाइन बदलती हैं और भारी मशीनें आसानी से नहीं पहुंच पातीं।
यात्रियों को भी झटका नहीं लगेगा
उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ डॉ. शिवम शर्मा के अनुसार वर्तमान में यह मशीन आयातित है, लेकिन जल्द ही इसका मेक इन इंडिया के तहत स्वदेशी संस्करण तैयार किया जाएगा। गिट्टियों की इस त्वरित और सटीक पैकिंग से न केवल ट्रेनों के डिरेल होने का जोखिम खत्म होगा, बल्कि यात्रियों को भी झटकारहित, सुरक्षित और समयबद्ध रेल सफर मिल सकेगा।
