भारतीय रेलवे ने छोटे ठेकेदारों को बड़ी राहत दी, अब बीमा जमानत पत्र से मिल सकेगी काम की गारंटी
भारतीय रेलवे ने छोटे और मध्यम ठेकेदारों को बड़ी राहत देते हुए अब काम की गारंटी के लिए बीमा जमानत ...और पढ़ें

प्रयागराज जंक्शन पर सफाई करता सेवा अनुबंध से जुड़ा कर्मचारी। जागरण
HighLights
प्रीमियम जमा कर बीमा कंपनी से मिलने से सकेंगे बीमा जमानत पत्र
बड़े ठेकेदारों की मनमानी पर लगेगी मनमानी, खुलेंगे रोजगार के अवसर
अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। भारतीय रेलवे ने सर्विस कांट्रैक्ट्स (सेवा अनुबंधों) जैसे सफाई, लिनेन (चादर-कंबल आपूर्ति) और हाउसकीपिंग (रखरखाव) के क्षेत्र में छोटे और मध्यम स्तर के ठेकेदारों को एक बहुत बड़ी राहत दी है। रेलवे बोर्ड ने ठेका मिलने पर काम की गारंटी के रूप में जमा होने वाली ''परफार्मेंस गारंटी'' (कार्य निष्पादन गारंटी) के लिए अब ''इंश्योरेंस श्योरिटी बांड'' (बीमा जमानत पत्र) को भी स्वीकार करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है।
इस नीतिगत बदलाव के लिए रेलवे बोर्ड ने 29 सितंबर को आधिकारिक आदेश जारी किया है। इससे रेलवे से जुड़े देश भर के करीब 50 हजार से अधिक वेंडर्स और ठेकेदारों को सीधा लाभ मिलेगा, जबकि हजारों नए व छोटे ठेकेदारों के लिए रोजगार की राह खुलेगी।
अब तक ठेकेदारों को सुरक्षा राशि के लिए अनिवार्य रूप से बैंक गारंटी, एफडीआर या डिमांड ड्राफ्ट देना पड़ता था। बैंक गारंटी हासिल करने के लिए बैंकों में भारी मार्जिन मनी (जमानत राशि) या संपत्ति गिरवी रखनी पड़ती थी। इसके चलते छोटे व नए ठेकेदारों की लाखों रुपये की वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) बैंकों में फंस जाती थी। जबकि छोटे व नए ठेकेदार योग्य होने के बावजूद लिक्विडिटी (नकदी) की कमी के कारण टेंडर नहीं भर पाते थे।
रेलवे बोर्ड के निदेशक/एमई (पर्यावरण और हाउसकीपिंग प्रबंधन) लव शुक्ला के अनुसार अब सेवा अनुबंधों बीमा कंपनियों द्वारा जारी जमानत पत्र मान्य होगा। इसमें बीमा कंपनी गारंटी देती है कि ठेकेदार के काम में चूक करने पर भरपाई बीमा कंपनी करेगी। इसमें ठेकेदार केवल एक तय प्रीमियम देकर यह बांड मिल जाएगा। यह व्यवस्था अधिकतम 36 महीने (3 साल) तक की अवधि वाले प्रोजेक्ट्स पर लागू होगी। समय-सीमा बढ़ने पर नया बांड देना होगा।
अब बड़े ठेकेदार नहीं कर पाएंगे मनमानी
अब तक रेलवे के सर्विस टेंडरों में भारी बैंक गारंटी की शर्त के चलते केवल चुनिंदा बड़े ठेकेदारों का ही दबदबा रहता था। प्रतिस्पर्धा न होनेसे अक्सर बड़े ठेकेदार सिंडिकेट बनाकर मनमानी दरों पर ठेका लेते थे और बाद में छोटे ठेकेदारों को कम पैसों में ''पेटी'' (सब-लेट) पर काम थमा देते थे। अब बीमा जमानत पत्र के जरिए छोटे और मझोले ठेकेदारों के लिए भी सीधे बोली लगाने की राह खुल गई है। इससे टेंडरों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बड़े ठेकेदारों का एकाधिकार टूटेगा और रेलवे को कम लागत में बेहतर काम मिल सकेगा।
