रेलवे की पर्यावरण संरक्षण की ओर बड़ी पहल, जमीन और पानी को जहर बनने से बचाने के लिए देश भर में हटाएगा ई-कचरा
रेलवे अपने कार्यालयों से निकलने वाले अनुपयोगी ई-कचरे का वैज्ञानिक निपटान करेगा ताकि जमीन और पानी को जहरीला होने से ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाया गया है।
HighLights
रेलवे कार्यालयों में ई-कचरे का वैज्ञानिक निपटान शुरू होगा।
4,000 से अधिक सीपीयू, मॉनिटर 30 अक्टूबर तक रीसाइकिल होंगे।
यह पहल जमीन, पानी को प्रदूषण से बचाएगी, संसाधन बचेंगे।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। रेलवे कार्यालयों में धूल फांकते पुराने कंप्यूटर और तारों का जंजाल अब मिट्टी व भूजल में चुपचाप जहर नहीं घोल सकेगा। रेलवे अपने कार्यालयों से निकलने वाले अनुपयोगी ई-कचरे का वैज्ञानिक निपटान करेगा। अभी तक कंप्यूटर, सर्किट बोर्ड और बैटरियों जैसे ई-कचरे को खुले मैदानों या सामान्य कूड़ेदानों में फेंक दिया जाता है। तो उनमें मौजूद सीसा, पारा और कैडमियम जैसी जानलेवा भारी धातुएं बारिश के पानी के साथ रिसकर जमीन में समा जाती हैं।
इससे वह भूजल सीधे जहरीला हो जाता है, जिसे लोग पीने और खेती के काम में लेते हैं। वहीं कबाड़ से धातुएं निकालने के लिए तारों को जलाने से हवा में गंभीर प्रदूषण फैलता है। रेलवे के रीसायकलर्स के जरिए शुरू किए गए इस वैज्ञानिक निपटान से जमीन और पानी दोनों इस बड़े खतरे से सुरक्षित रहेंगे।
रेलवे बोर्ड के कंप्यूटर एवं सूचना प्रणाली निदेशालय के निदेशक/एमई और ईडीपीजी भरत भूषण के अनुसार 4,000 से अधिक सीपीयू, मानिटर, यूपीएस और कई टन केबल को 30 अक्टूबर तक वैज्ञानिक रीसाइक्लिंग से जोड़ दिया जाएगा। इससे प्राकृतिक संसाधनों की बचत होगी, कार्यालयों में जगह खाली होगी और धरती व पानी दोनों प्रदूषण से सुरक्षित रहेंगे। साथ ही यह संदेश भी जा रहा है कि डिजिटल विकास के साथ प्रकृति को बचाना भी उतना ही जरूरी है। सभी जोनल रेलवे को पुराने आईटी उपकरणों के सुरक्षित निस्तारण के लिए निर्देश भेज दिया गया है।
