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हरतालिका तीज: शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और शिव-पार्वती को प्रसन्न करने के मंत्र क्या हैं? बता रहे ज्योतिर्विद

By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 13 Sep 2026 05:44 PM (IST)

हरतालिका तीज का पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा, जिसमें सुहागिनें अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत रखेंगी। शाम 6 ...और पढ़ें

हरतालिका तीज की पूर्व संध्या पर प्रयागराज में हाथों में मेहंदी लगवाती महिलाएं। जागरण

हरतालिका तीज की पूर्व संध्या पर प्रयागराज में हाथों में मेहंदी लगवाती महिलाएं। जागरण

HighLights

  1. शाम छह से रात आठ बजे तक स्वाति नक्षत्र व ऐंद्र योग के संयोग में पूजन अत्यंत पुण्यकारी 

  2. हरतालिका तीज निर्जला व्रत 14 सितंबर को, शिव-पार्वती के लिए करें अलग-अलग जप

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। भाद्रपद शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि पर संयम, समर्पण व संस्कार की प्रतीक हरतालिका तीज पर्व मनाया जाएगा। अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए सनातन धर्मावलंबी महिलाएं सोमवार 14 सितंबर को निर्जला रहकर भजन-पूजन करेंगी। दोपहर में गंगा, यमुना व संगम के पवित्र जल में स्नान करके शाम को भगवान शिव, माता पार्वती व गणेश जी की स्तुति करेंगी।

एंद्र योग के संयोग में पूजन अत्यंत पुण्यकारी

ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार तृतीया तिथि रविवार की सुबह 7.15 बजे लग चुकी है, जो सोमवार की सुबह 7.15 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। शाम छह से रात आठ बजे तक स्वाति नक्षत्र व ऐंद्र योग का संयोग है। इसमें पूजन करना अत्यंत पुण्यकारी रहेगा। मान्यता है कि भगवान शिव को पाने के लिए माता पार्वती ने हरतालिका तीज का निर्जला व्रत रखा था। यही कारण है कि महिलाएं निर्जला रहकर हाथों में मेहंदी रचाकर सोलह श्रृंगार करके शाम को भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करती हैं।

मेंहदी लगवाने महिलाओं की भीड़

व्रत रखने वाली महिलाओं ने रविवार को पूजन सामग्री, भगवान शिव व पार्वती की प्रतिमा खरीदने के साथ मेहंदी लगवाया। सिविल लाइंस, कटरा में मेहंदी लगवाने के लिए महिलाओं की देर रात तक भीड़ रही।

शिव-पार्वती के लिए करें अलग-अलग जप

पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार हरतालिका तीज व्रत में भगवान शिव व माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग मंत्रों का 108 बार जप करना चाहिए। माता पार्वती के लिए- ऊं उमायै नम:, पार्वत्यै नम:, जगद्धात्रयै नम:, शिवायै नम:, ब्रह्मरूपिण्यै नम: में किसी एक का जप करें। वहीं, भगवान शिव के लिए - ऊं हराय नम:, ऊं महेश्वराय नम:, ऊं शम्भवे नम:, ऊं शूलपाणये नम:, ऊं नम: शिवाय, ऊं पशुपतये नम: व ऊं महादेवाय नम: में किसी एक का 108 बार जप करना उत्तम रहेगा।

शिव-पार्वती पूजन की विधि 

उन्होंने बताया कि भगवान शिव-पार्वती, रिद्धि-सिद्धि व गणेश जी की आकृति (प्रतिमा) को पवित्र चौकी पर विराजमान करके पूजन करना चाहिए। पार्वती को मेहंदी, चूड़ी व सुहाग की सामग्री चढ़ाएं। भगवान शिव को फूल, बेलपत्र, शमी की पत्ती, धूप, दीप, गंध, चंदन, चावल, पुष्प, शहद, यज्ञोपवीत, धतूरा, कमल गट्टा अर्पित करना चाहिए।

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