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79 साल के पिता को मृत दिखाकर बेटे ने बेच दी पैतृक जमीन, हाई कोर्ट ने दिए जांच के आदेश

Published: Mon, 05 Oct 2026 08:25 AM (GMT+05:30)

गाजीपुर में एक बेटे ने अपने 79 वर्षीय पिता हरिहर शर्मा को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाकर उनकी पैतृक जमीन बेच दी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट। (तस्वीर- फाइल)

इलाहाबाद हाई कोर्ट। (तस्वीर- फाइल)

HighLights

  1. बेटे ने 79 वर्षीय पिता को मृत दिखाकर जमीन बेची।

  2. फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर पैतृक संपत्ति का सौदा किया।

  3. हाई कोर्ट ने डीएम को संयुक्त जांच का आदेश दिया।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। गाजीपुर में 79 वर्षीय हरिहर शर्मा को जीवित रहते सरकारी रिकार्ड में मृत दिखाकर उनकी पैतृक जमीन बेचने का मामला सामने आया है। आरोप है कि उनके बेटे ने ग्राम पंचायत सचिव के माध्यम से वर्ष 2021 में हरिहर का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाया और उसी आधार पर जमीन में हिस्सेदारी बेच दी।

मामला कोर्ट पहुंचा तो 17 सितंबर को हरिहर को खुद उपस्थित होकर अपनी पहचान बैंक पासबुक और आधारकार्ड से साबित करनी पड़ी। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने इसे गंभीर प्रकरण बताते हुए बलिया और गाजीपुर के जिलाधिकारियों को संयुक्त जांच कर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी। हरिहर ने कोर्ट को बताया कि वह अपने दूसरे बेटे प्रकाश चंद्र शर्मा के साथ रांची में मजदूरी करते हैं। गाजीपुर के ताजपुर देहना गांव में उनकी पैतृक जमीन की देखरेख बड़ा बेटा ईश्वरचंद करता था।

हरिहर के मुताबिक, उनके भतीजे संतोष शर्मा ने फोन कर बताया कि ईश्वरचंद ने उन्हें मृत दिखाने की साजिश रची है। आरोप है कि ईश्वरचंद ने वर्ष 1991 में हरिहर की मृत्यु होने की गलत जानकारी देकर ग्राम पंचायत सचिव के माध्यम से 27 मार्च 2021 को उनका फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा लिया।

इसके बाद हरिहर को मृत दिखाकर उनकी पैतृक जमीन में हिस्सेदारी को लेकर लेनदेन किया गया। कोर्ट ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि 30 साल बाद आखिर कोई प्राधिकार किसी का मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे जारी कर सकता है।

हरिहर ने बताया कि देहना गांव में उनकी 0.3790 हेक्टेयर और 0.3560 हेक्टेयर जमीन थी। फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र के आधार पर जमीन के आधे और चौथाई हिस्से को बेच दिया गया। जब उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी हुई तो उन्होंने पुलिस में एफआइआर दर्ज कराई।

मामले की जांच के बाद पुलिस चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी पक्ष रखने को कहा था। बलिया के तत्कालीन जिलाधिकारी मंगलाप्रसाद सिंह और मुख्य चिकित्साधिकारी अभय नारायण राम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए थे।

कोर्ट ने डीएम बलिया को आदेश दिया कि वह एसडीएम रसड़ा को शामिल करते हुए टीम गठित कर मृत्यु प्रमाण पत्र की सत्यता और याची की पहचान की जांच करें और ईश्वरचंद, प्रकाश चंद्र तथा हरिहर शर्मा के बयान दर्ज करें। साथ ही बलिया के सावन गांव स्थित जमीन की भी जांच की जाए।

कोर्ट ने एसपी बलिया को बुजुर्ग को सुरक्षा देने और दोनों जिलाधिकारियों को विवादित जमीन का कोई और बैनामा न होने देने तथा इस आदेश को रजिस्ट्री और राजस्व विभाग में प्रसारित करने को कहा है। अगली सुनवाई में याची और उसके दोनों बेटों को कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है।

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