प्रयागराज के गौहनिया में नदी के चेक डैम पर लगे जाल में मृत मिला मगरमच्छ, चार और होने की आशंका से ग्रामीणों में दहशत
प्रतापगढ़ के बाद अब प्रयागराज के गौहनिया में एक चेक डैम पर लगे जाल में एक मगरमच्छ मृत मिला, जिससे ...और पढ़ें
HighLights
जाल में फंसे मगरमच्छ को गौहनिया के ग्रामीणों ने बाहर निकाला
नदी किनारे चार मगरमच्छों के होने की जताई जा रही आशंका
संसू,जागरण, लालापुर (प्रयागराज)। पिछले दिनों प्रतापगढ़ में गंगा नदी के स्नान घाट पर मगरमच्छ को देखकर लोग दहशत में आ गए थे। अब मंगलवार को प्रयागराज के यमुनापार में लालापुर थाना क्षेत्र के गौहनिया स्थित चिल्ला गौहानी मजरा में दिखा। नदी के चेक डैम पर लगे जाल में मृत फंसा मिला। ग्रामीणों ने नदी में चार मगरमच्छ होने की आशंका जताई है, जिससे दहशत का माहौल है।
गांव के निकट बहती है नदी
ग्रामीणों ने बताया कि गांव से महज 200 मीटर की दूरी पर बहने वाली यह नदी आगे जाकर, पुरेकिन्नर एवं जगदीशपुर होते हुए सीधे यमुना नदी में मिलती है। मगरमच्छ मिलने के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है, क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार इलाके में अभी भी चार और मगरमच्छ मौजूद हैं।

जाल में लटका मिला मृत मगरमच्छ
गौहनिया निवासी श्रृंगी आदिवासी ने बताया कि लोग मछली पकड़ने के लिए जाल लगाते हैं। मंगलवार सुबह जब वह नदी की ओर गए, तो उन्होंने देखा कि एक मगरमच्छ जाल में लिपटा हुआ चेक डैम के सहारे लटक रहा था। उसका मुंह खुला था और उसमें पानी भर रहा था। मगरमच्छ में कोई हलचल न देखकर उन्होंने तुरंत ग्रामीणों को इसकी सूचना दी। इसके बाद भारी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और तीन-चार लोगों ने मिलकर किसी तरह मृत मगरमच्छ को पानी से बाहर निकाला।
मांद बनाकर रह रहे हैं चार और मगरमच्छ
सुकेश आदिवासी, मूलचंद आदिवासी, कमलेश पाल, रूपेंद्र यादव, करण यादव और बड़कू यादव ने बताया कि यह मगरमच्छ पिछले छह महीने से इसी इलाके में यदा-कदा देखे जा रहे थे। हाल ही में हुई बारिश और नदी में आई बाढ़ के दौरान यहां 4 से 5 मगरमच्छों की मौजूदगी का दावा किया गया था। ग्रामीणों ने जब नदी किनारे जांच की, तो पता चला कि बड़ी-बड़ी काश-कुशा की झाड़ियों के बीच इन मगरमच्छों ने अपनी पक्की मांद (डेरा) बना लिया है। इनकी लंबाई लगभग 3 फीट से 6 फीट तक है।
सियार को निगला, पालतू मवेशियों पर हमले का डर
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दिन पहले ही मगरमच्छ ने एक सियार को अपना शिकार बनाया था। इसके अलावा नदी किनारे जाने वाली बकरियों और छोटे जानवरों पर भी ये हमला करने का प्रयास करते रहते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, मगरमच्छ अक्सर नदी से निकलकर आसपास के खेतों तक में टहलते हुए देखे गए हैं, जिससे खतरा बढ़ गया है।
खेती-किसानी ठप होने की नौबत
इन दिनों नदी का जलस्तर थोड़ा कम हुआ है और किसान अपने खेतों में सरसों एवं अन्य फसल की बुवाई के लिए जुताई का काम शुरू कर रहे हैं। हालांकि खेतों के नदी के बिल्कुल करीब होने के कारण किसान काफी डरे हुए हैं।
बच्चों और मछुआरों को चेतावनी
बस्ती में डर का माहौल होने के कारण बच्चों को नदी की तरफ जाने से सख्त मना किया गया है। साथ ही मछली पकड़ने वालों को भी सावधान रहने की सलाह दी गई है। ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग के रेंजर को इस संबंध में पहले भी सूचना दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन व वन विभाग से ग्रामीणों की अपील
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से पुरजोर अपील की है कि मांद में छिपे बाकी चारों मगरमच्छों को जल्द से जल्द रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जाए, ताकि किसान, चरवाहे और ग्रामीण बिना किसी डर के अपनी खेती-बाड़ी व दैनिक कार्य संपन्न कर सकें।
वन विभाग की टीम मौके पर जाएगी
इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी अजय कुमार ने बताया कि विभाग की टीम मौके पर पहुंचेगी और मृत मगरमच्छ को अपने कब्जे में लेगी। इसका पता लगाया जाएगा कि वहां मांद बनाकर मगरमच्छ रह रहे हैं। अगर ऐसा है तो उन्हें पकड़ा जाएगा जाएगा। उन्होंने बताया कि डीएफओ प्रयागराज को सूचित कर दिया गया है।
